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Dainik Bhaskar अब मछली बताएगी आयुर्वेदिक दवाओं की ताकत:कम खर्च-तेज रिजल्ट के कारण जेब्राफिश पहली पसंद, जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में चल रहा रिसर्च
चूहा, बंदर और खरगोश के बाद अब जेब्राफिश दवाओं के परीक्षण के लिए इस्तेमाल की जा रही है। दावा है कि देश में सबसे पहले आयुष शिक्षण संस्थान के रूप में राजधानी जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित कर जेब्राफिश पर आयुर्वेदिक दवाओं के परीक्षण की शुरुआत की है। जेब्राफिश से रिसर्च की स्पीड और एक्यूरेसी में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। संस्थान का कहना है कि आयुर्वेद हजारों सालों के अनुभव पर आधारित है, लेकिन ग्लोबल लेवल पर आयुर्वेदिक दवाओं की स्वीकार्यता बढ़ाने और सटीक वैज्ञानिक डेटा हासिल करने के लिए दवाओं को लेकर रिसर्च जारी है। इस कड़ी में अब जेब्राफिश पर आयुर्वेदिक दवाओं का प्री-क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है। सिलसिलेवार समझिए, जेब्राफिश मछली क्यों बनी पसंद… जेब्राफिश क्या है और इसे क्यों चुना जेब्राफिश एक छोटे साइज वाली मीठे पानी की मछली है। इसका वैज्ञानिक नाम Danio rerio है। करीब दो इंच तक इसकी लंबाई होती है। आयुर्वेदिक दवाओं की प्री क्लीनिकल ट्रायल के लिए जेब्राफिश के चयन के कई कारण हैं। इंसान और जेब्राफिश के बीच जेनेटिक समानताएं हैं। इंसानों और जेब्राफिश के जीन 70 फीसदी तक समान होते हैं। इसके भ्रूण पारदर्शी होते हैं। इससे रिसर्च करने वाले माइक्रोस्कोप के जरिए यह देख सकते हैं कि दवा मछली के हृदय, मस्तिष्क या अन्य अंगों पर कैसे काम कर रही है। जेब्राफिश का तेजी से डेवलपमेंट, समय और लागत कम जेब्राफिश का अन्य जीवों के मुकाबले तेजी से डेवलपमेंट होता है। जेब्राफिश के अंग 24 से 48 घंटों के अंदर विकसित होने शुरू कर देते हैं। यह एक साथ 100 से अधिक अंडे देती है। चूहों और अन्य जीवों पर परीक्षण करने में समय ज्यादा लगता है, जबकि जेब्राफिश पर परीक्षण कुछ ही दिनों में पूरा हो जाता है। चूहों या बंदरों की तुलना में जेब्राफिश का रख-रखाव काफी सस्ता होता है। इन्हें कम जगह में बड़ी संख्या में पाला जा सकता है। इन पर प्रयोग करना कम जटिल माना जाता है। प्री-क्लिनिकल ट्रायल क्या होता है दुनिया में किसी भी नई दवा को बाजार में लाने से पहले दो चरणों से गुजरना पड़ता है। पहला है प्री-क्लिनिकल ट्रायल और दूसरा है क्लिनिकल ट्रायल। प्री-क्लिनिकल ट्रायल किसी भी दवा के रिसर्च का पहला चरण है। ये ट्रायल पहले जीवों पर यानी चूहों, खरगोश, बंदरों या जेब्राफिश पर किया जाता है। इसमें दवा से अंगों के डेवलपमेंट, नुकसान, सुरक्षित खुराक को देखा जाता है। जब प्री-क्लिनिकल ट्रायल में दवा सुरक्षित और प्रभावी पाई जाती है, तब इसे इंसानों पर टेस्ट किया जाता है। इसे क्लिनिकल ट्रायल कहा जाता है। कैसे किया जाता है ट्रायल जेब्राफिश को खिलाकर या फिर इंजेक्शन के जरिए दवाओं का ट्रायल किया जाता है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में रस शास्त्र विभाग के एचओडी डॉ.अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि जेब्राफिश मॉडल बायोमेडिकल रिसर्च का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस पर किए जाने वाले रिसर्च से मिलने वाली जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों को समझने एवं स्वीकार करने में सहायक होगी। उन्होंने दावा किया कि आयुर्वेद में देशभर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में सबसे पहले इसकी शुरुआत की गई है। अब धीरे धीरे अन्य संस्थानों में भी इसकी शुरुआत की जा रही है। उन्होंने बताया कि चूहों और अन्य जीवों की तुलना में जेब्राफिश पर ट्रायल काफी सस्ता रिसर्च का माध्यम है। एमडी-पीएचडी स्कॉलर को किया जा रहा प्रेरित आयुर्वेद की अलग-अलग दवाओं के प्री-क्लिनिकल टेस्ट के लिए राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के एमडी और पीएचडी स्टूडेंट्स को जेब्राफिश के उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हाल ही में एक स्टूडेंट स्पर्म जनरेट करने को लेकर जेब्राफिश पर एक प्रोजेक्ट कर रहा है7 इसके अलावा राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में जेब्राफिश पर कई दवाओं का ट्रायल चल रहा है। इनमें न्यूरो डिजनरेटिव डिसऑर्डर और क्रॉनिक डिजीज शामिल हैं। जेब्राफिश में जेनेटिक मॉडिफिकेशन करना भी आसान होता है।
Dainik Bhaskar राजस्थान के 40 जिलों में पारा 10°C से नीचे:हिमाचल-कश्मीर, उत्तराखंड में भारी बर्फबारी और MP समेत 3 राज्यों में बारिश का अलर्ट
उत्तर भारत के हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी से मैदानी इलाकों में ठंड बढ़ी है। मौसम विभाग के मुताबिक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से अगले 2–3 दिन में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी, जबकि मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में आंधी-बारिश के आसार हैं। हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी से हालात बिगड़े हुए हैं। मनाली में सैकड़ों पर्यटक फंसे हैं। NH-3 सोलंग नाला तक खुला है, आगे केवल हल्के वाहन चल रहे हैं। मौसम विभाग ने कुल्लू, किन्नौर, चंबा और लाहौल-स्पीति में ऑरेंज, जबकि शिमला समेत अन्य जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में सोमवार को भी बर्फबारी हुई। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 0.1°C और गुलमर्ग में माइनस 9°C दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश में सोमवार को भोपाल, ग्वालियर-उज्जैन समेत 20 से ज्यादा जिलों में कोहरा रहा। रीवा में कोहरा इतना घना था कि 50 मीटर बाद कुछ नहीं दिखा। राजस्थान के तीन शहरों में पारा माइनस में चला गया। जयपुर, नागौर, सीकर और हनुमानगढ़ सहित कई जिलों में तापमान गिरने से बर्फ जमी। एक जिले को छोड़ बाकी 40 जिलों में न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे दर्ज हुआ। देशभर में मौसम की 4 तस्वीरें... अन्य राज्यों में मौसम का हाल
Dainik Bhaskar 'तुझे मारकर सबूत नहीं छोड़ूंगा':यमुनानगर में महिला बोली- पति ने हिंदू महिला का कटा सिर दिखाया, कहा- इसके प्रेमी की तरह नहीं फंसूंगा
हरियाणा के यमुनानगर में थर्मामीटर का पारा (मर्करी) पीकर सुसाइड की कोशिश करने के मामले में लगातार खुलासे हो रहे हैं। यूपी के सहारनपुर की रहने वाली रेखा उर्फ रुबीना ने दैनिक भास्कर एप की टीम को बताया कि उसका पति फुकरान उसे सहारनपुर की ही हिंदू महिला उमा की सिर कटी लाश का वीडियो दिखाकर कहता था कि अगर विरोध किया तो उसका भी वही हाल करेगा। फुकरान ने उससे कहा था कि उमा का प्रेमी तो पकड़ा गया था, लेकिन वह उसे मारने के बाद कोई सबूत नहीं छोड़ेगा। रेखा ने यह भी आरोप लगाया कि फुकरान ने रिलेशनशिप में आते ही उसका मोबाइल हैक कर लिया था और उस पर नजर रखने लगा था। निकाह के बाद जब वह गर्भवती हुई तो उसका गर्भपात करवा दिया। उधर, इस मामले में हिंदू संगठनों के पदाधिकारी आज, मंगलवार को SP से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे। हिंदू संघर्ष समिति के पदाधिकारी उदयवीर शर्मा का कहना है कि यह मामला केवल एक महिला के साथ घरेलू हिंसा या धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जबरन धर्म परिवर्तन, पहचान बदलना, धार्मिक आस्था का अपमान और जान से मारने की धमकियां जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। अब जानिए रेखा उर्फ रुबीना ने क्या बताया.... 22 जनवरी को सुसाइड की कोशिश की रेखा भी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की ही रहने वाली है। 2020 में वह यमुनानगर के सेक्टर 17 में जॉब करती थी। इसी दौरान उसकी पहचान अराइयां गांव के फुरकान से हुई। रेखा ने आरोप लगाया कि शुरुआत में फुकरान ने अपना नाम अजय बताया और अपने प्रेम जाल में फंसा लिया। सहारनपुर के देवबंद ले जाकर जबरन धर्म परिवर्तन कराकर निकाह पढ़वा लिया। इसके बाद फुकरान उसे प्रताड़ित करने लगा। उसके भाई ने भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। फुकरान ने शादी के बाद हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें जला दीं और उसकी राख टॉयलेट में बहा दी। इन सब प्रताड़नाओं से तंग आकर रेखा ने 22 जनवरी को थर्मामीटर तोड़कर उसका पारा पीकर सुसाइड की कोशिश की। इसके बाद सिटी थाना पुलिस ने फुरकान और उसके भाई कुर्बान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115, 196(1), 351(2) व 85 के तहत मामला दर्ज कर लिया। अब उमा हत्याकांड के बारे में जानिए, जिससे रेखा को डराया..... 7 दिसंबर को मिली थी सिर कटी लाश यमुनानगर के बहादुरपुर क्षेत्र के जंगल में 7 दिसंबर 2025 को एक सिर कटी लाश मिली थी। शव की हालत इतनी भयावह थी कि शुरुआती तौर पर उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया। जांच में मृतका की पहचान सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली उमा के रूप में हुई। उमा पिछले करीब दो साल से सहारनपुर निवासी मोहम्मद बिलाल के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। उमा एक बच्चे की मां भी थी और वह बिलाल पर शादी करने का दबाव बना रही थी। शादी टूटने के डर से हत्या की पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि बिलाल की शादी 14 दिसंबर 2025 को किसी और महिला से तय थी। उसे डर था कि अगर उमा ने उसके परिवार या होने वाली पत्नी को उनके रिश्ते के बारे में बता दिया तो उसकी शादी टूट जाएगी। इसी डर और दबाव के चलते उसने उमा को रास्ते से हटाने की साजिश रची। 6 दिसंबर की शाम बिलाल ने उमा को कार में बैठाया और उसे बहला-फुसलाकर यमुनानगर की ओर ले गया। एक सुनसान इलाके में ले जाकर उसने उमा का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। 14 दिसंबर को गिरफ्तार हुआ बिलाल बिलाल ने पहचान छिपाने के इरादे से उसने शव का सिर धड़ से अलग कर दिया और कपड़े उतारकर लाश को जंगल में फेंक दिया। हत्या के बाद बिलाल सामान्य जीवन जीने की कोशिश करता रहा और शादी की तैयारियों में भी जुटा रहा। उधर, पुलिस ने शव मिलने के बाद विशेष जांच टीम बनाई और सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोपी तक पहुंची। 14 दिसंबर को पुलिस ने आरोपी मोहम्मद बिलाल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- अजय नाम बताकर प्रेम जाल से फंसाया:यमुनानगर में महिला बोली- निकाह के बाद मुझे रुबीना बनाया, 4 हिंदू युवतियों से बात करता था पति हरियाणा के यमुनानगर में थर्मामीटर तोड़कर पारा (मर्करी) पीने वाली महिला रेखा ने कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं। निकाह के बाद पति फुरकान ने आधार कार्ड में उसका नाम चेंज कराकर पहली पत्नी के नाम पर ही रुबीना करा दिया। निकाह के पहले अजय नाम से 6 माह तक उसे प्रेम जाल में फंसाया। पढ़ें पूरी खबर... हिंदू प्रेमिका का सिर काटकर निकाह की शॉपिंग की:हिमाचल के होटल में मारना चाहता था, मौका नहीं मिला; यमुनानगर लाकर हत्या की हरियाणा के यमुनानगर में 7 दिसंबर को मिली महिला की सिर कटी लाश की मर्डर मिस्ट्री में रविवार को खुलासा होने के बाद लगातार सनसनीखेज तथ्य सामने आ रहे हैं। हिंदू प्रेमिका उमा (30) को ठिकाने लगाने के लिए 6 दिसंबर की शाम टैक्सी ड्राइवर बिलाल 6 घंटे बेचैन रहा। वो हिमाचल के पांवटा साहिब की तरफ होटल में कमरा लेकर हत्या करना चाहता था। पूरी खबर पढ़ें...
Dainik Bhaskar हरियाणा में गणतंत्र दिवस के टॉप मोमेंट्स:नेता फोन देखते रहे, झांकी वाला ट्रैक्टर धंसा, गवर्नर के प्रोग्राम में तिरंगे की डोर उलझी
हरियाणा में सोमवार को 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम के सेक्टर-38 स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम में तिरंगा फहराया। इस कार्यक्रम की थीम वंदे मातरम् के 150 वर्ष और आत्मनिर्भर भारत रखी गई थी। यमुनानगर में ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने जिला स्तरीय कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने प्रस्तुती देने वाले बच्चों को 21 लाख रुपए देने की घोषणा की। प्रोग्राम में शामिल सभी स्टूडेंट्स में ये राशि बांटी जाएगी। उधर, कुछ जिलों में तिरंगा फहराने के दौरान कुछ घटनाएं भी हुईं। पंचकूला में राज्यपाल असीम घोष के झंडा फहराने को दौरान तिरंगे में डोर उलझ गई। टोहाना में भाजपा विधायक रणधीर पनिहार ने एक मिनट देरी से तिरंगा फहराया। हांसी में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के भाषण के दौरान जिलाध्यक्ष फोन में लगे रहे। वहीं, फरीदाबाद में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव अपने भाषण के दौरान कई शब्दों को बोलने में अटकती दिखीं। एक बार संविधान को समाधान, चहुंमुखी को चुहुमुखी कह दिया। इसके अलावा भी कई शब्दों में कुछ ऐसा ही दिखा। गणतंत्र दिवस के दौरान राज्य में हुए 4 मोमेंट्स तस्वीरों में देखें... पंचकूला में तिरंगे में डोर उलझी गणतंत्र दिवस पर हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष ने पंचकूला में तिरंगा फहराया। इस दौरान पोल में तिरंगे में डोर उलझ गई। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी करीब 50 सेकेंड तक डोर हिलाता रहा। इसके बाद डोर निकली तो गर्वनर ने तिरंगा फहराया। हांसी में खट्टर के भाषण में नेता फोन में लगे रहे हरियाणा में नए बनाए गए 23वें जिले हांसी में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर तिरंगा फहराया। उनके भाषण के दौरान मंच पर ही मौजूद हांसी से भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक सैनी और अन्य नेता मोबाइल चलाते नजर आए। यह फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा। हांसी में झांकी निकाल रहा ट्रैक्टर फंसा हांसी में ही केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रोग्राम के दौरान झांकी ले जा रहा ट्रैक्टर ट्रॉली मेन मंच के सामने ही धंस गई। ट्रैक्टर के पीछे 2 ट्रॉलियां जुड़ी हुई थीं। काफी मशक्कत के बाद भी पीछे वाली ट्रॉली का पहिया बाहर नहीं निकला। इसके बाद ट्रॉली को छोड़कर ट्रैक्टर आगे बढ़ा। पंचकूला में बच्चों से भरी पिकअप पलटी पंचकूला में गणतंत्र दिवस का प्रोग्राम देखने जा रही बच्चों से भरी पिकअप गाड़ी पलट गई। हादसे में 2 बच्चों के सिर में चोटें आई हैं, जिन्हें पंचकूला सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। पिकअप में 15 बच्चे सवार थे। गाड़ी की सॉफ्ट टूट गई। यही हादसे का कारण माना जा रहा है। अब पढ़िए गुरुग्राम में CM नायब सैनी ने क्या भाषण दिया... अन्य जिलों में तिरंगा फहराने के कुछ PHOTOS... हरियाणा के कहां-किसने तिरंगा फहराया, पुलिस महकमे में किन्हें मिले मेडल, यहां जानिए...
Dainik Bhaskar हरियाणा की कल की 10 बड़ी खबरें:नूंह में मां के पैर काटे, हिसार में सड़क हादसे में 3 की मौत; फरीदाबाद पुलिस चौकी में नोट बरसाए
नमस्कार, गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर रेवाड़ी में प्रोग्राम से लौट रहे सरपंच प्रतिनिधि को सड़क पर गिराकर बेरहमी से लाठियां बरसाईं। दूसरी बड़ी खबर नूंह से रही, जहां प्रेमी के साथ लिव-इन में रह रही मां पर नाबालिग बेटे ने हमला कर दिया। उसने चाकू से मां के हाथ और पैर काट दिए। वहीं, हिसार में एक सड़क हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई। हिसार की ही एक फैक्ट्री में आग जलाकर सोए 5 लोगों का दम घुट गया, जिनमें से 3 की मौत हो गई और 2 की हालत गंभीर है जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। अब सिलसिलेवार ढंग से 10 बड़ी खबरें पढ़ें... रेवाड़ी में सरपंच प्रतिनिधि पर लाठियां बरसाईं, 15-20 युवकों ने हमला किया हरियाणा के रेवाड़ी में 15-20 युवकों के एक ग्रुप ने सरपंच प्रतिनिधि पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। घटना में युवक को कई गंभीर चोटें आई हैं। एक बदमाश ने लठ मारकर उसकी गाड़ी के शीशे भी तोड़ दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बदमाशों ने सरपंच प्रतिनिधि सुरेंद्र पहलवान की गाड़ी में टक्कर मारी। जब वह नीचे उतरा तो एक बदमाश ने उसके ऊपर 3 राउंड फायर किए। (पूरी खबर पढ़ें) हिसार में कार पेड़ से टकराई, एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हरियाणा के हिसार जिले में बनभौरी मार्ग पर रविवार देर रात भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस वक्त हुआ जब सगाई समारोह से लौट रही एक ब्रेजा गाड़ी पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई और फिर बेकाबू होकर पेड़ से जा भिड़ी। (पूरी खबर पढ़ें) सोनीपत में युवक पर फायरिंग, 3 साल पहले हुए मर्डर की रंजिश में वारदात सोनीपत जिले के गैंगस्टर काला जठेड़ी के गांव में पुरानी रंजिश के चलते दिनदहाड़े सनसनीखेज वारदात सामने आई है। जहां बदमाशों ने खेतों की ओर जा रहे एक युवक पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। गोली लगने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पहले सरकारी अस्पताल और फिर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसकी नाजुक हालत को देखते हुए रेफर कर दिया गया। (पूरी खबर पढ़ें) महेंद्रगढ़ में गिरफ्तारी के डर से युवक ने VIDEO बनाकर सुसाइड किया हरियाणा के महेंद्रगढ़ में एक युवक ने गिरफ्तारी के डर से सुसाइड कर लिया। युवक ने सुसाइड करने से पहले एक वीडियो और सुसाइड नोट भी छोड़ा है। इसमें युवक 6 प्रॉपर्टी डीलरों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है। (पूरी खबर पढ़ें) फरीदाबाद की पुलिस चौकी में युवक ने ₹500 के नोट उड़ाए, कार इंपाउंड की थी हरियाणा के फरीदाबाद में एक युवक ने पुलिस चौकी में घुसकर 500-500 रुपए के कई नोट उड़ा दिए। उसके साथियों ने काफी देर तक पुलिस के सामने ही हाई वोल्टेज ड्रामा किया। इस दौरान चौकी में तैनात पुलिसकर्मी युवक को समझाने का प्रयास करते रहे। (पूरी खबर पढ़ें) सोनीपत पुलिस ने हत्या के आरोपी का एनकाउंटर किया, पैर में लगी गोली हरियाणा के सोनीपत में सोमवार सुबह पुलिस की एंटी गैंगस्टर यूनिट और बदमाश के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की गोली लगने से एक बदमाश घायल हो गया। घायल बदमाश को सोनीपत के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। बदमाश के पैर में गोली लगी है। (पूरी खबर पढ़ें) हिसार में फर्नीचर फैक्ट्री में दम घुटने से 3 की मौत, 2 की हालत गंभीर हरियाणा के हिसार में सोमवार को दम घुटने से 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 2 की हालत गंभीर है। हादसा ढंडूर गांव में स्थित एक फर्नीचर फैक्ट्री में हुआ। पांचों लोग लोहे की बाल्टी में आग लगाकर कमरा बंद कर सोए थे। साथी कर्मचारी कमरे में आया तो पांचों लोग बेसुध पड़े हुए थे। इसके बाद तुरंत पांचों को सिविल अस्पताल ले जाया गया। (पूरी खबर पढ़ें) कुरुक्षेत्र में मिला बुजुर्ग व्यक्ति का शव, सड़ी-गली मिली लाश कुरुक्षेत्र के पिहोवा में सरस्वती तीर्थ के पास खाली प्लॉट से एक व्यक्ति का सड़ा हुआ शव बरामद हुआ। शव 8-10 दिन पुराना था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसकी पहचान की कोशिश की। पहचान नहीं होने पर पुलिस ने शव को 72 घंटे के लिए मॉर्चरी में रखवा दिया। (पूरी खबर पढ़ें) नूंह में प्रेमी के साथ जाने पर मां के पैर काटे, एक साल पहले 5 बच्चों को छोड़ा हरियाणा के नूंह में एक नाबालिग ने अपनी मां के पैर काट दिए। लड़के ने मीट काटने वाले चाकू से मां पर हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। महिला का सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है।बताया जा रहा है कि महिला करीब एक साल पहले अपने 5 बच्चों और पति को छोड़कर एक लिव-इन पार्टनर के साथ रहने लगी थी। (पूरी खबर पढ़ें) पंचकूला में बच्चों से भरी पिकअप गाड़ी पलटी, गणतंत्र दिवस परेड देखने जा रहे थे पंचकूला में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम देखने जा रहे बच्चों की पिकअप गाड़ी पलट गई। हादसे के समय गाड़ी में करीब 15 बच्चें सवार बताए जा रहे हैं। जिनमें से 2 के चेहरे और सिर में चोटें आई हैं। जिन्हें पंचकूला सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती करवाया गया है। (पूरी खबर पढ़ें)
Dainik Bhaskar गोल्डन टेंपल में महिला की पिटाई का पुराना VIDEO वायरल:निहंग विक्की विवाद में कूदा; बिहार के इन्फ्लुएंसर और मुंबई के एडवोकेट को धमकाया
गोल्डन टेंपल में बिहार की महिला को थप्पड़ मारने के 2 साल पुराने वीडियो पर हंगामा मच गया है। सोशल मीडिया पर इसे वायरल किया गया तो आशुतोष झा नाम के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने महिला से इस व्यवहार की आलोचना की। निहंग विक्की थॉमस ने इसका विरोध किया। दोनों के बीच विवाद हुआ तो मुंबई के एडवोकेट आशुतोष ने इन्फ्लुएंसर झा का समर्थन कर दिया। इसके बाद निहंग विक्की थॉमस भड़क गया। विक्की ने दोनों को देख लेने की धमकी दे दी। विक्की ने कहा कि मैं दिल्ली आ रहा हूं। तुम लोगों को ढूंढ निकालूंगा। विक्की थॉमस ने कुछ दिन पहले गोल्डन टेंपल सरोवर में कुल्ला करने वाले मुस्लिम युवक सुब्हान रंगरीज को भी गाजियाबाद से पकड़ा। जहां निहंगों ने युवक को थप्पड़ मारे। इसके बाद उससे माफी मंगवाकर गाजियाबाद पुलिस के हवाले कर दिया। सबसे पहले जानिए, वायरल वीडियो में क्या दिख रहा गुरुद्वारे में कुछ लोग महिला को एक तरफ बैठा लेते हैं। फिर उसको पीटना शुरू कर देते हैं। महिला के बच्चे भी साथ मौजूद होते हैं। महिला कहती है कि मुझे क्यों पीटा जा रहा है। मैंने क्या किया है। मैंने कोई चोरी नहीं की है। मैंने कोई सामान भी नहीं उठाया है। इस पर मारपीट करने वाले कहते हैं कि तुम बीड़ी पी रही थी। महिला ने कहा कि मैंने बीड़ी नहीं पी। उसकी जेब में तंबाकू जरूर था लेकिन उसने इसका भी इस्तेमाल नहीं किया। इस पर मारपीट करने वाले कहते हैं कि तुम लोगों को मर्यादा पता नहीं है क्या। गुरुघर में तंबाकू लेकर आना मना है। महिला को थप्पड़ मारने का विवाद कैसे बढ़ा आशुतोष झा के यूट्यूब पर 4.5 लाख फॉलोअर्स आशुतोष झा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। अपने यूट्यूब चैनल आशुतोष झा थॉट्स पर वीडियो अपलोड करते हैं। इसने 4.5 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। ज्यादातर धार्मिक,राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर राय साझा करते हैं। मूल रूप से बिहार के रहने वाले आशुतोष वर्तमान में दिल्ली में रह रहे हैं। हाल ही में अमृतसर के दरबार साहिब में एक महिला को थप्पड़ मारने की घटना की आलोचना करने के कारण निहंग विक्की थॉमस से धमकी मिली। इसके बाद से दोनों में सोशल मीडिया पर जंग छिड़ी है। निहंग विक्की थॉमस ने दोनों आशुतोष को क्या कहा एडवोकेट ने विक्की थॉमस के खिलाफ क्या किया
Dainik Bhaskar पंजाब कांग्रेस में उलझा चन्नी का मसला:राजा वड़िंग मजबूत हुए, राहुल गांधी की वॉर्निंग से नेता खामोश, CM कुर्सी दूर, अब टिकट कटने का डर
पंजाब कांग्रेस में दलित Vs जट्ट सिख शुरू होते ही राहुल गांधी ने सारे नेता दिल्ली तलब कर लिए। 22 जनवरी को मीटिंग के बाद 4 दिन बीत गए लेकिन सभी नेता खामोश हो गए हैं। मीडिया से बात करना तो दूर, नेताओं ने सोशल मीडिया पर कुछ लिखने-बोलने से दूरी बना ली है। नेताओं को डर है कि कहीं CM कुर्सी की दावेदारी और नेतागिरी दिखाने के चक्कर में उनकी टिकट ही न छिन जाए। वहीं राहुल गांधी की मीटिंग के बाद जिस तरह से पूर्व CM चरणजीत चन्नी के बयान पर एतराज हुआ, उससे पंजाब कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग की स्थिति पार्टी में मजबूत होती दिख रही है। यह इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि राहुल गांधी की मीटिंग के बाद महासचिव केसी वेणुगोपाल ने साफ कर दिया कि पंजाब में लीडरशिप चेंज नहीं होगी। उलटा अगर किसी ने इन सब बातों पर मीडिया या सोशल मीडिया पर कुछ कहा तो पार्टी अनुशासनहीनता मानकर सख्त कार्रवाई करेगी। हालांकि इसके बावजूद पंजाब कांग्रेस के भीतर सब कुछ ऑल इज वेल नहीं लग रहा है। कांग्रेस में अचानक खलबली क्यों मची थी चंडीगढ़ में कांग्रेस SC सैल की मीटिंग में पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने अपनी ही पार्टी को घेरा। चन्नी ने कहा कि पार्टी में सभी बड़े पदों पर अपर कास्ट (जट्ट सिख) के नेता हैं। दलित कहां जाएं। पद कोई देते नहीं और चुनाव में सारा काम करवाने की उम्मीद करते हो। यूं तो यह बंद हॉल में हुआ लेकिन बातें मीडिया में लीक हो गईं। इसके बाद चन्नी का वह वीडियो भी आ गया, जिसमें वह आक्रामक तरीके से अपनी ही पार्टी को घेरते हुए नजर आए। जिससे विरोधियों को भी मुद्दा मिल गया कि कांग्रेस में दलितों को उचित जगह नहीं मिल रही। इस बयान से चन्नी की पॉलिटिक्स पर क्या असर पड़ा पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री के दावेदारों में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की पोजिशन सबसे स्ट्रॉन्ग मानी जा रही थी। हालात यह थे कि राजा वड़िंग को यह कहना पड़ा था कि कांग्रेस में जो खुद को सीएम कैंडिडेट बताता है वो बनता नहीं है। चन्नी के पक्ष में सब कुछ ठीक चल रहा था। मगर, चन्नी के बयान ने सारे समीकरण बदल दिए। उन्हें दिल्ली बैठक में कड़ी फटकार सुननी पड़ी। पार्टी ने यहां तक कह दिया कि इस तरह के बयान से पार्टी की एकजुटता और चुनावी रणनीति को नुकसान पहुंच सकता है। हाईकमान के सख्त रवैये से चन्नी की सीएम पद की दावेदारी कमजोर होती नजर आ रही है। पंजाब प्रभारी को पहले ही खटक रहा था चन्नी का रवैया राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस ने पंजाब में मनरेगा स्कीम का नाम बदलने और उसमें किए गए बदलाव को लेकर विरोध शुरू किया। इसे मनरेगा महासंग्राम रैली का नाम दिया गया। कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल इन कार्यक्रमों में शामिल रहे। इस दौरान प्रधान राजा वड़िंग, विधायक दल नेता प्रताप सिंह बाजवा और सांसद सुखजिंदर रंधावा तो रैली में आए लेकिन चन्नी नजर नहीं आए। वड़िंग और रंधावा ने तो खुले मंच से यहां तक कह दिया कि वह चीफ मिनिस्ट्री के कैंडिडेट नहीं हैं। मगर, चन्नी ने कुछ नहीं कहा। चन्नी की पार्टी प्रोग्राम से गैरहाजिरी प्रभारी बघेल को भी खटक रही थी। उन्होंने सारी रिपोर्ट हाईकमान को दे दी। तब तक हाईकमान इग्नोर करता रहा लेकिन जैसे ही अपर कास्ट का मुद्दा उठाया तो भरी मीटिंग में चन्नी को हद में रहने की नसीहत दे दी गई। टिकट कटने का डर, नेताओं की चुप्पी पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी के पीछे सबसे बड़ा कारण आगामी विधानसभा चुनाव और टिकट का सवाल माना जा रहा है। नेताओं को डर है कि अगर उन्होंने खुलकर किसी गुट का समर्थन किया या हाईकमान के फैसलों पर सवाल उठाए, तो उनकी टिकट पर संकट आ सकता है। इसी वजह से टकसाली नेता भी “हाईकमान का ऑर्डर है” कहकर बात को टाल रहे हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में इस समय हर नेता खुद को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। पूर्व मंत्री बोले- गुटबाजी जैसे शब्दों से कार्यकर्ता भ्रम में आते हैं लुधियाना से पूर्व कांग्रेसी राकेश पांडे का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी नहीं है। सभी नेता अपने अपने स्तर पर पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। कांग्रेस में गुटबाजी की बात कहकर कार्यकर्ता भ्रम में आते हैं। कांग्रेस में गुटबाजी का जानबूझकर शोर मचाया जाता है ताकि कार्यकर्ताओं को भ्रम में डाला जा सके लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता इस तरह के भ्रम में नहीं फंसते।
Dainik Bhaskar खबर हटके- दहेज में टॉयलेट पॉट लाने की परंपरा:कपल्स के लिए बना सुसाइड पॉड, एक साथ मर भी सकेंगे; नींद में लाखों की खरीददारी
चीन के कई इलाकों में दुल्हन को दहेज में टॉयलेट पॉट लाने की परंपरा है। वहीं वैज्ञानिक ने कपल्स के लिए एक खास सुसाइड पॉड तैयार किया है। इसमें कपल्स एक साथ इच्छामृत्यु ले सकेंगे। उधर एक महिला ने गहरी नींद में ही लाखों रुपए की शॉपिंग कर ली। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… ************* रिसर्च सहयोग: किशन कुमार खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
Dainik Bhaskar तेलंगाना के गांव में 200 आवारा कुत्तों की हत्या:पंचायत सचिव पर जहरीले इंजेक्शन से मरवाने का आरोप; एक महीने में 1100 कुत्तों की मौत
तेलंगाना के हनमकोंडा जिले के पथीपाका गांव में 200 आवारा कुत्तों की जहरीला इंजेक्शन देकर हत्या कर दी गई। एनिमल वेल्फेयर ऐक्टिविस्ट के दावे के मुताबिक गांव के सरपंच ने दिसंबर में हुए चुनाव में जनता से कुत्तों से छुटकारा दिलाने का वादा किया था। करीब एक महीने पहले गांव में जहरीले इंजेक्शन देकर कुत्तों को मारा गया। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत सचिव के आदेश पर हुई। शवों को गांव के कब्रिस्तान में दफना दिया गया। इससे पहले, हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में 6 जनवरी से 9 जनवरी के बीच लगभग 300 आवारा कुत्तों की हत्या का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस संबंध में दो महिला सरपंचों और उनके पतियों सहित नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इसी एफआईआर में पथीपाका गांव का मामला भी जोड़ा है। तेंगाना के तीन जिलों में दिसंबर 2025 से अब तक 1100 कुत्तों की हत्या हो चुकी है। 22 जनवरी- जगतियाल में 300 कुत्तों की हत्या हुई 22 जनवरी को जगतियाल जिले के पेगाडापल्ली गांव में करीब 300 कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन देने हत्या का मामला सामने आया था। इस मामले में सरपंच और पंचायत सचिव के खिलाफ बीएनएस और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया। पूरी खबर पढ़ें… 19 जनवरी: याचरम में 100 कुत्तों की हत्या का आरोप इससे पहले 19 जनवरी को याचरम गांव में 100 कुत्तों को मारे जाने के आरोप में सरपंच, सचिव और एक वार्ड सदस्य के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने बताया था कि दफनाने की जगह से लगभग 70 से 80 कुत्तों के शव निकाले गए। ऐसा लग रहा था कि शवों को तीन से चार दिन पहले दफनाया गया था। 14 जनवरी: कामारेड्डी में 200 कुत्तों की हत्या 14 जनवरी को कामारेड्डी जिले के 5 गावों- भवानीपेट, पालवंचा, फरीदपेट, वाड़ी और बंदारामेश्वरपल्ली गांवों में करीब 200-300 आवारा कुत्तों को मारने का आरोप था। पुलिस ने पांच सरपंचों सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। पूरी खबर पढें… चुनाव में कुत्तों-बंदरों से छुटकारा दिलाने का वादा किया था तेलंगाना के गांवों में ग्राम पंचायत चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर आवारा कुत्तों को मारने के मामले सामने आए हैं। गांवों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में ग्राम पंचायत चुनाव हुए थे। इस दौरान कुछ उम्मीदवारों ने आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या से निपटने का वादा किया था। आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद वही वादे कुत्तों को मारकर पूरे किए जा रहे हैं। सरपंचों ने कुत्तों को जहर देने के लिए व्यक्ति को नियुक्त किया था पुलिस के अनुसार, सरपंचों पर आरोप है कि उन्होंने कुत्तों को मारने के लिए जहरीले इंजेक्शन का इस्तेमाल किया। सरपंचों ने किसी व्यक्ति को जहरीले इंजेक्शन लगाने के लिए नियुक्त किया था। कुत्तों की हत्या के बाद उनके शव गांवों के बाहर दफनाए गए थे। ----------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला-कुत्ते के काटने पर भारी मुआवजा तय होगा:जो आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित, वे अपने घर ले जाएं; उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकते सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा, 'बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया।' पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar पश्चिम बंगाल में दो गोदामों में आग, 8 की मौत:कई मजदूर लापता, सात घंटे में 12 दमकल गाड़ियों ने आग बुझाई
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में सोमवार सुबह दो गोदामों में आग लगने से 8 लोगों की मौत हो गई। सात घंटे की कोशिश के बाद आग पर काबू पाया गया। पुलिस ने बताया कि सुबह करीब 3 बजे आग की सूचना मिली थी। आग बुझाने के लिए कुल 12 दमकल गाड़ियां और कर्मचारी लगाए गए। करीब 10 बजे आग पर काबू में किया गया। शाम करीब 5 बजे तीन जले हुए शव बरामद किए गए। इसके बाद चार और शव मिले। बारुईपुर पुलिस जिले के एसपी शुभेंदु कुमार ने कहा कि शव पूरी तरह जल गए है, इसलिए मृतकों की पहचान नहीं हो पाई। मलबा हटने के बाद पचा चल सकेगा कि आग में और लोग फंसे है या नहीं। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। मजदूरों के परिजनों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 10 से ज्यादा हो सकती है। दोनों गोदामों में एक डेकोरेटिंग फर्म और एक मोमो चेन का है। आग के बाद की तो तस्वीरें… दमकल मंत्री बोले- रेस्क्यू जारी, लाइटें लगाईं दमकल मंत्री सुजीत बोस ने कहा कि बचाव कार्य जारी है। गोदामों के अंदर आग की कुछ लपटें अभी भी हैं। मौके पर हाई मास्ट लाइटें लगाई गई हैं ताकि रात में भी काम जारी रहे। फायर सेफ्टी नियमों पर सवाल पूछे जाने पर सुजीत बोस ने कहा कि साल में दो बार फायर ऑडिट किया जाता है और खामियों को दूर किया जाता है। नियमों का पालन सुनिश्चित करना यूनिट मालिकों और कंपनी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। परिजन बोले- रात 1 बजे आखिरी कॉल आया था सोमवार शाम होते-होते कई मृतकों और लापता लोगों के रिश्तेदार मौके पर पहुंच गए। वे पुलिस और दमकल अधिकारियों से लगातार जानकारी लेते दिखे। पुरबा मेदिनीपुर के तामलुक के तन्मय गिरी ने कहा कि उनके चाचा गोदाम के अंदर बने कमरों में रहते थे और डेकोरेटिंग फर्म में काम करते थे। उन्होंने बताया कि रात करीब 1 बजे उनका आखिरी कॉल आया था। उसके बाद से फोन बंद है। मैं सुबह 9 बजे से इंतजार कर रहा हूं। एक दूसरे युवक ने बताया कि उनके पिता मोमो यूनिट में नाइट शिफ्ट के लिए गए थे और तब से संपर्क नहीं हो पा रहा। पुलिस ने कहा कि मृतक और लापता लोग पुरबा मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों के रहने वाले हैं। सुवेंदु अधिकारी बोले- मंत्री और अधिकारी छुट्टी मना रहे थे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी आग की घटना में राज्य सरकार ने असंवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन में तालमेल की कमी दिखाई। मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी गणतंत्र दिवस की छुट्टी मना रहे थे। 30 अप्रैल 2025- होटल में आग लगने से 14 की मौत हुई थी पिछले साल 30 अप्रैल को मध्य कोलकाता के एक होटल में आग लगने से 14 लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में 2 महिलाएं और 1 बच्चा था। इस हादसे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन मॉनिटर किया। मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए के मुआवजे का ऐलान किया था। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar भाजपा बोली- राहुल ने नॉर्थ-ईस्ट का पटका नहीं पहना:कांग्रेस का जवाब- राजनाथ ने भी नहीं पहना; दावा- राहुल ने राष्ट्रपति का प्रोटोकॉल तोड़ा
गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ‘एट होम’ रिसेप्शन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के कहने के बावजूद राहुल गांधी ने नॉर्थ-ईस्ट का पटका नहीं पहना। भाजपा के मुताबिक रिसेप्शन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेशी मेहमानों समेत सभी ने पटका पहना था। राहुल गांधी अकेले ऐसे नेता रहे, जिन्होंने पटका पहनने से इनकार किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी से बिना शर्त माफी की मांग की है। उन्होंने X पोस्ट पर राहुल गांधी की फोटो शेयर करते हुए लिखा कि इसी तरह के व्यवहार के कारण ही उनकी पार्टी इस क्षेत्र और देश के बड़े हिस्से का भरोसा खो चुकी है। इसके बावजूद ऐसी असंवेदनशीलता बार-बार सामने आती रही है। कांग्रेस का जवाब- राजनाथ सिंह ने भी पटका नहीं पहना भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया। सरमा के पोस्ट के जवाब में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने लिखा कि क्या आप राजनाथ सिंह से भी माफी की मांग करेंगे। या सत्ता विरोधी माहौल से निपटने की आपकी पूरी रणनीति ऐसे गैर-मुद्दों को उठाने तक ही सीमित कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि अगर पटका न पहनना अपमान है, तो राजनाथ सिंह ने क्यों नहीं पहना? राष्ट्रपति को सस्ती राजनीति में घसीटना बंद किया जाए। राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का दावा न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी राष्ट्रपति के ‘एट होम’ रिसेप्शन में थोड़ी देर के लिए पहुंचे थे। वे मंत्रियों की लाइन में खड़े होने के बजाय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठ गए। सूत्रों का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी कार्यक्रम से राष्ट्रपति के जाने से पहले ही निकल गए। इसे तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया गया, क्योंकि नियमों के मुताबिक मेहमान राष्ट्रपति के जाने के बाद ही कार्यक्रम छोड़ते हैं। सूत्रों ने दावा किया कि कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अभिवादन नहीं किया। कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। गणतंत्र दिवस पर राहुल-खड़गे तीसरी लाइन में बैठे दिखे इससे पहले गणतंत्र दिवस परेड में राहुल गांधी को केंद्रीय मंत्रियों शिवराज सिंह चौहान और अश्विनी वैष्णव के पीछे तीसरी लाइन में बैठाया गया था। कांग्रेस ने इसे नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के खिलाफ बताया। कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष के नेताओं को पीछे बैठाना प्रोटोकॉल और परंपरा के खिलाफ है। पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कर सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेता आगे बैठते हैं, तो विपक्ष को पीछे क्यों रखा गया। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar घर में घुसकर लिवइन पार्टनर के भाई की हत्या:इंदौर में आरोपी ने परिजनों को धमकाया, चाकू मारे; खुद को भी किया घायल
इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र स्थित 60 फीट रोड पर सोमवार को लिव-इन संबंध को लेकर विवाद में युवक ने युवती के घर में घुसकर चाकू से हमला कर दिया। हमले में युवती के भाई की मौत हो गई, जबकि युवती और उसकी मां घायल हो गईं। पुलिस के अनुसार आरोपी युवक वेदांत सोलंकी, युवती विधि लखावत के साथ लिव-इन में रहता था। विवाद के दौरान आरोपी ने घर में घुसकर विधि, उसकी मां अनीता और भाई वेदांश पर चाकू से वार किए। हमले में गंभीर रूप से घायल वेदांश की अरबिंदो अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी ने खुद को भी चाकू मार लिया। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही टीआई तरुण भाटी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
Dainik Bhaskar गुजरात में पड़ोसियों ने व्यक्ति को जिंदा जलाया, VIDEO:घर के बाहर बैठने को लेकर विवाद, डीजल डालकर आग लगाई; 3 गिरफ्तार
गुजरात में कच्छ के गांधीधाम में एक व्यक्ति को पड़ोसियों ने डीजल डालकर जिंदा जला दिया। गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। दोनों पक्षों के बीच घर के बाहर बैठने को लेकर विवाद हुआ था। गांधीधाम पुलिस ने मामले में दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि 25 जनवरी को रोटरी नगर इलाके में पड़ोसियों के बीच घर के बाहर बैठने को लेकर कहासुनी हुई थी। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने 50 साल के करसनभाई को पकड़कर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद जब करसनभाई अपने घर के बाथरूम में गए तो आरोपी उनके पीछे पहुंच गए। वहां उन पर डीजल डालकर आग लगा दी गई, जिससे उनका पूरा शरीर बुरी तरह झुलस गया। घटना के बाद परिजनों ने उन्हें तुरंत भुज के जीके जनरल अस्पताल में भर्ती कराया। रात में पुलिस की मौजूदगी में करसनभाई की मौत के पहले बयान दर्ज किया गया। इलाज के दौरान सोमवार सुबह उनकी मौत हो गई। घटना से जुड़ी 3 तस्वीरें... 3 आरोपी गिरफ्तार, एक फरार घटना के बाद गांधीधाम बी डिवीजन पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस इंस्पेक्टर एसवी गोजिया की टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में 30 साल की प्रेमिलाबेन नरेशभाई मातंग, 36 साल की अंजूबेन उर्फ अजीबेन हरेशभाई मातंग और 47 साल के चिमनाराम गोमाराम मारवाड़ी हैं। मामले में एक अन्य महिला आरोपी मंजुबेन लाहिड़ीभाई माहेश्वरी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें... गुजरात के अरावली में एंबुलेंस में आग, 4 जिंदा जले, एक दिन के नवजात के इलाज के लिए जा रहा था पिता; डॉक्टर-नर्स की भी मौत गुजरात के अरावली जिले में चलती एंबुलेंस में आग लग गई। इस हादसे में एक डॉक्टर, नर्स, एक नवजात शिशु और उसके पिता की मौत हो गई। हालांकि एंबुलेंस ड्राइवर और एक रिश्तेदार को बचा लिया गया। हादसा मोडासा की रणसैय्यद चोकड़ी के पास हुआ। एंबुलेंस अहमदाबाद के ऑरेंज अस्पताल की थी। पूरी खबर पढ़ें...
Dainik Bhaskar गणतंत्र दिवस पर राहुल-खड़गे तीसरी लाइन में बैठे दिखे:कांग्रेस का मोदी-शाह पर अपमान करने का आरोप; पहली लाइन में बैठे आडवाणी की पुरानी फोटो दिखाई
77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ में हुई परेड के दौरान विपक्षी नेताओं की बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हो गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को तीसरी पंक्ति में बैठाकर अपमान किया गया। कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष के नेताओं को पीछे बैठाना प्रोटोकॉल और परंपरा के खिलाफ है। पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कर सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेता आगे बैठते हैं, तो विपक्ष को पीछे क्यों रखा गया। कार्यक्रम की शुरुआत में खड़गे, राहुल गांधी के साथ तीसरी लाइन में बैठे दिखे। बाद में खड़गे को आगे की लाइन में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पास बैठाया गया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार यह बदलाव बताता है कि शुरुआत में बैठने की व्यवस्था गलत थी। लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मणिकम टैगोर ने 2014 की फोटो शेयर कर बताया कि उस समय लालकृष्ण आडवाणी, कई केंद्रीय मंत्री व सोनिया गांधी के साथ आगे बैठे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले विपक्षी नेताओं को आगे बैठाया जाता था तो अब प्रोटोकॉल की बात क्यों हो रही है और आरोप लगाया कि मोदी-शाह जानबूझकर खड़गे व राहुल का अपमान कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया BJP बोली- राहुल जरूरी कार्यक्रमों में क्यों नहीं आते? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस एक बार फिर परिवार, पद और अहंकार को देश और जनता से ऊपर रख रही है। BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि बैठने की व्यवस्था टेबल ऑफ प्रिसिडेंस यानी तय सरकारी नियमों के अनुसार होती है। शहजाद पूनावाला ने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गांधी कई अहम कार्यक्रमों में शामिल क्यों नहीं होते। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी उपराष्ट्रपति और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के शपथ ग्रहण समारोह में कहां थे और स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में क्यों नहीं दिखे। उनका कहना था कि राहुल गांधी के आसपास और पीछे कई वरिष्ठ मंत्री भी बैठे थे, लेकिन किसी ने इसे मुद्दा नहीं बनाया। यह पहली बार नहीं है जब गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में राहुल गांधी की बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी इसी तरह के मुद्दे सामने आ चुके हैं। ------------------------------------------- गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड, 29 लड़ाकू विमानों ने सिंदूर, वज्रांग, अर्जन फॉर्मेशन बनाए; 90 मिनट की परेड में वंदे मातरम समेत 30 झाकियां गणतंत्र दिवस परेड की 50 PHOTOS, पहली बार 2 कूबड़ वाले ऊंट और बाज दिखे, महिला जवान चलती बाइक पर 18 फीट ऊंची सीढ़ी चढ़ी 77वें गणतंत्र दिवस पर 8 बदलाव, पहली बार 2 चीफ गेस्ट, महिला कमांडेंट के नेतृत्व में पुरुष रेजिमेंट, सेना के युद्ध का लाइव डिस्प्ले गणतंत्र दिवस पर PM मोदी ने बंधेज पगड़ी पहनी, इस पर मोर पंख पैटर्न; कुर्ता-जैकेट के रंग नेवी और एयरफोर्स यूनिफॉर्म जैसे
Dainik Bhaskar कल सरकारी बैंकों में हड़ताल:कैश ट्रांजैक्शन और चेक क्लियरेंस जैसे काम नहीं होंगे, लगातार चौथे दिन बैंक बंद रहेंगे
देश में कल सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। PTI के मुताबिक, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियन कर्मचारियों के लिए 5-डे वर्किंग की मांग कर रहा है। हड़ताल की वजह से बैंकों में कैश ट्रांजैक्शन और चेक क्लियरेंस जैसे काम नहीं होंगे। महीने के चौथे शनिवार( 23 जनवरी), रविवार (25 जनवरी) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की छुट्टी के बाद, यह लगातार चौथा दिन होगा जब सरकारी बैंकों का कामकाज प्रभावित होगा। हालांकि प्राइवेट बैंकों में काम सामान्य रूप से चलता रहेगा। प्राइवेट बैंक UFBU का हिस्सा नहीं हैं। हड़ताल क्यों कर रहे हैं कर्मचारी? बैंक यूनियनों और सरकार के बीच विवाद की मुख्य जड़ शनिवार की छुट्टी है।बैंक कर्मचारी काफी समय से '5-डे वर्क वीक' (हफ्ते में केवल 5 दिन काम) को लागू करने की मांग कर रहे हैं। मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनियनों के बीच 12वें द्विपक्षीय समझौते के दौरान सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने पर सहमति बनी थी। लेकिन समझौते के बावजूद अभी तक इसका सरकारी नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। 5-डे वर्किंग के लिए यूनियनों का तर्क है कि हम एक संतुलित कार्यप्रणाली मांग रहे हैं। हम इसके बदले हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को तैयार हैं। वर्तमान में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को ही बैंक बंद रहते हैं। यूनियन चाहती है कि सरकार अब इसकी आधिकारिक अधिसूचना तुरंत जारी करे। हड़ताल का आम आदमी पर क्या असर होगा कौन-कौन सी सर्विसेज चालू रहेंगी?
Dainik Bhaskar वंदेमातरम गायन के दौरान खड़े रहना अनिवार्य हो सकता है:सरकार प्रोटोकॉल लागू करने पर विचार कर रही, फैसला बाकी
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के लिए भी उसी तरह खड़े होना अनिवार्य हो सकता है, जैसे अभी राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समय होता है। सरकार ने वंदे मातरम की रचना के 150 साल पूरे होने के मौके पर राष्ट्रीय गीत के लिए भी प्रोटोकॉल लागू करने पर विचार कर रही है। वंदे मातरम को 1950 में राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, गृह मंत्रालय इस बात पर चर्चा कर रहा है कि क्या ‘वंदे मातरम्’ पर भी वही नियम और कायदे लागू किए जाएं, जो राष्ट्रीय गान पर लागू होते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ‘वंदे मातरम्’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका अर्थ है-“हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं।” यह रचना राष्ट्रवाद, देशभक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान के भावों को एक साथ लाती है। यह एक भजन के रूप में लिखा गया था। यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंद मठ’ का हिस्सा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था। वंदे मातरम् के लिए प्रोटोकॉल अभी द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 केवल राष्ट्रीय गान पर लागू होता है। संविधान के आर्टिकल 51(ए) में भी नागरिकों से राष्ट्रीय गान का सम्मान करने की जिम्मेदारी तय की गई है। हालांकि, ‘वंदे मातरम’ के लिए लोगों के खड़े होने या इसके गायन में भाग लेने को अनिवार्य बनाने जैसी कोई कानूनी व्यवस्था फिलहाल मौजूद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स में याचिकाएं दायर कर मांग की गई है कि ‘वंदे मातरम्’ पर भी राष्ट्रगान के नियम लागू किए जाएं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियम केवल ‘जन गण मन’ पर लागू होते हैं, न कि ‘वंदे मातरम्’ पर। गृह मंत्रालय के निर्देशों में राष्ट्रीय गान की अवधि और उसके गायन के दौरान किए जाने वाले आचरण का स्पष्ट उल्लेख है। इसमें सभी के लिए खड़ा होना और गायन में भाग लेना अनिवार्य बताया गया है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, जो कोई राष्ट्रीय गान का अपमान करता है या दूसरों को उसका सम्मान करने से रोकता है, उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है। अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या इसी तरह के प्रावधान ‘वंदे मातरम्’ पर भी लागू किए जा सकते हैं। वंदे मातरम पर विवाद पिछले साल वंदे मातरम’ पर तब विवाद पैदा हो गया जब कुछ मुस्लिम संगठनों ने राष्ट्रीय गीत के पाठ का विरोध किया था। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मूल छह अंतरों वाले गीत को एक अंतरे का करने का आरोप लगाया था। वर्तमान में राष्ट्रीय गीत के रूप में मूल भजन के छह अंतरों में से केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाते हैं। हटाए गए हिस्सों में दुर्गा सहित तीन हिंदू देवियों का उल्लेख है। भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू के लिखे गए पत्र भी शेयर किए थे, जिनमें उन्होंने संकेत दिया था कि गीत की पृष्ठभूमि मुसलमानों को असहज कर सकती है। इस मुद्दे पर हुई बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जोर दिया था कि राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए। वहीं, कांग्रेस ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय गीत पर यह जोर पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर दिया जा रहा है। ----------- ये खबर भी पढ़ें: नेहरू क्यों नहीं चाहते थे 'वंदे मातरम्' राष्ट्रगान बने:गांधी ने अल्लाहू अकबर से तुलना की; क्या इसमें मुसलमानों को मारने का आह्वान भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् पर आज लोकसभा में 10 घंटे की बहस हो रही है। शुरुआत पीएम मोदी के भाषण से हुई। पिछले महीने मोदी ने कहा था कि 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए थे, इसी ने भारत-पाक विभाजन के बीज बोए। पढ़ें पूरी खबर…
Dainik Bhaskar अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी:निहंगों का गतका, चलती बाइक पर बैठा जवान, देशभक्ति के गाने गूंज रहे; इस बार न गेट खुलेंगे न मिठाई बंटेगी
गणतंत्र दिवस के मौके पर अमृतसर स्थित अटारी बॉर्डर में रिट्रीट सेरेमनी हो रही है। अटारी बॉर्डर पर माहौल पूरी तरह देशभक्ति के रंग में डूबा हुआ है। भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से पूरा इलाका गूंज रहा है। सैनिक बाइक पर पिरामिड बनाकर, अलग-अलग स्टंट करके लोगों का दिल जीत रहे हैं। वहीं, कई युवक-युवतियां ढोल पर भांगड़ा करते दिखे। युवतियों के डांस ने तो लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। जिसके बाद जमकर हूटिंग भी की गई। उधर, बीएसएफ के जवान पूरे जोश और अनुशासन के साथ परेड कर रहे हैं। इससे पहले निहंगों ने भी यहां करतब दिखाए। दर्शक दीर्घा में भारी संख्या में दर्शक तिरंगा लिए मौजूद हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग जोश और उत्साह के साथ कार्यक्रम देख रहे हैं। सूर्यास्त के साथ राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक उतारे जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद रिट्रीट सेरेमनी का समापन होगा। रिट्रीट सेरेमनी के PHOTOS... रिट्रीट सेरेमनी के पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए...
Dainik Bhaskar बटुकों की पिटाई से नाराज PCS अफसर का इस्तीफा:बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट, कहा- ब्राह्मणों के हित की बात करने वाला कोई नहीं
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से पिटाई से नाराज बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 5 पेज के लेटर में लिखा है कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़ी गई। इससे आहत होकर उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने लिखा- ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है। ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ काम कर रही है। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ब्राह्मणों की बात करने वाला कोई नहीं है। अलंकार अग्निहोत्री ने दैनिक भास्कर से इस्तीफा देने की पुष्टि की। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले अलंकार अग्निहोत्री 2019 में PCS अफसर बने थे। उनकी 15वीं रैंक आई थी। IIT-BHU से बीटेक करने के बाद उन्होंने 10 साल आईटी सेक्टर में काम किया, फिर PCS की तैयारी की और पहले प्रयास में ही एग्जाम क्वालिफाई किया था। अलंकार ऑफिस में भगवान बजरंगबली की तस्वीर लगाकर चर्चा में आए थे। इसका भीम आर्मी ने विरोध किया था। कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में हंगामा भी किया था। इस दौरान अफसर से नोकझोंक भी हुई थी। पोल में हिस्सा लेकर राय दे सकते हैं- अलंकार अग्निहोत्री से दैनिक भास्कर ने बात की, उन्होंने क्या कहा... सवाल: आपने अचानक इस्तीफा क्यों दिया? जवाब: कुछ समय से प्रदेश में जो स्थितियां बनी हैं, वे बद से बदतर होती जा रही हैं। एक खास वर्ग, विशेषकर ब्राह्मणों के खिलाफ अभियान चल रहा है, जो अब असहनीय हो गया है। कहीं किसी के घर पर बुलडोजर चला दिया जाता है, तो कहीं थाने में पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है। जेल में एक दिव्यांग व्यक्ति और एक अन्य ब्राह्मण की हत्या कर दी गई। सबसे दुखद घटना प्रयागराज माघ मेले की है। अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के शिष्यों की चोटी (शिखा) पकड़कर उनके साथ मारपीट की गई। ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिन्हें देखकर रूह कांप जाए। जब प्रशासन के लोग ही पूज्य संतों और उनके शिष्यों के साथ ऐसा व्यवहार करेंगे, तो समाज में क्या संदेश जाएगा? क्या यह ब्राह्मणों के नरसंहार की तैयारी है? सवाल: आप वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं? जवाब: बिल्कुल, एक तरफ तो असली शंकराचार्य के शिष्यों को पीटा जा रहा है, दूसरी तरफ प्रशासन के आला अधिकारी कुछ कथित संतों के साथ बैठकर रोटियां सेंक रहे हैं, फोटो खिंचवा रहे हैं। क्या प्रशासन अब चापलूसी का अड्डा बन गया है? जो हमारे आराध्य हैं, उनका अपमान हो रहा है। जो सत्ता के करीबी हैं, उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। यह दोहरा मापदंड क्यों? सवाल: UGC रेगुलेशन 2026 को लेकर आपकी क्या आपत्ति है? जवाब: यह रेगुलेशन (13 जनवरी 2026) अत्यंत भेदभावपूर्ण है। इसमें सामान्य वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं को 'स्वघोषित अपराधी' मान लिया गया है। समता समितियों के माध्यम से बच्चों का मानसिक और शारीरिक शोषण होने की पूरी आशंका है। कोई भी निराधार शिकायत करके किसी का भविष्य बर्बाद कर सकता है। क्या हम अपने बच्चों को ऐसी व्यवस्था में पढ़ने भेजेंगे, जहां न्याय के नाम पर शोषण हो? मैं उन जनप्रतिनिधियों से भी पूछना चाहता हूं, जो ब्राह्मण समाज के नाम पर वोट लेकर आज 'कॉर्पोरेट एम्प्लॉई' की तरह चुप बैठे हैं। क्या आप अपने आकाओं के आदेश का इंतजार कर रहे हैं? क्या आप तब बोलेंगे, जब स्थिति हाथ से निकल जाएगी? सवाल: भविष्य की स्थिति को आप कैसे देखते हैं? जवाब: आज न जनतंत्र बचा है, न गणतंत्र, यह केवल 'भ्रम तंत्र' है। सरकारें अल्पमत में हैं और केवल 'बांटो और राज करो' की नीति पर चल रही हैं। भाजपा अब भारतीय नहीं, 'विदेशी जनता पार्टी' जैसी हो गई है। मैंने अपना इस्तीफा राज्यपाल, जिलाधिकारी और चुनाव आयोग (ERO होने के नाते) को भेज दिया है। मैं भगवान बजरंगबली को साक्षी मानकर यह कदम उठा रहा हूं। अब समय आ गया है कि समाज और अधिकारी इस अन्याय के खिलाफ 'असहयोग आंदोलन' की तरह बॉयकाट करें। अगर हम आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। हालत सिविल बार जैसी हो गई है। अब पढ़िए इस्तीफे में अफसर ने क्या कुछ लिखा.. पहला पेज- बटुकों की पिटाई से नाराज होकर इस्तीफा दे रहा मैं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के शिष्यों के साथ प्रशासन द्वारा की गई मारपीट और भारत सरकार के नए कानून UGC 2026 से दुखी होकर सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मेरा नाम अलंकार अग्निहोत्री है। मैं 2019 बैच का पीसीएस अधिकारी हूं। अभी बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हूं। मैं यह भी बताना चाहता हूं कि मैंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के IIT-BHU से बीटेक किया है। इसके लिए मैं हमेशा महामना मदन मोहन मालवीय का आभारी रहूंगा। उन्होंने जिन आदर्शों पर BHU की स्थापना की, उन्हीं से प्रेरणा लेकर मैं आगे बढ़ा हूं। दूसरा पेज- सरकार ब्राह्मणों के खिलाफ काम कर रही इस साल प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य बटुक ब्राह्मणों के साथ प्रशासन ने मारपीट की। बुजुर्ग आचार्यों को भी पीटा गया, बटुक ब्राह्मणों को जमीन पर गिराकर उनकी चोटी पकड़कर घसीटा गया। यह उनकी इज्जत का अपमान है। चोटी और शिखा ब्राह्मणों और साधु-संतों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान होती है। मैं खुद भी ब्राह्मण हूं। इस घटना से साफ है कि प्रशासन ने ब्राह्मणों का अपमान किया है। यह बहुत गलत और गंभीर बात है। ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है। इससे ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ सोच के साथ काम कर रहे हैं। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। 13 जनवरी 2026 को यूजीसी ने एक नया नियम जारी किया। इसमें बड़े ही कूटनीतिक तरीके से सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी माना गया है। इससे सामान्य वर्ग के छात्र, जैसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, भूमिहार आदि, प्रभावित हो सकते हैं। यह छात्रों के प्रति विषमतापूर्ण गतिविधियों और षड्यंत्रों को जन्म देगी। तीसरा पेज- सरकार “डिवाइड एंड रूल” नीति पर चल रही गजट में बनी समता समिति के कुछ सदस्य फर्जी शिकायत के बहाने सामान्य वर्ग की छात्राओं का शारीरिक शोषण कर सकते हैं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। होनहार सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं से जलन के कारण उनके खिलाफ झूठी शिकायतें करके उनके भविष्य को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, इसकी भी आशंका है। ऐसी स्थिति से देश में अंदरूनी विवाद बढ़ सकता है। यह UGC रेगुलेशन 2026 ऐसा लगता है, जैसे हिंदू समाज को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर उन पर शासन करने की सोच के तहत लाया गया हो। सरकार अंग्रेजों की “डिवाइड एंड रूल” नीति पर चलती हुई दिखती है, इसलिए इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। इन दोनों गंभीर मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार में बैठे ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के दूसरे जनप्रतिनिधियों ने कोई विरोध नहीं किया है, जबकि उन्हें उनके समाज के लोगों ने ही चुना है। चौथा पेज- ब्राह्मण की बात करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा ऐसा लगता है कि वे अपने समाज के प्रति जिम्मेदार नहीं हैं। किसी कंपनी के कर्मचारी की तरह चुप बैठे हैं, जैसे किसी बड़े अफसर के आदेश का इंतजार कर रहे हों। इससे केंद्र और राज्य सरकार की स्थिति और भी भ्रम की हो गई है। ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के हितों की बात रखने वाला कोई प्रतिनिधि नजर नहीं आ रहा। इसलिए पूरा सामान्य वर्ग खुद को असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहा है। अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए अलग राजनीतिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि वर्ग के हितों की रक्षा हो सके और सरकारों में फैला भ्रम दूर किया जा सके। इन्हीं दोनों मुद्दों (UGC नियम और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई) से दुखी होकर मैं सिटी मजिस्ट्रेट, बरेली के पद से तुरंत इस्तीफा दे रहा हूं। पांचवां पेज- देश में देसी नहीं, विदेशी जनता पार्टी सरकार जैसी बनी अब केंद्र और राज्य सरकार में न तो सही मायने में लोकतंत्र है और न ही गणतंत्र, बल्कि भ्रम की स्थिति है। देश में अब देसी नहीं, विदेशी जनता पार्टी की सरकार जैसी स्थिति बन गई है। अब आगे क्या? नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के अधिकारी ने बताया- अगर अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया है, तो सरकार का विवेकाधिकार है कि उसे स्वीकार करे या अस्वीकार करे। अगर सरकार ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया, तो उसी दिन से उनकी सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। उन्हें केवल अब तक की सेवा की ग्रेच्युटी और जीपीएफ का लाभ ही मिलेगा। शेष सेवानिवृत्ति लाभ उन्हें नहीं मिलेंगे। उनके पास इस्तीफा वापस लेने का मौका भी नहीं होगा। अलंकार अग्निहोत्री के बारे में जानिए अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में अब तक क्या हुआ, जानिए- ----------------- अविमुक्तेश्वरानंद विवाद से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- अविमुक्तेश्वरानंद बोले- समझदार डिप्टी सीएम मौर्य को डांटा जा रहा प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर डिप्टी सीएम केशव मौर्य की तारीफ की। सोमवार सुबह उन्होंने कहा, 'अगर केशव मौर्य का बस चलता तो वो कब का हमें नहलाकर चले गए होते। उनको डांटा जा रहा है। यहां आने नहीं दिया जा रहा है। एक समझदार नेता को दबा दिया गया।' पढ़ें पूरी खबर
Dainik Bhaskar गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर शक्ति प्रदर्शन:ऑपरेशन सिंदूर का फॉर्मेशन, वॉर टैंक T-90 भीष्म-अर्जुन का धमक और हेलिकॉप्टर ध्रुव का प्रहार
गणतंत्र दिवस 2026 पर राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर देश की शक्ति का प्रदर्शन किया जा रहा है। पहली बार दो मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मौजूद हैं। देखिए परेड की तस्वीरें…
Dainik Bhaskar अजमेर के प्रिंसिपल बोले- पाकिस्तान हमारा बड़ा भाई:आजादी मिली तो देश में तीन ही नेता थे- गांधी, जिन्ना और अम्बेडकर; नेहरू का नाम नहीं था
अजमेर के राजकीय महाविद्यालय के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने कहा- 14 अगस्त 1947 को भारत के राजनीतिक पटल पर और विश्व के पटल पर एक देश का नाम आया। वह देश पाकिस्तान था। 15 अगस्त 1947 सुबह दस-साढ़े 10 बजे भारत का उदय हुआ। पाकिस्तान हमसे 12 घंटे बड़ा है, पाकिस्तान हमारा बड़ा भाई है। जब आजादी मिली तो देश में तीन ही नेता थे- गांधी, जिन्ना और अम्बेडकर। यहां नेहरू नाम नहीं था, ध्यान रखना। ये तीन ही नेता लोकप्रिय थे। विदेशी पत्रकार इंटरव्यू के लिए आए तो पहले गांधी जी के पास गए। रात के आठ बज चुके थे। गांधी सो गए थे। करीब दस बजे जिन्ना के पास गए। वहां पता चला कि वे बाहर गए या सो गए। इसके बाद रात करीब 12 बजे अम्बेडकर के पास गए। अम्बेडकर हिन्दू कोड बिल की तैयारी कर रहे थे। जब पत्रकारों ने कहा कि अब तक आप जाग रहे हैं। इस पर अम्बेडकर ने कहा- उन दोनों के समाज जाग चुके हैं, इसलिए वे सो गए हैं। मेरा समाज अभी सो रहा है, इसलिए मुझे जागना पड़ रहा है। समाज व देश एक ही है, यही भारतीय ज्ञान परम्परा है। ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में हुए राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस 23 और 24 जनवरी को हुई थी। 24 जनवरी को मनोज बेहरवाल ने ये बातें कही थीं। 3 देशों के प्रतिनिधि भी पहुंचे थे कॉन्फ्रेंस में राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की कॉन्फ्रेंस में भारत के सात राज्यों, राजस्थान के 20 से अधिक जिलों के प्रतिभागियों के साथ-साथ तीन देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह सेमिनार भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित थी और इसका आयोजन ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में किया गया था। पाकिस्तान ने पहले घुट्टी पी मुख्य मेहमान के रूप में प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने पाकिस्तान के बनने पर अपने विचार रखे। बेहरवाल ने कहा- पाकिस्तान ने पहले घुट्टी पी, उसके गीत गाए गए, उसे नहलाया गया और उसका सब कुछ कराया गया, जिसके कारण वह बड़ा भाई बन गया। भारत बाद में अस्तित्व में आया। बेहरवाल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया और सोचा कि वह बहुत कुछ हासिल कर लेगा, लेकिन बाद में भारत ने उसे 45 करोड़ रुपए दिए ताकि वह अपनी जिंदगी जी सके। हालांकि, पाकिस्तान ने उन पैसों को आतंकवाद पर सट्टा लगाने में बर्बाद कर दिया। राजनीति भारत के समाज को तोड़ने का काम करती थी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बेहरवाल ने यह भी कहा कि 2014 के बाद भारतीय राजनीति और भारत के समाज के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा का कनेक्शन पहली बार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले, राजनीति भारत के समाज को तोड़ने का काम करती थी, जिससे समाज परेशान था और यह नहीं जानता था कि क्या करना है। कौम अपना इतिहास नहीं जानती बेहरवाल ने कहा- भारतीय ज्ञान परम्परा, जिसे आईकेएस कहते हैं, लेकिन बीकेएस होना चाहिए। आई हटा देना चाहिए और बी लगाना चाहिए। थोड़ी गड़बड़ है। अम्बेडकर ने कहा था कि जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, उसका पतन निश्चित है। पढ़े-लिखे लोगों का समाज से कनेक्शन कट हो चुका है। ऐसे लोगों को समाज के लिए कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। ये अतिथि इनको मिला सम्मान विशिष्ट अतिथि सीए अंकुर गोयल थे। मुख्य वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रोफेसर एम एल शर्मा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ रेखा मंडोवरा ने की। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. दुष्यंत पारीक व सह समन्वयक डॉ. मानक राम सिंगारिया थे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर हरीश कुमार (हिंदी) एवं श्वेता स्वामी (अंग्रेजी) ने किया।
Dainik Bhaskar गणतंत्र दिवस 2026-सेना ने उरी में LoC पर फहराया तिरंगा:अहमदाबाद के युवक ने लाल चौक पर लगाए हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे
कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक देशभर में 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। राज्यों में मुख्यमंत्री तिरंगा फहरा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना ने LoC के पास तिरंगा फहराया। वहीं एक वीडियो सामने आया है जिसमें श्रीनगर के लाल चौक पर अहमदाबाद का एक युवक तिरंगे रंग में हाथ में तिरंगा लेकर पहुंचा। उसने हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। देश भर में मनाए जा रहे जश्न से जुड़े अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए...
Dainik Bhaskar हिमाचल में बर्फ देखने उमड़े टूरिस्ट:हिल स्टेशन पर चौतरफा ट्रैफिक जाम, मौसम देखकर प्लान करें टूअर, एक महीने तक देख सकेंगे स्नो
हिमाचल प्रदेश में ताजा बर्फबारी के बाद देशभर से बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहाड़ों पर पहुंच रहे हैं। इससे शिमला और मनाली के होटल जैम पैक हो गए हैं। सड़कों पर ट्रैफिक रेंग-रेंग कर चल रहा है। ट्रैफिक जाम से टूरिस्ट के साथ साथ लोकल भी परेशान है। राज्य के सबसे मशहूर पर्यटन स्थल शिमला, मनाली, डलहौजी, कुफरी, नारकंडा, सोलंग नाला, अटल टनल में अच्छा स्नोफॉल हुआ है। मगर अभी इन जगह पर पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि एक तो सड़कों पर बर्फ जमी हुई है, दूसरा देशभर से बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहाड़ों का रुख कर रहे है। अचानक टूरिस्ट और गाड़ियों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक जाम लग रहा है। ऐसे में टूरिस्ट कुछ दिन रुककर पहाड़ों की टूअर प्लान कर सकते है। पहाड़ों पर अब अगले एक से दो महीने तक टूरिस्ट बर्फ देख सकेंगे। इस बीच मौसम विभाग ने फिर से भारी बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है। ऐसे में परेशानी और अव्यवस्था से बचने को 'दैनिक भास्कर एप' की ये रिपोर्ट पढ़े। अब सात प्रमुख हिल स्टेशन के बारे में जानेंगे कि कहां पर कितने दिन बर्फ देखने को मिलेंगी। 1. शिमला में में चारो तरफ ट्रैफिक जाम- शिमला के रिज से सटे जाखू के जंगल, लक्कड़ बाजार, IGMC सड़क पर टूरिस्ट अगले 15 दिन बर्फ तक देख सकेंगे। यदि दोबारा बर्फबारी होती है, तो इससे भी अधिक समय तक बर्फ देख सकेगे। शिमला शहर से सटे नालदेहरा-छराबड़ा में भी 15 से 20 दिन तक टूरिस्ट बर्फ देख सकेंगे। 2. कुफरी को अभी सड़क की कंडीशन ठीक नहीं- शिमला से लगभग 16 किलोमीटर दूर कुफरी में अगले एक से डेढ़ महीने तक बर्फ देखी जा सकेगी। कुफरी में डेढ़ फीट से ज्यादा बर्फबारी हुई है। यहां पर टूरिस्ट हॉर्स राइडिंग, याक की सवारी, स्केटिंग वगैरह का आनंद उठा सकेंगे। मगर अभी यहां पहुंचना संभव है। भारी हिमपात की वजह से केवल 4 बॉय 4 वाहनों की ही अभी कुफरी जाने की अनुमति है। 3. नारकंडा को अभी वाहनों की आवाजाही जोखिमभरी- शिमला से लगभग 62 किलोमीटर दूर नारकंडा के जंगल में 30 से 40 दिन तक बर्फ देखने को मिलेगी। यहां के लिए अभी शिमला से आगे टूरिस्ट नहीं भेजे जा रहे। नारकंडा के लिए भी 4 बॉय 4 वाहनों की भेजा जा रहा है। शिमला-ठियोग-नारकंडा-रामपुर सड़क पर अभी वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी है। इसलिए, मौसम साफ होने के बाद नारकंडा का टूअर पैसा वसूल होगा। 4. मनाली में ट्रैफिक जाम परेशान कर रहा- दुनियाभर में मशहूर पर्यटन नगरी मनाली भी बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहुंच रहा है। इससे दो दिन मनाली में घंटों जाम लग रहा है। बीती शुक्रवार रात तो मनाली में बड़ी संख्या में टूरिस्ट ने गाड़ियों में भूखे-प्यासे बिताई है, क्योंकि सड़क पर बर्फ जमने से गाड़ियों की मूवमेंट नहीं हो पा रही थी। इससे घंटों ट्रैफिक जाम लगा रहा। अभी भी बीच बीच में ट्रैफिक जाम टूरिस्ट समेत लोकल को भी परेशान कर रहा है। मनाली में टूरिस्ट अगले दो सप्ताह तक आसपास के जंगलों में बर्फ देख सकेंगे। 5. सोलंग नाला में एक महीने बर्फ देख सकेंगे टूरिस्ट: विंटर टूरिज्म के लिए मनाली में सोलंग नाला पर्यटकों का सबसे पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। यह मनाली से लगभग 13 किलोमीटर दूर है। यहां पर पर्यटक पैराग्लाइडिंग, स्केटिंग इत्यादि का आनंद उठाते है। सोलंग नाला में लगभग तीन फीट बर्फ गिरी है। यहां पर यदि दोबारा बर्फबारी नहीं होती तो भी एक महीने तक बर्फ देखने को मिलेगी। मगर अभी यहां के लिए टूरिस्ट की आवाजाही बहाल नहीं हो पाई है। 6. अटल टनल में तीन फीट हिमपात: मनाली से लगभग 52 किलोमीटर दूर अटल टनल भी अभी पूरी तरह सभी वाहनों के लिए बहाल नहीं हो पाया है। यहां के लिए केवल 4 बॉय 4 व्हीकल को ही अनुमति दी जा रही है। अटल टनल में भी ढाई से तीन फुट बर्फ गिरी है। यहां पर टूरिस्ट अगले 20 से 25 दिन तक बर्फ देख सकेंगे। 7. डलहौजी के लिए सफर जोखिमभरा: चंबा जिला में सबसे फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन डलहौजी है। यहां पर ज्यादातर टूरिस्ट पंजाब से पहुंचता है। डलहौजी में एक फुट से ज्यादा हिमपात हुआ है। डलहौजी को जोड़ने वाली सड़क तो बहाल कर दी गई है। मगर इस सड़क पर अभी सफर जोखिमभरा हो सकता है। यहां पर टूरिस्ट अगले 20 से 25 दिन तक बर्फ देख सकेंगे। ट्रैफिक जाम से सुबह से परेशान: पर्यटक राजस्थान के टूरिस्ट अभिनव ने बताया कि उन्होंने कुफरी में कमरा बुक कर रखा है। मगर सुबह से ट्रैफिक जाम में फंसे है। ऐसे ही दूसरे पर्यटक भी ट्रैफिक जाम से दुखी है। इससे पहाड़ों पर पहुंच रहे टूरिस्ट अच्छे से बर्फ इंजॉय नहीं कर पा रहे। पर्यटन कारोबारी ने प्रशासन पर उठाए सवाल कुफरी में पर्यटन कारोबारी अनिल ठाकुर ने बताया- नेशनल हाईवे होने के बावजूद सड़क से पूरी तरह बर्फ नहीं हटाई जा सकी। इससे गाड़ियां जगह जगह फंसी है। उन्होंने PWD महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। डीसी शर्मा ने बताया- तीन दिन होने के बावजूद सड़क की स्थिति ठीक नहीं है। शिमला में 90% ऑक्यूपेंसी: सूद शिमला के होटेलियर अश्वनी सूद ने बताया- बर्फबारी के बाद शिमला में 85 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी हो गई है। इससे अगले 15 दिन तक भी अच्छा टूरिस्ट पहाड़ों पर पहुंचने की आस बंधी है। मनाली के होटल पैक: अनूप मनाली होटल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनूप ठाकुर ने बताया कि 80 से 90 फीसदी ऑक्यूपेंसी हो गई है। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे सड़कें भी साफ हो रही है। इससे टूरिस्ट और ज्यादा पहुंच रहा है।
Dainik Bhaskar अविमुक्तेश्वरानंद बोले- केशव मौर्य को डांटा जा रहा:उन्हें आने नहीं दिया जा रहा, समझदार नेता को दबा दिया गया
प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर डिप्टी सीएम केशव मौर्य की तारीफ की। सोमवार सुबह उन्होंने कहा, "अगर केशव मौर्य का बस चलता तो वो कब का हमें नहलाकर चले गए होते। उनको डांटा जा रहा है। यहां आने नहीं दिया जा रहा है। एक समझदार नेता को दबा दिया गया।" दरअसल, रविवार को केशव मौर्य प्रयागराज पहुंचे। सर्किट हाउस में शंकराचार्य विवाद से जुड़े सवाल पर कहा, "जब मुझसे बात करने को कहा जाएगा, जरूर करूंगा। मैं पूज्य शंकराचार्य से प्रार्थना कर सकता हूं, उनके चरणों में शीश झुकाकर निवेदन करता हूं कि संगम में स्नान कर विवाद खत्म करें।" माघ मेला प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच 9 दिन से विवाद चल रहा है। कम या खत्म होने की बजाए मामला बढ़ता जा रहा है। रविवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था, "कितना भी जुल्म कर लो, पीछे नहीं हटूंगा।" वहीं, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में आ गए। उन्होंने कहा, "किसी व्यक्ति को यह साबित करना पड़े कि वह शंकराचार्य है, इससे बड़ा अपमान और क्या हो सकता है।" अब तक क्या हुआ, जानिए- 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। मारपीट हुई। पुलिस उनकी पालकी खींचकर दूर ले गई। इसके बाद वे शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने दो नोटिस दिए। पहले में शंकराचार्य की पदवी लिखने पर और दूसरे में मौनी अमावस्या के दिन हंगामा करने पर सवाल पूछे। चेतावनी दी गई कि माघ मेले से बैन किया जा सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का जवाब दिया। 24 जनवरी की रात उनके शिविर में कट्टर सनातनी सेना के 8–10 युवक नारे लगाते पहुंचे और घुसने की कोशिश की। ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- जितना जुल्म होगा, उतनी मजबूती से कदम उठाऊंगा। शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए...
Dainik Bhaskar आधार में फिंगरप्रिंट की जगह चेहरे से पहचान की तैयारी:हर महीने 100 करोड़ ऑथेंटिकेशन का टारगेट, AI और क्वांटम तकनीक से सुरक्षा बढ़ेगी
सरकार ने आधार के तकनीकी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। ‘आधार विजन 2032’ दस्तावेज तैयार हो गया है। इसमें एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है। मकसद आधार को तेज, सुरक्षित और फ्रॉड-फ्री बनाना है। नई व्यवस्था में फिंगरप्रिंट की जगह फेशियल रिकग्निशन प्राथमिक माध्यम होगा। आधार के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि विजन 2032 का लक्ष्य है, लेकिन तैयारी उससे आगे की तकनीक को ध्यान में रखकर हो रही है। एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग से तकनीकी परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। तीन प्रमुख बदलाव… तकनीकी ढांचे की तैयारी समिति का प्रारूप अगले महीने अंतिम रूप देगा। मार्च में इसे यूआईडीएआई को सौंपा जाएगा। इसके अनुसार अगले पांच साल के लिए आधार का नया तकनीकी ढांचा तैयार होगा। मौजूदा अनुबंध 2027 में समाप्त होगा। 2032 तक के लिए नया अनुबंध किया जाएगा। यह दस्तावेज बनाने के लिए पिछले साल अक्टूबर में यूआईडीएआई के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। इसमें सर्वम् एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन, न्यूटनिक्स के संस्थापक धीरज पांडेय, अमृता यूनिवर्सिटी के डॉ. पी. पूर्णचंद्रन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. अनिल जैन और आईआईटी जोधपुर के मयंक वत्स शामिल थे। ------------ ये खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप के एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन पर सवाल:मुकदमे में दावा- मेटा आपकी प्राइवेट चैट्स देख सकता है; कंपनी ने आरोपों को फर्जी बताया दुनिया के सबसे पॉपुलर मैसेजिंग एप वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर प्राइवेसी को लेकर आरोपों के घेरे में है। सैन फ्रांसिस्को की एक फेडरल कोर्ट में दायर नए मुकदमे में दावा किया गया है कि कंपनी यूजर्स के उन चैट्स को भी देख सकती है, जिन्हें वह एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड (E2E) बताकर पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करती है। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar हिमाचल में बर्फबारी जारी-2 दिन यलो अलर्ट, 835 सड़कें बंद:गुलमर्ग में पारा माइनस 10.2°; यूपी के 20 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट
उत्तर भारत के हिमालयी इलाकों में बर्फबारी जारी है। जम्मू-कश्मीर में हल्की बर्फबारी जारी रही। मौसम में सुधार के बाद श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे दो दिन बाद खुला। कश्मीर घाटी में भीषण ठंड जारी है। गुलमर्ग में तापमान माइनस 10.2 और श्रीनगर में माइनस 1.6 डिग्री दर्ज किया गया। फंसे वाहनों को निकालने और बर्फ हटाने का काम जारी है। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से तीन नेशनल हाईवे सहित 835 सड़कें बंद हैं। लाहौल-स्पीति के ताबो में तापमान माइनस 10 डिग्री रहा। राज्यभर में 2 दिन सोमवार और मंगलवार को बारिश-बर्फबारी का यलो अलर्ट जारी है। यूपी के 20 जिलों में 27 और 28 जनवरी को 40-50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश का अलर्ट है। तापमान में 5-6°C तक की गिरावट आने की संभावना है। राजस्थान में उत्तरी सर्द हवाओं से ठंड बढ़ी। नागौर में न्यूनतम तापमान माइनस 1.3 और जयपुर में 5.6 डिग्री दर्ज हुआ। मौसम विभाग ने 26–27 जनवरी को पश्चिमी विक्षोभ के असर से हल्की बारिश की संभावना जताई है। उत्तराखंड के 5 जिलों में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले इलाकों में रविवार को भी बर्फबारी हुई। इसके अलावा मौसम विभाग के मुताबिक 29 जनवरी तक मौसम ऐसा ही रहने वाला है। मध्य प्रदेश में सुबह कोहरे और सर्द हवाओं का असर रहा। भोपाल में विजिबिलिटी 500 से 1000 मीटर रही। धार में इंदौर-अहमदाबाद फोरलेन पर सड़क हादसा हुआ, हालांकि कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। देशभर में मौसम की 3 तस्वीरें... अन्य राज्यों में मौसम का हाल अगले 2 दिन के मौसम का हाल 27 जनवरी 28 जनवरी
Dainik Bhaskar बद्रीनाथ और केदारनाथ में 'गैर हिंदुओं' की एंट्री होगी बैन:BKTC अध्यक्ष बोले- देवभूमि की पवित्रता की रक्षा होगी; जानिए ये कितना मुमकिन
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लग सकती है। रविवार यानी 25 जनवरी को बद्रीनाथ केदारनाथ टेंपल कमेटी (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि दोनों धामों समेत मंदिर समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा और इसके लिए आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर से लोग चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। बिहार, यूपी, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर साल बद्रीनाथ और केदारनाथ दर्शन के लिए आते हैं। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हो गया तो क्या वाकई धामों में गैर-हिंदू यात्रियों की एंट्री रोकी जा सकेगी? इसका जवाब उस कानून में छिपा है जिसके तहत मंदिर समिति बनी है। ये फैसला किसके बयान से आया और आगे क्या होने वाला है? केदारनाथ-बद्रीनाथ में गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकने को लेकर जो बात सामने आई है, वह मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के बयान के जरिए आई है। उन्होंने कहा कि देवभूमि की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन जरूरी है, इसलिए समिति अपने अधीनस्थ मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर प्रस्ताव लाएगी। अभी यह फैसला लागू नहीं हुआ है, बल्कि यह कहा गया है कि आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास किया जाएगा। यानी यह मामला इस समय प्रस्तावित निर्णय के तौर पर सामने है। 2025 में केदारनाथ और बद्रीनाथ में कितने श्रद्धालु पहुंचे? केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी वजह से एंट्री बैन से जुड़ा कोई भी कदम सीधे यात्रियों पर असर डाल सकता है। 2025 के यात्रा सीजन में रिपोर्ट के मुताबिक केदारनाथ धाम में 16,56,539 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि बद्रीनाथ धाम में करीब 16.5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह आंकड़े बताते हैं कि दोनों धामों से जुड़ा कोई भी फैसला सिर्फ उत्तराखंड नहीं, पूरे देश के यात्रियों से जुड़ा मुद्दा बन जाता है। केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर समिति किस कानून के तहत बनी है? श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939 के तहत किया गया था। यह कानून मंदिरों के बेहतर प्रशासन और प्रबंधन के लिए बनाया गया था। इस अधिनियम में समिति की संरचना, उसके अधिकार, मंदिर संचालन, व्यवस्था बनाए रखने और नियम बनाने से जुड़ी बातें तय की गई हैं। यानी समिति के पास मंदिरों के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर निर्णय लेने का अधिकार इसी कानून के तहत आता है। क्या प्रस्ताव पास होते ही गैर-हिंदुओं की एंट्री तुरंत रोकी जा सकती है? 1939 के अधिनियम में समिति को बायलॉज बनाने का अधिकार दिया गया है, जिनके जरिए मंदिर के अंदर व्यवस्था, संचालन और प्रवेश से जुड़े नियम तय किए जा सकते हैं। लेकिन इस अधिनियम में यह भी स्पष्ट है कि बायलॉज प्रभावी करने के लिए उन्हें निर्धारित तरीके से प्रकाशित करना और राज्य सरकार से पुष्टि जैसी प्रक्रिया अहम हो जाती है। इसलिए केवल प्रस्ताव पास होना ही आखिरी कदम नहीं माना जाएगा, बल्कि उसके बाद यह देखना होगा कि नियम किस प्रक्रिया से लागू किया जाता है। देशभर से आने वाले यात्रियों के लिए इसका मतलब क्या है? केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में बिहार समेत पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बहुत से लोग महीनेभर पहले ट्रेन-फ्लाइट टिकट, होटल और यात्रा की योजना बनाते हैं। ऐसे में गैर-हिंदू एंट्री बैन की बात सामने आने के बाद यात्रियों में असमंजस बढ़ना स्वाभाविक है। फिलहाल स्थिति यही है कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव आना बाकी है। इसलिए यात्रियों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि प्रस्ताव पास होने के बाद इसे किस रूप में लागू किया जाता है और प्रशासनिक तौर पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
Dainik Bhaskar गुजरात के कच्छ में भूकंप के 25 साल:तबाह होने और फिर से उठ खड़े होने की कहानी; VIDEO
आज ही के दिन यानी कि 26 जनवरी, 2001 को गुजरात के कच्छ में भीषण भूकंप आया था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.7 मापी गई थी। करीब 700 किलोमीटर दूर तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका असर गुजरात के 21 जिलों तक हुआ था। इस आपदा में 12,000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी और करीब 6 लाख लोगों को बेघर होना पड़ा था। इसके बाद लोगों के मन में केवल सवाल था कि क्या अब कच्छ फिर से खड़ा भी हो सकेगा? लेकिन, कच्छ की ऐसी कायापलट हुई कि आज यह शहर विकास, आत्मनिर्भरता और समृद्धि का उत्तम उदाहरण बन गया है। दैनिक भास्कर की विशेष सीरीज ‘कच्छ में भूकंप @25’ के इस एपिसोड में देंखें यह वीडियो रिपोर्ट....
Dainik Bhaskar पति ने बीमार पत्नी को बैठाकर 600KM रिक्शा खींचा:9 दिन में संबलपुर से कटक पहुंचे, 70 साल की उम्र में कबाड़ बीनकर इलाज कराया
ओडिशा के संबलपुर जिले के 75 साल के बुजुर्ग बाबू लोहार ने अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए 600 किलोमीटर का सफर रिक्शा से किया। वे रिस्का से पत्नी को लेकर संबलपुर से कटक के अस्पताल पहुंचे। इलाज पूरा होने के बाद दोनों उसी रिक्शा से वापस घर आए। बाबू लोहार की 70 साल की पत्नी ज्योति को कुछ महीनें पहले लकवा हो गया था। स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद बाबू लोहार ने पत्नी को कटक ले जाने का सोचा। गरीबी होने के कारण बाबू लोहार के पास सफर और इलाज का खर्च उठाने के लिए पैसे नहीं थे। उन्होंने किसी से मदद नहीं मांगी। पत्नी को ट्रॉली रिक्शा में बैठाया और कटक के लिए निकल पड़े। रोज करीब 60-70 किलोमीटर का सफर तय कर 9 दिन में कटक पहुंचे। दिन में रिक्शा खींचा, रात सड़क किनारे सोए बाबू लोहार बताते है कि सफर के दौरान मैं अपने साथ कंबल, बिस्तर, चादर और मच्छरदानी रखता था। दिन में ट्रॉली रिक्शा खींचता और रात में दुकानों के बाहर या पेड़ों के नीचे रुकता था। रास्ते में कुछ लोगों ने खाना पीने और पैसों से मदद कर दी। कटक पहुंचने के बाद बाबू ने पत्नी को एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान करीब दो महीने तक वे कटक शहर में ट्रॉली रिक्शा चलाकर और कबाड़ बीनकर खर्च जुटाते रहे। लौटते समय ट्रक ने मारी टक्कर 19 जनवरी को डॉक्टरों ने ज्योति को अस्पताल से छुट्टी दे दी। इसके बाद बाबू पत्नी को लेकर ट्रॉली रिक्शा से संबलपुर लौटने लगे। चौद्वार इलाके में गांधी छक ओवरब्रिज के पास एक अज्ञात ट्रक ने ट्रॉली को टक्कर मार दी। हादसे में ज्योति गिरकर घायल हो गईं। स्थानीय लोगों ने 112 नंबर पर सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और ज्योति को पहले प्राथमिक इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, फिर टांगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। रिक्शा छोड़कर बस से जाने से इनकार किया अगले दिन ज्योति को अस्पताल से छुट्टी मिली। टांगी थाना प्रभारी बिकाश सेठी ने दंपती के लिए एसी बस की व्यवस्था करने की पेशकश की, लेकिन बाबू लोहार ने मना कर दिया। बिकाश सेठी के मुताबिक, बाबू ने कहा कि ट्रॉली उनकी रोजी-रोटी है और पत्नी उनकी जिंदगी। सफर में जब भी थकान होती है, वे पत्नी को देखकर हिम्मत जुटाते हैं। इसके बाद पुलिस ने ट्रॉली की मरम्मत करवाई। बाबू लोहार इसके बाद पत्नी को ट्रॉली में बैठाकर संबलपुर के लिए रवाना हो गए।
Dainik Bhaskar 77वें गणतंत्र दिवस पर 8 बदलाव:पहली बार 2 चीफ गेस्ट, महिला कमांडेंट के नेतृत्व में पुरुष रेजिमेंट, सेना के युद्ध का लाइव डिस्प्ले
भारत 26 जनवरी को 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में इस बार कई बदलाव नजर आएंगे। इनमें कुछ इतिहास में पहली बार हैं। पहली बार दो चीफ गेस्ट हैं। CRPF की पुरुष रेजिमेंट का नेतृत्व महिला अधिकारी करेंगी। सेना के युद्ध का लाइव डिस्प्ले और पशुओं की परेड भी है।
Dainik Bhaskar दावोस में पाकिस्तानी फ्लैग...भारतीय झंडा क्यों नहीं:इंदौर की डॉ. रोहिणी बोलीं- WEF में हमारा प्रतिनिधित्व बेहतरीन, पर निराशा हुई; सांसद चंद्रशेखर पर लगा चुकी हैं आरोप
यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में जय श्रीराम के जयकारे लगाकर और भारत के दलितों की तुलना दूसरे देशों से बेहतर बताकर चर्चा में आई पीएचडी स्कॉलर और इंदौर की डॉ. रोहिणी घावरी ने रविवार को केंद्र सरकार से सवाल पूछा है। रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- दावोस (स्विट्जरलैंड) में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) पर भारत का प्रतिनिधित्व बेहतरीन होता है, पर वहां हमारा झंडा नहीं है। क्या वजह हो सकती है। पाकिस्तान जैसे देश का झंडा तीसरे नंबर पर था, लेकिन भारत का नहीं...क्यों? रोहिणी ने लिखा- भारत का झंडा नहीं होने से ज्यादा निराशा पाकिस्तान का झंडा होने से मिली। दावोस और WEF में पाकिस्तान का मुकाम भारत की तुलना में बहुत कम है। रोहिणी ने इस पोस्ट को पीएमओ के साथ #WEF2026 #switzerland #Davos2026 को भी टैग किया है। रोहिणी ने उस जगह का फोटो भी शेयर किया है, जहां बाकी देशों के साथ पाकिस्तान का झंडा तीसरे नंबर पर है जबकि भारत का झंडा ही नहीं है। पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है रोहिणी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- इसमें कोई शक नहीं कि यहां भारत को नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। जल्द ही यूरोपियन यूनियन के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स होने जा रही है, ताकि यूरोपीय देशों की चीन पर निर्भरता कम की जा सके। रोहिणी ने आगे कहा कि वहां भारत के अलग-अलग राज्यों के दस मुख्यमंत्री भी शामिल हुए, जो WEF में हमारी ताकत दिखाता है। इंदौर में डॉ. रोहिणी के पिता सफाईकर्मी हैं डॉ. रोहिणी घावरी इंदौर की रहने वाली हैं और वाल्मीकि समुदाय से आती हैं। उनके पिता इंदौर के एक बीमा अस्पताल में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं। बेहद साधारण बैकग्राउंड से आने के बावजूद रोहिणी ने शिक्षा और आत्मविश्वास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने स्विट्जरलैंड की एक यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की और पीएचडी के लिए एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप भी हासिल की थी। उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी की है। इससे पहले उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स से फॉरेन ट्रेड में बीबीए किया और उसके बाद इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग में एमबीए की पढ़ाई की थी। पांच साल से स्विट्जरलैंड में यूएन में स्कॉलर रोहिणी बीते पांच सालों से स्विट्जरलैंड में यूएन में स्कॉलर हैं और एक NGO भी चला रही हैं, जो सामाजिक मुद्दों पर काम करता है। साल 2019 में वह पढ़ाई के सिलसिले में विदेश गई थीं और वहीं से उनका संपर्क यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद से हुआ। इसके बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और रोहिणी ने आत्महत्या की धमकी दी थी।
Dainik Bhaskar पटना-गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में राज्यपाल की कुर्सी पर बैठे नीतीश:CM की चेयर पर संजय झा, लेडी गवर्नर की सीट पर दिखे सम्राट चौधरी
आज पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान पटना के गांधी मैदान में मंच पर कुर्सियों की अदला-बदली हो गई। राज्यपाल के लिए निर्धारित कुर्सी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैठ गए। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जदयू नेता संजय झा नजर आए। वहीं, लेडी गवर्नर की सीट पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बैठे दिखे। हालांकि, बाद में सीट के आगे लगाया गया बोर्ड बदल दिया गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इधर, राबड़ी आवास और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास दोनों जगहों पर राजद सुप्रीमो लालू यादव ने झंडा फहराया। तेजस्वी यादव इस कार्यक्रम में नजर नहीं आएं। वहीं, पटना के बीजेपी दफ्तर में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी जूता पहनकर झंडा फहराने पहुंचे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने टोक दिया। इसके बाद उन्होंने जूता उतारा। नीचे दो तस्वीरें देखिए... पटना के गांधी मैदान में राज्यपाल ने फहराया तिरंगा पटना के गांधी मैदान में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने झंडा फहराया। मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय चौधरी समारोह में मौजूद रहे। ध्वजारोहण के बाद गांधी मैदान में 21 टुकड़ियों की भव्य परेड और 12 विभागों की आकर्षक झांकियां निकाली गईं। परिवहन विभाग की झांकी पहले, कृषि विभाग की दूसरी और ऊर्जा विभाग की झांकी तीसरे नंबर पर रही। पटना में तिरंगा फहराने की तस्वीरें... राज्यपाल बोले- 5 साल में एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार दिए जाएंगे गांधी मैदान में समारोह में गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि, अगले 5 साल में राज्य के एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार दिए जाएंगे। इसके पहले अभी तक 10 लाख को सरकारी नौकरी और 40 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब राज्य के किसी भी कोने से लोग पटना 5 घंटे में पहुंच रहे हैं। गवर्नर ने कहा, '27 जिलों में जल्द ही मेडिकल कॉलेज का पूरा हो जाएगा। 2005 में राज्य में 6 मेडिकल कॉलेज थे। अब यह 12 हो गया है। 2006 में ग्राम पंचायत और 2007 में नगर निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण से महिला सशक्त हुई हैं। जीविका से जुड़ी एक करोड़ 40 लाख महिलाओं को रोजगार के लिए दस-दस हजार रुपए दिए गए हैं। बेहतर रोजगार के लिए 2 लाख तक सहायता दी जाएगी। प्रत्येक प्रखंड एक एक आदर्श स्कूल होंगे। हर प्रखंड में एक डिग्री कॉलेज होगा। 77वें गणतंत्र दिवस से जुड़े सारे अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए....
Dainik Bhaskar उत्तराखंड में पूर्व सैनिक की एकेडमी से निकले 200 फौजी:ट्रेनिंग, रहना और खाना सब फ्री; सेना, ITBP और CRPF में दे रहे सेवा
उत्तरकाशी के पहाड़ों में एक पूर्व सैनिक ने ऐसा मॉडल खड़ा किया है, जहां बिना एक भी रुपया लिए युवाओं को फौजी बनाया जा रहा है। मुफ्त ट्रेनिंग, मुफ्त रहना-खाना और फौजी अनुशासन के दम पर अब तक 200 से ज्यादा युवा सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती हो चुके हैं। जो वर्तमान में सेना, ITBP और CRPF में सेवा दे रहे हैं। सुबह की ठंडी हवा, पहाड़ों के बीच घुमावदार सड़क और दौड़ते कदमों की थाप… उत्तरकाशी जिला मुख्यालय के तिलोथ–कुटेटी देवी मोटर मार्ग पर हर रोज यही नजारा दिखता है। यहां दर्जनों युवा पसीने से तर-बतर होकर दौड़ लगा रहे होते हैं। कोई पुश-अप करता है, तो कोई सिट-अप। न कोई ट्रेनिंग फीस, न रहने-खाने का खर्च। बस एक ही लक्ष्य, फौजी की वर्दी पहनना। सेना की भर्ती की तैयारी करते युवाओं की PHOTOS... पूर्व सैनिक चंद्र मोहन पंवार ने दिया सपनों को आकार इन युवाओं के सपनों को आकार दे रहे हैं पूर्व सैनिक चंद्र मोहन सिंह पंवार। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने उत्तरकाशी में गंगोत्री फिजिकल एकेडमी खड़ी कर दी। उत्तरकाशी के अलावा टिहरी, पौड़ी और चमोली से भी युवा यहां ट्रेनिंग लेने पहुंच रहे हैं। 100 से ज्यादा युवा ले रहे नियमित रूप से ट्रेनिंग अब तक इस एकेडमी से प्रशिक्षण लेकर 200 से अधिक युवा भारतीय सेना और अर्ध सैनिक बलों में चयनित हो चुके हैं। जबकि कुछ युवा उत्तराखंड पुलिस और वन विभाग में सेवा दे रहे हैं। वर्तमान में 100 से ज्यादा युवा नियमित रूप से ट्रेनिंग ले रहे हैं। अग्निवीर भर्ती में भी दिखा दम कोटद्वार में 15 जनवरी से चल रही अग्निवीर भर्ती में एकेडमी के 70 युवाओं ने फिजिकल और मेडिकल टेस्ट क्लियर कर लिया है। वहीं, 30 युवाओं के मेडिकल का री-टेस्ट होना है। सड़क से मैदान तक… ऐसे शुरू हुई ‘सैनिकों की फैक्ट्री’ साल 2020 में चंद्र मोहन पंवार ने गंगोत्री फिजिकल एकेडमी की शुरुआत की। उद्देश्य साफ थाआर्थिक रूप से कमजोर पहाड़ी युवाओं को निशुल्क आर्मी ट्रेनिंग देना।शुरुआत बेहद कठिन रही। न मैदान था, न संसाधन। युवाओं को सड़क पर दौड़ाया गया, खुले मैदान में अभ्यास कराया गया। पहले बैच के 10 युवाओं का चयन भारतीय सेना में हुआ, यहीं से इस मिशन को नई रफ्तार मिली। सुबह-शाम 6 घंटे की सख्त ट्रेनिंग पंवार रोजाना सुबह और शाम युवाओं को 3-3 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग देते हैं। दौड़, पुश-अप, सिट-अप और बाधा दौड सब कुछ सेना जैसी सख्ती और अनुशासन के साथ कराया जाता है। ‘चार साल रहें या चालीस, मर-मिटेंगे देश के लिए’ अग्निवीर योजना को लेकर विरोध और दुष्प्रचार के बावजूद युवाओं का जोश कम नहीं हुआ। ट्रेनिंग ले रहे युवाओं का साफ कहना है—“सेना में चार साल रहें या चालीस, मर-मिटेंगे तो देश के लिए ही।” ट्रेनिंग के साथ रहना-खाना भी पूरी तरह फ्री जहां बड़े शहरों में लाखों खर्च कर युवा ट्रेनिंग लेते हैं, वहीं उत्तरकाशी की इस एकेडमी में ट्रेनिंग, रहना और खाना पूरी तरह मुफ्त है। इसमें पूर्व सैनिकों के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत अजय पुरी भी सहयोग कर रहे हैं। विधायक से मिला सहारा, युवाओं को छत दूसरे जिलों से आने वाले युवाओं के ठहरने की समस्या सामने आई। इस पर गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने जल विद्युत निगम से तिलोथ में एक हॉल उपलब्ध करवाया। इससे बाहर से आने वाले युवाओं को रहने की सुविधा मिली और ट्रेनिंग और मजबूत हो गई। अब अग्निवीर योजना के बारे में जानिए... भारत सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना शुरू की। इसके तहत भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में 17.5 से 21 वर्ष के युवाओं की चार साल के लिए भर्ती की जाती है। योजना का उद्देश्य सेना को युवा, फिट और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। चार साल बाद चयनित अग्निवीरों को स्थायी सेवा का अवसर मिलता है। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें : उत्तराखंड के ‘भगत दा’ को पद्म भूषण: लेक्चरर की नौकरी छोड़ पॉलटिक्स में आए, राज्य के दूसरे CM बने, 2 साल जेल में बिताए गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (83) को इस साल पद्म भूषण देने की घोषणा हुई है। (पढ़ें पूरी खबर)
Dainik Bhaskar हिमाचल में कल फिर भारी बर्फबारी:स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव, ऊंचे क्षेत्रों में जाने से बचे टूरिस्ट, 70 KM की रफ्तार से चलेगा तूफान
हिमाचल प्रदेश में आज रात से स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक बार फिर एक्टिव हो रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने इसे देखते हुए 27 जनवरी को 4 जिलों में दोबारा भारी बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी कुल्लू, चंबा, लाहौल स्पीति और किन्नौर जिला को दी गई है। इसे देखते हुए सभी पर्यटकों को ऊंचे क्षेत्रों में नहीं जाने और स्थानीय प्रशासन व पुलिस की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। IMD के अनुसार- वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर आज रात से 28 जनवरी की सुबह तक रहेगा। ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, सोलन व मंडी जिला में 26 और 27 जनवरी को 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी-तूफान चलने का पूर्वानुमान है। वहीं शिमला, कुल्लू और सिरमौर जिला में 27 जनवरी को आंधी-तूफान का अलर्ट दिया गया है। तूफान की वजह से ऊंचे क्षेत्रों में बर्फीला तूफान लोगों को परेशान करेगा। 10 जिलों में शीतलहर की चेतावनी इसी तरह, लाहौल स्पीति और किन्नौर को छोड़कर अन्य सभी 10 जिलों में 27 जनवरी को शीतलहर का यलो अलर्ट दिया गया है। इससे तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आएगी। ऊना, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर जिला में कल ओलावृष्टि का भी पूर्वानुमान है। 31 जनवरी को फिर अच्छी बारिश-बर्फबारी 28 व 29 जनवरी को ऊंचे क्षेत्रों में ही हल्की बारिश-बर्फबारी होगी। 30 जनवरी को मौसम पूरे प्रदेश में साफ हो जाएगा। 31 जनवरी को फिर से वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होगा और अच्छी बारिश-बर्फबारी के आसार बन रहे हैं। प्रदेश में 3 NH समेत 832 सड़कें, 1942 बिजली के ट्रांसफॉर्मर बंद प्रदेश में बीते सप्ताह की भारी बारिश-बर्फबारी के कारण पहले ही 3 नेशनल हाईवे समेत 832 सड़कें, 1942 बिजली के ट्रांसफॉर्मर और 245 पेयजल योजनाएं ठप पड़ी है। सड़कें बंद होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। आम जनता के साथ साथ टूरिस्ट भी परेशान है। सैकड़ों घरों में तीन दिन से अंधेरा है। पेयजल योजनाएं जमने से लोगों के घरों में पीने को पानी नहीं मिल रहा।
Dainik Bhaskar "शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों शंकराचार्यों का समर्थन":शारदा पीठ के शंकराचार्य बोले- प्रशासन ने ब्राह्मण बच्चों को निर्दयता से मारा, यह निंदनीय है
25 जनवरी को नर्मदा जन्मोत्सव के दिन द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज जबलपुर पहुंचे। यहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए उन्होंने प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य विवाद को लेकर मुखरता से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा- 3 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। प्रशासन उनका सर्टिफिकेट मांगने वाला कौन होता है। उसे कोई अधिकार नहीं। उन्होंने निर्दोष ब्राह्मणों के साथ जो निर्दयता से मारपीट की है। बेहद निंदनीय है। 6 सवालों में पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल 1: नर्मदा प्राकट्योत्सव पर जबलपुर आना हुआ, कैसा महसूस कर रहे हैं? सवाल 2: प्रयागराज में प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा है? सवाल 3: प्रशासन ने 2 बार नोटिस जारी किए हैं? सवाल 4: इस विवाद को 7 दिन बीत चुके हैं। शंकराचार्य लगातार धरने पर बैठे हुए हैं। आगे क्या होगा? सवाल 5: उत्तर प्रदेश के राजा धार्मिक हैं। धार्मिक माने जाते हैं, फिर ऐसे हालात क्यों बन रहे? रामभद्राचार्य ने कहा कि ये संत-अशांत की लड़ाई है? सवाल 6: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। सरकार ने धर्म को बड़ी महत्ता दी है। इसके बावजूद यह सब हो रहा है? ...................................................... ये खबर भी पढ़ें.. अखाड़ा परिषद बोला-शंकराचार्य पद तभी मान्य...जब 13 अखाड़े चादर ओढ़ाएं प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों और पुलिस के बीच हुए टकराव ने संत समाज को भी दो हिस्सों में खड़ा कर दिया है। इस घटनाक्रम पर पहली बार उज्जैन से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि महाराज का बयान आया है। उन्होंने न सिर्फ घटना को चिंताजनक बताया, बल्कि शंकराचार्य के पद और अखाड़ों की परंपरा को लेकर भी सीधे सवाल खड़े कर दिए। पढ़ें पूरी खबर
Dainik Bhaskar 77वां गणतंत्र दिवस आज:परेड में 'सिंदूर' फॉर्मेशन में फ्लाईपास्ट, 2 कूबड़ वाला ऊंट होगा; 30 झांकियां में 2,500 कलाकार करेंगे परफॉर्म
26 जनवरी को भारत 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। इस बार मुख्य परेड की थीम वंदेमातरम् पर रखी गई है। परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां निकलेंगी, जो 'स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम, समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत' थीम पर आधारित होंगी। एयरफोर्स के कुल 29 एयर क्राफ्ट फ्लाईपास्ट करेंगे। इनमें 16 फाइटर जेट, चार ट्रांसपोर्ट विमान और नौ हेलिकॉप्टर शामिल होंगे। सभी विमान कुल 8 फॉर्मेशन बनाएंगे। वायुसेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनकर 26 जनवरी को औपचारिक परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगी। कर्तव्य पथ पर एनक्लोजर के बैकग्राउंड में वंदेमातरम् की लाइन्स वाली पुरानी पेंटिंग बनाई जाएगी। मेन स्टेज पर फूलों से वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि दी जाएगी। सबसे पहले परेड समारोह का रूट मैप देखिए… परेड में 8 बातें पहली बार होंगी परेड में 30 झांकियां दिखेंगी 2 राफेल, 2 सुखोई समेत 7 एयरक्रॉफ्ट बनाएंगे सिदूंर फॉर्मेशन गणतंत्र दिवस की पहली परेड कर्तव्य पथ पर नहीं हुई थी
Dainik Bhaskar हिमाचल में बर्फबारी जारी-2 दिन यलो अलर्ट, 835 सड़कें बंद:गुलमर्ग में पारा माइनस 10.2°; यूपी के 20 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट
उत्तर भारत के हिमालयी इलाकों में बर्फबारी जारी है। जम्मू-कश्मीर में हल्की बर्फबारी जारी रही। मौसम में सुधार के बाद श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे दो दिन बाद खुला। कश्मीर घाटी में भीषण ठंड जारी है। गुलमर्ग में तापमान माइनस 10.2 और श्रीनगर में माइनस 1.6 डिग्री दर्ज किया गया। फंसे वाहनों को निकालने और बर्फ हटाने का काम जारी है। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से तीन नेशनल हाईवे सहित 835 सड़कें बंद हैं। लाहौल-स्पीति के ताबो में तापमान माइनस 10 डिग्री रहा। राज्यभर में 2 दिन सोमवार और मंगलवार को बारिश-बर्फबारी का यलो अलर्ट जारी है। यूपी के 20 जिलों में 27 और 28 जनवरी को 40-50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश का अलर्ट है। तापमान में 5-6°C तक की गिरावट आने की संभावना है। राजस्थान में उत्तरी सर्द हवाओं से ठंड बढ़ी। नागौर में न्यूनतम तापमान माइनस 1.3 और जयपुर में 5.6 डिग्री दर्ज हुआ। मौसम विभाग ने 26–27 जनवरी को पश्चिमी विक्षोभ के असर से हल्की बारिश की संभावना जताई है। उत्तराखंड के 5 जिलों में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले इलाकों में रविवार को भी बर्फबारी हुई। इसके अलावा मौसम विभाग के मुताबिक 29 जनवरी तक मौसम ऐसा ही रहने वाला है। मध्य प्रदेश में सुबह कोहरे और सर्द हवाओं का असर रहा। भोपाल में विजिबिलिटी 500 से 1000 मीटर रही। धार में इंदौर-अहमदाबाद फोरलेन पर सड़क हादसा हुआ, हालांकि कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। देशभर में मौसम की 3 तस्वीरें... अन्य राज्यों में मौसम का हाल अगले 2 दिन के मौसम का हाल 27 जनवरी 28 जनवरी
Dainik Bhaskar दिन भर बाइक से घूम-घूमकर पीड़ितों से मिले थे मोदी:एक फोन पर कंपनी के मालिक ने कच्छ में बिस्किट के 10 लाख कार्टन भेजे
26 जनवरी, 2001 के दिन गुजरात के कच्छ और भुज में भीषण भूकंप आया था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.7 थी। करीब 700 किलोमीटर दूर तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका असर गुजरात के 21 जिलों तक हुआ था। कच्छ और भुज शहर में 12,000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी और करीब 6 लाख लोगों को बेघर होना पड़ा था। दैनिक भास्कर की विशेष सीरीज ‘कच्छ में भूकंप @25’ के इस एपिसोड में आज जानिए ऐसे दो लोगों की जुबानी पूरी कहानी, जो भूकंप के बाद नरेंद्र मोदी के लिए ‘गाइड’ बने। पहले व्यक्ति ने मोदी को बाइक पर बिठाकर भूकंप की तबाही दिखाई। वहीं, सीएम बनने के बाद जब मोदी चोबारी गांव पहुंचे तो दूसरे शख्स ने उन्हें पूरे गांव के पीड़ितों से मिलवाया। पहले बात करते हैं चोबारी गांव के रामजी मेरिया की... फोटो क्लिक किया और अगले ही मिनट भूकंप आ गया चोबारी गांव में पंचायत घर हुआ करता था, जहां बड़े अवसरों पर गांव के लोग एकत्र होते थे। 26 जनवरी 2001 को भी यहां गांव के अगुवा और छात्र ध्वजवंदन के लिए इकट्ठा हुए थे। गांव के ही रामजी मेरिया उस कार्यक्रम में एंकरिंग कर रहे थे। भूकंप आने से दो मिनट पहले उन्होंने बच्चियों की प्रार्थना करते हुए एक फोटो क्लिक की थी। इसके अगले ही मिनट भूकंप आ गया। धरती के कांपते ही इमारतें ढहने लगीं। शुरुआत में वहां मौजूद लोगों को लगा कि दूर कहीं कोई बड़ा ब्लास्ट हुआ है, लेकिन कुछ ही पल में समझ आ गया कि यह भूकंप है। रामजी मेरिया उस समय तिरंगे को पकड़े हुए थे। खुली जगह पर होने से रामजी और कुछ लोगों की जान बच गई थी। छोटे से गांव में 550 लोगों की मौत झटकों के थमते ही रामजी और उनके साथी लोगों की मदद के लिए भागे तो देखा कि चारों तरफ शव बिखरे पड़े थे। मलबे के नीचे कहीं किसी का हाथ दिख रहा था, कहीं सिर तो कहीं पैर। लगभग सभी मकान धराशायी हो चुके थे। भूकंप आने के दो मिनट के भीतर ही पूरा गांव तबाह चुका था। इस गांव में 550 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। भूकंप की तीव्रता इतनी भयानक थी कि घरों के बाहर दालान में बनी 2-2 फुट की दीवारें तक ढह गई थीं। पंचायत घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर ही रामजी मेरिया का घर था। जब वे मलबे के ऊपर से गुजरते हुए अपने घर की ओर जा रहे थे, तभी बिजली का तार उनके हाथ में आ गया। हालांकि उस समय बिजली की सप्लाई बंद थी, इसलिए कोई नुकसान नहीं हुआ। आगे रामजीभाई की बाइक, पीछे मोदी का काफिला चोबारी गांव भूकंप का एपिसेंटर था और भूकंप के बाद पहली दिवाली थी। इसीलिए दिवाली के दिन सीएम नरेंद्र मोदी चोबारी गांव पहुंचे। उस दौरान रामजीभाई उनके साथ रहे और उन्हें यह दिखाया कि किस जगह कितना नुकसान हुआ है। रामजीभाई अपनी बाइक लेकर आगे चलते थे और मोदी की कार उनके पीछे चलती थी। रामजी मेरिया ने बताया- जब नरेंद्र मोदी ने चोबारी में कदम रखा, तब उनके साथ पुलिस की गाड़ियां बहुत कम थीं। किसी खास सुरक्षा की जरूरत ही नहीं थी। मैं अपनी बाइक से आगे चल रहा था, पीछे उनकी कार और एक पुलिस की गाड़ी थी। चोबारी में मोदी हर उस जगह पर गए, जहां नुकसान हुआ था। नरेंद्र मोदी ने सुबह से लेकर दोपहर तक का समय चोबारी गांव में बिताया। इसके बाद रात को पास के त्रंबो गांव पहुंचे। नरेंद्र मोदी का गला भर आया गांव की यात्रा के दौरान जहां-जहां लोग बैठे थे, नरेंद्र मोदी खुद वहां पहुंचे और उनसे बात की। लगभग हर घर में किसी न किसी की मौत हुई थी। इसलिए लोग सदमे में थे। गांव में स्थित शिव मंदिर के पास मलबे के बीच मोदी ने एक सभा को संबोधित कर लोगों को सांत्वना दी थी। बोलते-बोलते मोदी की आंखों में आंसू आ गए रामजीभाई बताते हैं कि मोदी पूरे गांव का दौरा करने के बाद मंदिर पहुंचे और लोगों को संबोधित किया। वहां कुछ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। उनसे सवाल किया गया कि आज पूरा देश दिवाली मना रहा है, लेकिन आप इस गांव में आए हैं- इसका क्या कारण है? इस सवाल पर मोदी भावुक हो गए। मीडिया ने फिर वही सवाल किया, तब वे बस इतना ही कह पाए- आज पूरा देश दिवाली के दीये जला रहा है, लेकिन इस गांव के हर घर में जीवन का दीया बुझ गया है। यह कहते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए। चोबारी के लोगों से मोदी का लगातार संपर्क रामजीभाई कहते हैं- एपिसेंटर होने के कारण चोबारी में नुकसान सबसे ज्यादा था। हालात देखकर नरेंद्र मोदी को एहसास हुआ कि कच्छ में कितनी बड़ी तबाही हुई है। उन्होंने सिर्फ दिवाली के दिन गांव का दौरा ही नहीं किया, बल्कि इसके बाद भी वे चोबारी के लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहे। रामजीभाई के बाद अब बात दिलीप देशमुख की… एक तस्वीर आज भी इंटरनेट पर देखी जा सकती है, जिसमें नरेंद्र मोदी एक बाइक पर बैठे हुए कच्छ के भूकंपग्रस्त इलाकों का दौरा कर रहे हैं, लेकिन आमतौर पर लोग बाइक चलाने वाले शख्स का नाम नहीं जानते। दरअसल, इस शख्स का नाम है दिलीप देशमुख। दिव्य भास्कर ने दिलीप देशमुख से बातचीत कर उस दिन का पूरा घटनाक्रम जाना। आज दिलीप देशमुख को लोग ‘दादा’ के नाम से जानते हैं। वे 1982 से RSS के प्रचारक रहे हैं। महाराष्ट्र में कुछ समय काम करने के बाद वे प्रचारक के रूप में गुजरात आए थे। शुरुआती 10 साल उन्होंने दक्षिण गुजरात में प्रचारक की जिम्मेदारी निभाई, इसके बाद 3.5 साल उत्तर गुजरात में प्रचारक के तौर पर काम किया। जून 2000 में वे कच्छ आए थे, तबसे यहीं रह रहे हैं। साल 2004 से प्रचारक नहीं हैं। अब मंडवी तालुका के बीदड़ा गांव में एक स्कूल के संचालक हैं। फिलहाल वे फुल-टाइम फ्रीलांसर हैं और मुख्य रूप से पर्यावरण, शिक्षा और अंगदान के क्षेत्र में काम करते हैं। 2020 में उनका लिवर ट्रांसप्लांट हुआ था, जिसके बाद उन्होंने अंगदान को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया था। भास्कर से बातचीत में उन्होंने भूकंप के दिन की रूह कंपा देने वाली यादों को साझा किया। 26 जनवरी 2001 को वे सामखियाली में थे। भूकंप के बाद वे अगले दिन भुज पहुंच गए थे। नरेंद्र मोदी 27 जनवरी को कच्छ पहुंच गए थे। अगली सुबह भुज के जुबिली ग्राउंड में मेरी नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई थी। मोदी ने मुझसे कहा- हमें हर जगह जाकर हालात देखने हैं। चलिए, किसी कार्यकर्ता या आम लोगों से मिलते हैं। दिलीप देशमुख बताते हैं- इस बातचीत के बाद मैं मोदी को अपनी बाइक पर बैठाकर भुज की ओर निकल पड़ा। मुझे अच्छी तरह याद है कि हम 3 से 4 घंटे तक पूरे भुज में घूमते रहे। उनके पास कार थी, लेकिन हर जगह कार से जाना संभव नहीं था। जैसे वाणियावाड़ इलाके में आज भी कार ले जाना मुश्किल है। इसलिए हम बाइक से गए थे। जहां मोटरसाइकिल भी नहीं जा सकती थी, वहां हम पैदल उतरकर निरीक्षण करते थे। सिर्फ बाइक से ही नहीं। जहां जरूरत लगी, वहां हम रुककर लोगों से बात भी करते थे। आज भुज पूरी तरह बदल चुका है, लेकिन उस समय आइना महल क्षेत्र में उतरकर गली-गली पैदल घूमे, लोगों से मिले। यहां चारों ओर तबाही का मंजर था। जिंदा बचे लोग इलाका छोड़कर जा रहे थे। आफ्टरशॉक के डर के बीच कार्यकर्ता के घर रुके मोदी दिलीप देशमुख कहते हैं- जब हम बाइक से घूम रहे थे, उस समय मोदी भाजपा के महासचिव थे। शाम ढल चुकी थी। भाजपा कार्यालय में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं थी, क्योंकि वहां लोग जमीन पर चादर बिछाकर सो रहे थे। करीब शाम 7:30 बजे मैंने उनसे पूछा कि क्या आप रुकेंगे? उन्होंने कहा- हां, रुकना तो है। इसके बाद वे भाजपा कार्यकर्ता उषाबेन मंडलकर के घर रुके। वे बताते हैं- उषाबेन का पूरा परिवार और मोहल्ले के लोग घर के बाहर सो रहे थे, लेकिन मोदी अकेले उषाबेन के घर की दूसरी मंजिल पर ठहरे थे, जबकि तब भी आफ्टरशॉक का डर बना हुआ था। मोदी के एक फोन से कच्छ पहुंच गए 10 लाख कार्टन बिस्किट नरेंद्र मोदी ने नुस्ली वाडिया को फोन कर के भूकंप प्रभावित कच्छवासियों के लिए ब्रिटानिया बिस्किट के 10 लाख कार्टन मंगवाए थे। इस बारे में दिलीप देशमुख बताते हैं- भूकंप के बाद कई वीआईपी लोग यहां आए थे। नानाजी देशमुख के साथ नुस्ली वाडिया भी आए थे। मुझे उस समय यह तक नहीं पता था कि नुस्ली वाडिया कौन हैं। हम पूरे दिन भर साथ रहे थे। रास्ते में उन्होंने नरेंद्र मोदी के बारे में बात की। नुस्ली वाडिया ने मुझे बताया था कि एक रात नरेंद्र मोदी का उन्हें फोन आया था। मोदीजी ने कहा- नुस्ली, मुझे बिस्किट चाहिए। मैंने पूछा- कितने चाहिए? मोदीजी ने जवाब दिया- 10 लाख कार्टन बिस्किट चाहिए। इसके बाद नुस्ली वाडिया ने ब्रिटानिया के बिस्किट भेजे और करीब 6 महीने तक कच्छ के लोगों ने वही बिस्किट खाए। पुनर्वास और कच्छ के पुनर्निर्माण पर मोदी का विजन नरेंद्र मोदी ने पुनर्वास और कच्छ को फिर से खड़ा करने के लिए जो किया, उसका जिक्र दिलीप देशमुख ने भी किया। उन्होंने बताया कि पुनर्वास को लेकर नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण बिल्कुल साफ था। उनका मानना था कि जो गांव पूरी तरह ढह चुके हैं, उन्हें उसी जगह दोबारा बसाने के बजाय थोड़ी दूरी पर नई योजना और आधुनिक ढांचे के साथ बसाया जाए। उस समय मेरी समझ इतनी नहीं थी। मैंने उनसे कहा था कि अगर गांव दूर बसाए जाएंगे तो लोगों को आने-जाने में दिक्कत होगी। इस पर मोदी जी ने मुझसे कहा- आज आपको दूरी ज्यादा लग रही है, लेकिन भविष्य में हर व्यक्ति के पास साधन होंगे, तब किसी को कुछ भी दूर नहीं लगेगा। आज जो रिलोकेशन साइटें हैं, वे नरेंद्र मोदी का विजन हैं वे आगे बताते हैं- आज गांवों के बाहर जो रिलोकेशन साइट्स बनी हैं, वह मूल रूप से नरेंद्र मोदी का ही विजन है। भूकंप आने के करीब 8 महीने बाद नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम बने थे। उनके सीएम बनने के बाद जिस तेजी और जज्बे के साथ यहां विकास का काम हुआ, वह यहां का हरेक व्यक्ति बता सकता है। उस समय कच्छ में कोई यूनिवर्सिटी नहीं थी। बाद में कच्छ यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। ऐसे कई अलग-अलग और दूरगामी काम मोदी के विजन की वजह से संभव हो पाए। -------------------- कच्छ भूकंप से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… कच्छ में हुई थी 185 बच्चों, 20 टीचर्स की मौत:गणतंत्र दिवस की परेड निकाल रहे थे, तभी उन पर ढह गईं इमारतें घटना 26 जनवरी 2001 की ही है। गुजरात में कच्छ के अंजार शहर में 20 स्कूलों के बच्चों की गणतंत्र दिवस की परेड निकल रही थी। बच्चे यूनिफॉर्म पहने, हाथों में तिरंगे लेकर भारत माता की जय के नारों के साथ आगे बढ़ रहे थे। टीचर्स सभी को लाइन में चलने की हिदायत दे रहे थे। पूरी खबर पढ़ें… कलेक्टर के नाम पर भुज में बसा शहर, मलबे से कच्छ को खड़ा करने वाले 6 लोगों की कहानी 26 जनवरी, 2001 के दिन गुजरात के भुज जिले में भीषण भूकंप आया था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.7 थी। करीब 700 किलोमीटर दूर तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। कच्छ और भुज शहर में 12,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और करीब 6 लाख लोगों को बेघर होना पड़ा। पूरी खबर पढ़ें… तबाही के बीच पैदा हुआ बेटा, नाम रखा भूकंप; एक बच्चा 3 दिन बाद मलबे से निकला जिंदा यह 26 जनवरी 2001 की सुबह थी। घड़ी में 8.40 मिनट का समय हुआ था, तभी गुजरात के कच्छ में विनाशकारी भूकंप आया। इसी समय अंजार तालुका की वोहरा कॉलोनी में असगरअली लकड़ावाला घर के बाहर बैठे हुए थे। भूकंप के झटके आते ही वे बाहर भागे। पूरी खबर पढ़ें.. भूकंप के केंद्र बिंदु चोबारी से ग्राउंड रिपोर्ट:6 महीने की बेटी मलबे में दब गई; भगवान राम का सिंहासन पलट गया; मंदिर खड़ा रहा गुजरात के भुज में 26 जनवरी, 2001 की सुबह विनाशकारी भूकंप आया था। भूकंप का केंद्र चोबारी गांव था, जो भुज से करीब 100 किमी दूर है। चोबारी को कच्छ का आखिरी छोर भी कहा जाता है। भुज में आए भयानक भूकंप के 25 साल पूरे होने पर भास्कर की टीम चोबारी गांव पहुंची। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar 26 जनवरी राष्ट्रपति कलाम के गेस्ट होते थे डॉ. औलख:PAU के पूर्व VC, 87 की उम्र में पहलवानों जैसा शरीर, PM की रैली नहीं होने दी, CM की बात नहीं मानी
लुधियाना स्थित पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. किरपाल सिंह औलख डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के राष्ट्रपति रहते हुए हर साल गणतंत्र दिवस समारोह में स्पेशल गेस्ट रहते थे। डॉ. कलाम डॉ. औलख के पहलवानी वाले शरीर के मुरीद थे। उन्होंने डॉ. सिंह से राष्ट्रपति भवन में बाकायदा न्यूट्रीशन गार्डन बनवाया। जिसमें ऐसे फलदार पेड़ लगवाए, जिन पर 12 महीने फल लगते हों। डॉ औलख बताते हैं कि जब न्यूट्रीशन गार्डन का काम पूरा हुआ तो राष्ट्रपति ने आखिरी पौधा लगाने के लिए उन्हें बुलाया और उस गार्डन में आखिरी पौधा उनके हाथ से लगा है। यही नहीं, डॉ. औलख उसूलों और सच्चाई पर अडिग वह VC हैं, जिन्होंने PAU में प्रधानमंत्री की रैली की परमिशन नहीं दी थी। वहीं पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल को डांट दिया था। वहीं मुख्यमंत्री रहते प्रकाश सिंह बादल की बात भी नहीं मानी। डॉ. औलख की उम्र इस वक्त 87 साल है। इसके बावजूद वह डेली जिम करते हैं। उनके शरीर में आज भी युवाओं जैसे मसल्स नजर आते हैं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम डॉ. औलख के मुरीद कैसे हुए, 87 साल की उम्र में भी डॉ. सिंह की फिटनेस का राज क्या, पढ़िए पूरी रिपोर्ट... सबसे पहले जानिए, डॉक्टर कलाम से कैसे हुई ट्यूनिंग... डॉ. औलख के पहलवान और VC बनने की कहानी जानिए... VC रहते हुए PMO और CM तक से टकराए...
Dainik Bhaskar प्रधानमंत्री का गणतंत्र दिवस पर 2015 से 2025 तक लुक:2022 में उत्तराखंड की ब्रह्मकमल टोपी, 2021 में शाही परिवार से मिली हलारी पगड़ी पहनी थी
इस साल देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। दिल्ली में कर्तव्य पथ पर परेड में प्रधानमंत्री मोदी शामिल होंगे। हर साल परेड पर PM के लुक की काफी चर्चा होती है। पिछले साल प्रधानमंत्री ने भूरे रंग की जैकेट के साथ रंगीन पगड़ी थी। 2022 में उत्तराखंड की ब्रह्मकमल टोपी, 2021 में शाही परिवार से मिली हलारी पगड़ी पहनी थी। इस बार PM का पहनावा थोड़ी देर में पता चलेगा। इससे पहले, 2014 में PM बनने से लेकर 2025 तक, उनके आउटफिट्स की तस्वीरें देखिए। बतौर PM, गणतंत्र दिवस पर नरेंद्र मोदी की 11 तस्वीरें
Dainik Bhaskar खबर हटके- शिकारी पक्षी कर रहे दिल्ली की सुरक्षा:बांग्लादेशियों की पहचान करेगा एप; 2 पत्नियों के बीच पति का बंटवारा
गणतंत्र दिवस के मौके पर पहली बार शिकारी पक्षी दिल्ली की सुरक्षा करेंगे। वहीं बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने के लिए IIT बॉम्बे एप बना रहा है। वहीं एक ग्राम पंचायत ने पति को 3-3 दिन के लिए दो पत्नियों में बांटा। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
Dainik Bhaskar भास्कर अपडेट्स:BCCI के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का 84 साल की उम्र में निधन
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वे 84 साल के थे। बिंद्रा 1993 से 1996 तक BCCI के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा उन्होंने 1978 से 2014 तक पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) की कमान संभाली। 2015 में मोहाली स्थित PCA स्टेडियम का नाम बदलकर आईएस बिंद्रा स्टेडियम रखा गया। बिंद्रा को 1987 क्रिकेट वर्ल्ड कप के आयोजन में अहम भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है। उस समय इसे रिलायंस कप कहा गया था। यह पहला मौका था जब क्रिकेट वर्ल्ड कप इंग्लैंड से बाहर भारत में आयोजित हुआ। इससे पहले 1975, 1979 और 1983 के वर्ल्ड कप इंग्लैंड में ही हुए थे। क्रिकेट प्रसारण के क्षेत्र में भी उनका योगदान अहम माना जाता है। 1994 में उन्होंने दूरदर्शन की एकाधिकार व्यवस्था को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अदालत के फैसले के बाद ESPN और TWI जैसी अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्टिंग कंपनियां भारतीय बाजार में आईं, जिससे क्रिकेट का व्यावसायिक स्वरूप तेजी से बदला। 2014 में क्रिकेट प्रशासन से संन्यास लेने के बाद बिंद्रा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) में भी जिम्मेदारी संभाली। शरद पवार के अध्यक्ष रहते वे ICC के प्रिंसिपल एडवाइजर रहे। हालांकि उनके करियर में विवाद भी रहे। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में ललित मोदी के समर्थन और क्रिकेट साउथ अफ्रीका के CEO की नियुक्ति को लेकर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।
Dainik Bhaskar पद्मश्री से सम्मानित देश के गुमनाम नायक:MP के भगवानदास बुंदेली युद्ध कला के ट्रेनर, छत्तीसगढ़ की बुधरी ने समाज सेवा के चलते शादी नहीं की
केंद्र सरकार ने 25 जनवरी की शाम पद्म सम्मान की घोषणा की। देश की 113 हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। ये वह लोग हैं जो बिना किसी शोर-शराबे के अपने-अपने क्षेत्रों में सालों से बेहतरीन काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के भगवानदास रैकवार ने अपनी जवानी बुंदेली युद्ध कौशल को संरक्षित करने में बिता दी। छत्तीसगढ़ की बुधरी ताती 15 साल की उम्र से समाज सेवी में जुटी हैं। इसके चलते उन्होंने शादी भी नहीं की। खबर में जानिए देश के इन्हीं गुमनाम नायकों के बारे में… मध्य प्रदेश के दो पद्मश्री राजस्थान के दो पद्मश्री उत्तर प्रदेश के दो पद्मश्री बिहार के तीन पद्मश्री छत्तीसगढ़ के तीन पद्मश्री महाराष्ट्र के भिखल्या को पद्मश्री सम्मान पद्म सम्मान 2026: धर्मेन्द्र को पद्म विभूषण, रोहित शर्मा को पद्मश्री सम्मान:शिबू सोरेन-अलका याग्निक को पद्म भूषण, 131 हस्तियों को पद्म पुरस्कार का ऐलान केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया। इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं। दिवंगत एक्टर धर्मेंद्र को पद्म विभूषण, झारखंड के पूर्व सीएम दिवंगत नेता शिबू सोरेन और बॉलीवुड सिंगर अलका याग्निक को पद्म भूषण दिया जाएगा। एक्टर आर माधवन, क्रिकेटर रोहित शर्मा, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और हॉकी प्लेयर सविता पूनिया को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। पद्म पुरस्कार विजेताओं में से 19 महिलाएं हैं। इनमें 6 विदेशी/NRI/PIO/OCI कैटेगरी के लोग भी हैं। 16 हस्तियां ऐसी हैं, जिन्हें मरणोपरांत पुरस्कार दिए जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… …………………………….. गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र: सेना के 3 अफसरों को कीर्ति चक्र, 13 को शौर्य चक्र; 982 पुलिस कर्मियों को सेवा मेडल गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले रविवार को केंद्र सरकार ने गैलेंट्री अवॉर्ड्स और सर्विस मेडल की घोषणा की। एस्ट्रोनॉट और एयरफोर्स में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा। वहीं तीन अधिकारियों को कीर्ति चक्र और 13 को शौर्य चक्र दिया जाएगा। इस बार पुलिस, फायर ब्रिगेड, होम गार्ड, सिविल डिफेंस और करेक्शनल सर्विस से जुड़े 982 कर्मियों को बेहतरीन (उत्कृष्ट) सेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा। इनमें 125 वीरता पदक (गैलेंट्री मेडल्स) भी शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar कोलकाता में TMC-BJP समर्थकों में झड़प:BJP का आरोप- जनसभा का मंच फूंका; लाउडस्पीकर को लेकर हुआ विवाद
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के दक्षिण-पश्चिमी इलाके सारखेरबाजार में रविवार शाम तृणमूल कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विवाद स्थानीय क्लब में तेज आवाज में माइक चलाने को लेकर शुरू हुआ। भाजपा का आरोप है कि TMC के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के मंच में आग लगा दी। इसी मंच पर त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने दिन में जनसभा को संबोधित किया था। घटना के बाद आग बुझाने के लिए एक दमकल गाड़ी मौके पर भेजी गई। अधिकारी ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। घटनास्थल की दो तस्वीरें… TMC विधायक बोलीं- क्लब के सदस्यों से हुई बदसलूकी बेहाला पूरब से TMC विधायक रत्ना चटर्जी ने कहा कि बैडमिंटन टूर्नामेंट के दौरान BJP समर्थकों ने क्लब के सदस्यों से बदसलूकी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह की हरकतें की जा रही हैं, उसके जवाब में तृणमूल कांग्रेस और सख्त रुख अपनाएगी। ये खबर भी पढ़े…
Dainik Bhaskar जबलपुर में नर्मदा पर निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरा:एक कर्मचारी की मौत, कई घायल; पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर
जबलपुर के तिलवारा क्षेत्र में रविवार रात निर्माणाधीन नर्मदा पुल का एक हिस्सा गिर गया। हादसे में एक कर्मचारी की मौके पर मौत हो गई, जबकि कई कर्मचारी घायल बताए जा रहे हैं। घटना रात करीब 9.30 बजे की है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है। कुछ कर्मचारियों के दबे होने की भी आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार हादसा पुल निर्माण कार्य के दौरान हुआ। ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। हादसे के बाद की तस्वीरें खबर लगातार अपडेट की जा रही है...
Dainik Bhaskar गणतंत्र दिवस से पहले LoC पर पाकिस्तानी ड्रोन दिखा:जम्मू-कश्मीर में 2 हफ्ते में 6 बार देखे गए; सेना ने एंटी ड्रोन सिस्टम एक्टिव किया
गणतंत्र दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में LoC के पास रविवार शाम को पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए हैं। इसके बाद सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने एंटी ड्रोन सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया। सेना के सूत्रों के मुताबिक, यह ड्रोन नियमित निगरानी के दौरान नजर आया। 20 जनवरी को भी कठुआ में ही बॉर्डर के पास ड्रोन देखे गए थे। पिछले 15 दिनों में बॉर्डर के पास 6 बार ड्रोन देखे जा चुके हैं। इससे पहले 17 जनवरी की शाम को लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) से सटे रामगढ़ सेक्टर में भी ड्रोन देखा गया था। सेना की जवाबी कार्रवाई के बाद ड्रोन पाकिस्तान की ओर लौट गया था। वहीं 15 जनवरी को भी रामगढ़ सेक्टर में एक बार, 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार और 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर, धरमसाल सेक्टर, रियासी, सांबा और पुंछ के मंकोट सेक्टर में एकसाथ पांच ड्रोन स्पॉट किए गए थे। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं को देखते हुए LoC पर निगरानी और चौकसी और बढ़ा दी गई है। सेना और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं। ड्रोन से जुड़ी और जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। पहली बार 11 जनवरी को 5 ड्रोन दिखे थे सबसे पहले 11 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और पुंछ में पाकिस्तान से लगी सीमा और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास रविवार शाम करीब 5 ड्रोन दिखाई दिए थे। न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक राजौरी में नौशेरा सेक्टर में तैनात जवानों ने शाम करीब 6.35 बजे गनिया-कलसियां गांव के ऊपर ड्रोन देखा। इसके बाद मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की। राजौरी के तेरियाथ के खब्बर गांव में शाम 6.35 बजे एक और ड्रोन देखा गया। यह ड्रोन कलाकोट के धर्मसाल गांव की तरफ से आया और आगे भरख की ओर बढ़ गया। वहीं, सांबा के रामगढ़ सेक्टर में चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7.15 बजे ड्रोन जैसी चीज कुछ मिनट तक मंडराती दिखी। पुंछ में भी मनकोट सेक्टर में शाम 6.25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी एक और चीज जाती हुई देखी गई। इससे पहले 9 जनवरी को सांबा में IB के पास घगवाल के पालूरा गांव में हथियार की खेप मिली थी, जिसे पाकिस्तान से आए ड्रोन ने गिराया था। इसमें 2 पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 राउंड और एक ग्रेनेड शामिल था। सुरक्षा बलों को शक- पाकिस्तान ड्रोन के जरिए हथियार भेज रहा देश में गणतंत्र दिवस को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इन ड्रोन्स का इस्तेमाल सीमा पर सेना की पोजिशन जानने या फिर आतंकियों के लिए हथियार और नशीले पदार्थ गिराने के लिए किया जा रहा है। 7 मई 2025ः भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के 8 महीने बाद ड्रोन पर अटैक किया। ऑपरेशन सिंदूर भारत का सैन्य अभियान था जो 7 मई 2025 को चलाया गया, जिसमें पाकिस्तानी और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक्स की गईं। इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया था। यह अभियान 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे। लगभग 25 मिनट के अंदर पाकिस्तान में बहावलपुर, मुरीदके जैसे जैश और लश्कर के 9 ठिकानों को स्ट्राइक करके ध्वस्त किया गया था। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को ही कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। पाकिस्तान अगर आतंकी हमले या घुसपैठ की कोशिश भी करेगा तो भारत जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें... भारत की एंटी ड्रोन शील्ड चेक कर रहा पाकिस्तान:ऑपरेशन सिंदूर के बाद से 800 ड्रोन भेजे, सेना ने 240 मार गिराए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ लड़ने का एक खतरनाक और सस्ता युद्ध मॉडल अपनाया है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान की तरफ से 800 से ज्यादा ड्रोन भारतीय हवाई सीमा में भेजे गए। इसे लो लेवल ड्रोन वारफेयर (कम ऊंचाई पर ड्रोन युद्ध) कहा जाता है। पूरी खबर पढ़ें...
Dainik Bhaskar राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं-बेटियों ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर कीर्तिमान बनाया:भारत जल्द विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा
77वां गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस उत्सव देशवासियों में राष्ट्रीय एकता तथा गौरव की भावना को मजबूत बनाता है। राष्ट्रीय एकता के स्वरूपों को जीवंत बनाए रखने का प्रत्येक प्रयास अत्यंत सराहनीय है। मैं, आप सभी को गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देती हूं। मुर्मू ने कहा कि गणतंत्र दिवस के साथ साथ वंदेमातरम् के 150 साल पूरे होने का पर्व भी मनाया जा रहा है। साल 2021 से नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाता है। गणतंत्र दिवस का पावन पर्व हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर होता है। हमारे देश की दशा बदली। भारत स्वाधीन हुआ। हम अपनी राष्ट्रीय नियति के निर्माता बने। उन्होंने कहा कि 57 करोड़ जन-धन अकाउंट में 56 फीसदी महिलाओं के अकाउंट हैं। 10 करोड़ से ज्यादा सेल्फ हेल्प ग्रुप हैं। खेल-कूद में हमारी बेटियों ने कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महिला क्रिकेट टीम ने ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप, ब्लाइंड वर्ल्ड कप जीता है। नारी शक्ति अधिनियम से देश की महिलाएं और सशक्त होंगी। वंचित वर्ग की योजनाओं को लगातार बढ़ाया जा रहा है। महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए जरूरी है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थ-व्यवस्था है। विश्व-पटल पर अनिश्चितता के बावजूद भारत में निरंतर आर्थिक विकास हो रहा है। हम, निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे पुलिसकर्मी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस के जवान देश की आतंरिक रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। हमारे सेवाधर्मी डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी देशवासियों की सेवा करते हैं। हमारे इंजीनियर देश के विकास में भूमिका निभाते हैं। हमारी देश के संवेदनशील नागरिक देश को सशक्त बना रहे हैं। किसानों की दम पर कृषि प्रोडक्ट्स विदेश में भेजे जा रहे हैं। 25 जनवरी को देश में राष्ट्र मतदाता दिवस भी मनाया जाता है। जन-प्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए हमारे वयस्क नागरिक उत्साहपूर्वक मतदान करते हैं। बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर मानते थे कि मताधिकार के प्रयोग से राजनैतिक शिक्षा सुनिश्चित होती है। मतदान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश के विकास में बहुत महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि 26 जनवरी को देशभर में 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का आयोजन किया जाएगा और भारत की सांस्कृतिक विविधता व सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया जाएगा। 14 अगस्त 2025- राष्ट्रपति बोलीं- सेना ने सीमापार आतंकी ठिकाने तबाह किए:ऑपरेशन सिंदूर ने पहलगाम हमले का जवाब दिया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। 24 मिनट के संबोधन में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, कश्मीर रेल प्रोजेक्ट, विकास, लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर बात रखी। उन्होंने कहा- इस साल हमें आतंकवाद का दर्द झेलना पड़ा। पहलगाम हमला कायराना और अमानवीय था। इसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने सीमापार आतंकियों के ठिकानों को तबाह किया। यह आत्मनिर्भर भारत मिशन की परीक्षा का भी अवसर था। पूरी खबर पढ़ें...
Dainik Bhaskar पद्म अवॉर्ड्स 2026 का ऐलान आज होगा:MP के भगवान दास रैकवार, राजस्थान के गफरुद्दीन मेवाती समेत 45 को पद्मश्री मिलेगा
साल 2026 के पद्म अवॉर्ड्स का ऐलान आज होना है। PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस साल 45 लोगों को यह सम्मान दिया जाएगा। इनमें मध्य प्रदेश के भगवदास रायकवार, जम्मू-कश्मीर के बृज लाल भट को गुमनाम नायकों की कैटेगरी में पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। इनके अलावा उत्तर प्रदेश के चिरंजी लाल यादव, गुजरात के धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या, छत्तीसगढ़ की बुदारी थाटी, ओडिशा के चरण हेम्ब्रम, कर्नाटक के अंके गौड़ा, महाराष्ट्र की अरमिडा फर्नांडिस को भी गुमनाम नायकों की कैटेगरी में पद्मश्री से सम्मानित होंगे। घर बेचकर लाइब्रेरी बनाने वाले अंके को सम्मान अंके गौड़ा कर्नाटक के मैसूर के पास हरालाहल्ली गांव के रहने वाले हैं। 20 साल की उम्र में बस कंडक्टर की नौकरी करते हुए उन्होंने किताबें जुटानी शुरू कीं। अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा उन्होंने किताबों पर खर्च किया, यहां तक कि घर भी बेच दिया। आज उनकी ‘पुस्तक माने’ लाइब्रेरी में 20 लाख से ज्यादा दुर्लभ किताबें हैं। गौड़ा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा। 3 श्रेणियों में दिया जाता है पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों- पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण में प्रदान किए जाते हैं। ये पुरस्कार कला, समाज सेवा, साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस, इंडस्ट्री, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल और सिविल सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए दिए जाते हैं। ………………………. पद्म सम्मान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… 2025 में 139 हस्तियों को पद्म पुरस्कार: शारदा सिन्हा समेत 7 को पद्म विभूषण; पंकज उधास, सुशील मोदी समेत 19 को पद्म भूषण; 113 को पद्मश्री केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी 2025 के लिए 139 पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया था। शारदा सिन्हा, ओसामु सुजुकी समेत 7 हस्तियों को पद्म विभूषण सम्मान दिया गया था। पूर्व हॉकी गोलकीपर पीआर श्रीजेश, पंकज उधास और सुशील मोदी समेत 19 हस्तियों को पद्म भूषण के लिए चुना गया। इनके अलावा, राजस्थान की लोक गायिका बतूल बेगम, दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरजा भटला समेत 113 हस्तियों को इस बार पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar भूकंप के केंद्र बिंदु चोबारी से ग्राउंड रिपोर्ट:6 महीने की बेटी मलबे में दब गई; भगवान राम का सिंहासन पलट गया; मंदिर खड़ा रहा
गुजरात के भुज में 26 जनवरी, 2001 की सुबह विनाशकारी भूकंप आया था। भूकंप का केंद्र चोबारी गांव था, जो भुज से करीब 100 किमी दूर है। चोबारी को कच्छ का आखिरी छोर भी कहा जाता है। भुज में आए भयानक भूकंप के 25 साल पूरे होने पर भास्कर की टीम चोबारी गांव पहुंची। केंद्रबिंदु होने के कारण यहां के लोगों ने जिस तीव्रता और भयावहता का अनुभव किया, वह शब्दों में बयान करना मुश्किल है। 25 साल पहले के उन अनुभवों को जानने के लिए हमने चोबारी के ग्रामीणों से बातचीत की। उस दिन लोगों ने क्या देखा? पढ़ें इस ग्राउंड रिपोर्ट में... घर में पत्नी, 6 महीने की बेटी, मां और दादी थीं सबसे पहले हमारी मुलाकात चोबारी के वेलजीभाई मेरिया से हुई। वेलजीभाई बताते हैं- उस समय घर में पत्नी, 6 महीने की बेटी, मां और दादी थीं। मैं बाहर था और मेरे तीन भाई-बहन खेत गए हुए थे। जब मैं वापस लौटा, तो पूरा घर ध्वस्त हो चुका था। पूरा मकान जमीन के बराबर हो गया था। कुछ देर तक समझ ही नहीं आया कि क्या करूं। आसपास के लोग भी मदद के लिए पहुंचे और सभी ने मिलकर मलबे से लोगों को निकालने की कोशिश की। मेरी मां और पत्नी के सिर में भी चोट लगी थी, किसी तरह उनकी जान बच गई। लेकिन, मेरी बच्ची और दादी की जान नहीं बच सकी। आज मेरी बेटी होती तो शादी की उम्र की हो गई होती। हमारे ऊपर बाजरे के ढेर गिर गए थे, इसलिए जान बच गई: मजीबेन इसके बाद भास्कर ने एक महिला मजीबेन से भी बात की। मजीबेन ने बताया- जिस दिन भूकंप आया, उस दिन हम घर पर ही थे। हमारे घर कच्चे थे। हम भी मलबे में दब गए थे, लेकिन हमारे ऊपर बाजरे के ढेर गिर गए थे, इसलिए जान बच गई। हालांकि पैर में बहुत चोट लगी थी, पैर टूट गया था। मेरे जेठ का इकलौता बेटा भी भूकंप में चला गया था। गांव के सभी मकान ढह गए थे। जब नरेंद्र मोदी चोबारी में हमसे मिलने आए, तब हम झोपड़ियों में रह रहे थे। हमने उनसे कहा कि हमें कुछ मदद दीजिए। उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक कर देंगे। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने हमें पक्के घर बनवाकर दिए। भूकंप वाले दिन मैं पिता के साथ मुंबई में था, परिवार यहीं था: लालजीभाई यहीं पर हमारी मुलाकात लालजीभाई से हुई। उन्होंने कहा- जिस दिन भूकंप आया, उस दिन हम मुंबई में थे। मेरी मां, चाचा और बहन यहां चोबारी में थे। हमें मुंबई में अगले दिन इस घटना की जानकारी मिली। यह सुनकर दिल हिल गया। मेरे पिता मुंबई से कच्छ के लिए निकल पड़े। दो-तीन दिन बाद वे भचाऊ पहुंचे और वहां से चोबारी आए। लालजीभाई ने आगे बताया कि जहां हम आज खड़े हैं, वहां कभी एक समय पर घना बाजार हुआ करता था। आज यहां मैदान है। अब यहां सिर्फ पुराने मंदिर ही बचे हैं। लालजीभाई के पिता विनोदभाई ने बताया- मैं मुंबई से यहां आया, तब पता चला कि पत्नी, मेरे भाई और उसकी पत्नी की भूकंप में मौत हो गई है। इस तरफ सारी दुकानें थीं और उनके पीछे मकान थे। हर जगह मलबे के ढेर लग गए थे। बाजार में मेरी दुकान थी। मेरे भाई की उसी दुकान के नीचे दबकर मौत हो गई थी। लालजीभाई के साथ खड़े शिवगरभाई बावजी ने बताया- भूकंप के छह महीने बाद भी यहां से शव मिले थे। एक मेरा भतीजा था और दूसरा मेरे रिश्तेदार का साला। उनकी यहां होटल थी। उस समय मलबा इतना ज्यादा था कि लोगों को ढूंढ़ने में ही महीने भर का समय लग गया था। धीरे-धीरे जब मलबा हटाया जाने लगा, तब मेरे दोनों रिश्तेदारों के शव मिले। कपड़ों से उनकी पहचान हो पाई थी,क्योंकि शव कंकाल में तब्दील हो चुके थे। इसके बाद हमने उस भयानक भूकंप के प्रत्यक्षदर्शी भचुभाई आहिर से बातचीत की। भचुभाई बताते हैं- भूकंप इतना जबरदस्त था कि चोबारी स्कूल के बच्चे मलबे में दब गए थे। पीछे से दीवार गिर गई थी और दर्जनों बच्चे उसके नीचे दब गए। उनमें से कईयों की मौत हो गई थी। मैंने ही गांव से कम से कम 140 शव बाहर निकाले थे। भचुभाई आगे बताते हैं- मेरे दो सगे भांजे भी भूकंप में मारे गए थे। वे हमें 14 दिन बाद मलबे से मिले। मलबा हटाने में समय लगा और फिर उन्हें ढूंढने में भी। उनके चेहरे पहचान में नहीं आ रहे थे। बाद में कपड़ों से उनकी पहचान हुई थी। भचुभाई आगे बताते हैं- हमारी किराने की दुकान थी। दुकान में हम भगवान को प्रसाद चढ़ाते थे। हमारे सामने एक स्कूल था। स्कूल के एक शिक्षक हमारे यहां प्रसाद लेने आए थे। मैंने उनसे कहा कि अभी आप जाइए, मैं प्रसाद लेकर आता हूं। वे स्कूल में चले गए। उसी दौरान मेरा छोटा भाई दुकान में प्रसाद के लिए मिठाई निकाल रहा था, तभी एक जोरदार आवाज आई। सब कुछ हिलने लगा। मैंने भाई से कहा कि तुम सब बाहर निकल जाओ। तभी रामाभाई नाम के काका बोले कि पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी हो रही है। मैंने कहा—यह गोलाबारी नहीं है… यह भूकंप है। भगवान का नाम लो। भचुभाई बताते हैं कि उनकी दुकान के पीछे एक गोदाम था, जहां उनकी पत्नी मौजूद थीं। वह भी मलबे में दब गई थीं। डीज़ल भरने वाले बैरल में उनका सिर फंस गया था। उनके दोनों हाथ टूट गए थे। बाद में सेना के कैंप में उनके हाथों का इलाज करवाया गया।” भूकंप का अनुमान या सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं: डॉ. देवांशु पंडित यह तो थी चोबारी की कहानी… इसके बाद हमने CEPT यूनिवर्सिटी के स्ट्रक्चरल इंजीनियर डॉ. देवांशु पंडित से बातचीत की, ताकि यह समझा जा सके कि उस समय तकनीकी रूप से क्या हुआ था और उनके शोध का अनुभव क्या रहा। CEPT यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी में सहायक प्रोफेसर डॉ. देवांशु पंडित ने बताया- 2001 में जब कच्छ में भूकंप आया, तो उसके अगले ही दिन सरकारी प्रशासन के साथ-साथ CEPT के स्ट्रक्चरल इंजीनियर भी काम में जुट गए थे। उस समय मैं भी उस टीम का हिस्सा था। वे बताते हैं कि घटना के दूसरे ही दिन एक संयुक्त बैठक हुई थी। इस दौरान AUDA और अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की ओर से यह बात सामने आई कि हालात ऐसे थे कि कई इमारतें देखने में सुरक्षित लग रही थीं, लेकिन लोग उनमें जाने से डर रहे थे। रात के समय लोग कारों में और टेंट लगाकर रहने लगे थे। ऐसी परिस्थितियों में देश और विदेश के विशेषज्ञों से भी संपर्क किया गया था। इसके बाद विशेषज्ञों और CEPT ने मिलकर एक डैमेज असेसमेंट मेथडोलॉजी विकसित की। सीनियर प्रोफेसर आरजे शाह ने सभी को ट्रेनिंग दी। इसके बाद टीमें बनाकर इमारतों का निरीक्षण किया जाने लगा। इस दौरान इमारतों को G0 से G5 तक की श्रेणियों में विभाजित किया गया। यह कार्य लगभग डेढ़ से दो महीने तक चला। यह मॉडल इतना सफल रहा कि इसे पूरे गुजरात में लागू किया गया और इसी के आधार पर नीतिगत फैसले लिए गए। डॉ. देवांशु पंडित ने बताया कि 2001 में जो भूकंप आया था, उसमें जमीन की संरचना में मौजूद एक विशेष फॉल्ट पहले छिपा हुआ था, जो उस समय सामने आ गया। उसके बारे में हमें पहले ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन यह बेहद एक्टिव फॉल्ट निकला। इसी कारण कुछ स्थानों पर जमीन का स्तर ऊपर उठ गया था। डॉ. देवांशु पंडित के मुताबिक कच्छ क्षेत्र की टेक्टोनिक प्लेट्स और फॉल्ट्स फिलहाल स्टेबल हैं। भूगर्भीय संरचना के अनुसार यहां दबाव लगातार बन रहा है, लेकिन अब तक ऐसा कोई बदलाव नहीं आया है, जिसे असामान्य कहा जा सके। यह भी नहीं है कि यहां पहली बार कोई अभूतपूर्व घटना हो रही हो। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि दबाव बनने की प्रक्रिया लगातार जारी है। इसके चलते अब भी छोटे-मोटे झटके आते रहते हैं। जिनको रिकॉर्ड भी किया जा रहा है। डॉ. पंडित बताते हैं कि जब भी भूकंप आता है, तो उसका मॉनिटरिंग किया जाता है। इसके बाद उसकी पूरी जानकारी का विश्लेषण किया जाता है। जैसे उसका एपिसेंटर कहां था, उसकी मैग्नीट्यूड कितनी थी, और उसका प्रभाव कितनी दूर तक महसूस हुआ। इससे भूगर्भीय समझ (Understanding of Geology) में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन अभी भी हमारे पास ऐसी कोई प्रणाली नहीं है, जिससे पूर्ण नियंत्रण या सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सके। वर्तमान में टेक्टोनिक प्लेट्स की स्थिति पर सवाल के जवाब में डॉ. देवांशु पंडित ने कहा- कच्छ से लेकर हिमालय तक की भूगर्भीय स्थिति लगभग समान है। हमारी प्लेट यूरेशियन या चाइनीज़ प्लेट का हिस्सा है। फिलहाल यहां दबाव बढ़ रहा है और इसी कारण बड़ी भूगर्भीय गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। उन्होंने साफ किया कि भूकंप का पूर्वानुमान लगाना बेहद कठिन है, क्योंकि भूकंप की गतिविधि सिर्फ कुछ सेकंड की होती है। इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि दो महीने बाद, एक साल बाद या किसी खास तारीख पर किसी निश्चित स्थान पर इतनी तीव्रता का भूकंप आएगा। अगर कच्छ क्षेत्र की बात करें, तो यहां का इतिहास करीब एक हजार साल पुराना है। लेकिन जब हम भूकंपों को देखते हैं, तो 1819 के आसपास आया भूकंप काफी हद तक 2001 के भूकंप से मिलता-जुलता माना जाता है। इसके आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि लगभग हर 200 साल में ऐसी बड़ी घटना घटित होती है। हालांकि, यह बात पूरे विश्वास के साथ और निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती। हाल के समय में जिस तरह कच्छ और राजकोट में भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं, उसे देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या आने वाले समय में कच्छ में भी जापान की तरह कभी भी भूकंप आ सकता है? इस पर डॉ. देवांशु पंडित ने स्पष्ट किया कि ऐसा मानना गलत है। उन्होंने बताया कि जापान, दक्षिण अमेरिका और न्यूज़ीलैंड जैसे देश ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में आते हैं। यह लगभग 40,000 किलोमीटर लंबी घोड़े की नाल (हॉर्स-शू शेप) जैसी एक भूकंपीय पट्टी है, जहां दुनिया के करीब 75 प्रतिशत ज्वालामुखी स्थित हैं। इसी वजह से वहां सबसे बड़े और खतरनाक भूकंप आते हैं। इसकी तुलना में भारत का विशेषकर कच्छ क्षेत्र काफी हद तक सुरक्षित है। डॉ. देवांशु पंडित ने आगे कहा कि- 2001 की तुलना में आज हमारे पास तकनीक कहीं अधिक उन्नत है। इस क्षेत्र में हम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुए हैं। उस समय की तुलना में आज डेटा कवरेज की क्षमता भी बहुत बढ़ गई है, जिससे हमें रोजाना सिस्मिक एक्टिविटी का डेटा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इस डेटा के आधार पर अब माइक्रो-जोनेशन किया जा सकता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अगर भूकंप आता है, तो उसका इमारतों पर कितना और कैसा प्रभाव पड़ेगा। (स्टोरी इनपुट: कमल परमार) ---------------------------------------------- कच्छ भूकंप से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… कलेक्टर के नाम पर भुज में बसा शहर, मलबे से कच्छ को खड़ा करने वाले 6 लोगों की कहानी 26 जनवरी, 2001 के दिन गुजरात के भुज जिले में भीषण भूकंप आया था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.7 थी। करीब 700 किलोमीटर दूर तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। कच्छ और भुज शहर में 12,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और करीब 6 लाख लोगों को बेघर होना पड़ा। पूरी खबर पढ़ें… तबाही के बीच पैदा हुआ बेटा, नाम रखा भूकंप; एक बच्चा 3 दिन बाद मलबे से निकला जिंदा यह 26 जनवरी 2001 की सुबह थी। घड़ी में 8.40 मिनट का समय हुआ था, तभी गुजरात के कच्छ में विनाशकारी भूकंप आया। इसी समय अंजार तालुका की वोहरा कॉलोनी में असगरअली लकड़ावाला घर के बाहर बैठे हुए थे। भूकंप के झटके आते ही वे बाहर भागे। पूरी खबर पढ़ें..
Dainik Bhaskar धीरेंद्र शास्त्री बोले-बेटियों से कह दो बुर्के वाली मत बनना:बाबा रामदेव ने कहा- जो बच्चों को गुरुकुल में नहीं पढ़ाते, वो अंग्रेजों और मुगलों की औलाद
कथावाचक आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- हमें गाय की सेवा करनी है। हमें गाय, गंगा, गुरु, गायत्री और गीता की रक्षा करनी है। इन पांच की रक्षा कर ली तो अपने सनातन की रक्षा कर लोगे। इनकी रक्षा कर ली तो समाज बचेगा। उन्होंने कहा- मैं तो एक और बात जोड़ता हूं कि इन पांच के साथ गौरी को भी बचाओ। बेटियों को भी बचाओ। उन्हें लव जिहाद से बचाओ। बेटियों से कह दो कि दुर्गा बन, काली बन, लेकिन बुर्के वाली वाली मत बनना। इन पांच को तो बचाना ही है। इसका प्रण ले लो। इनको बचाने से सनातन धर्म को कोई नहीं मिटा सकता है न कोई मिटा पाएगा। धीरेंद्र शास्त्री ने कोटा के रामगंजमंडी में तीसरे दिन रविवार को श्रीरामकथा के दौरान ये बातें कही। योग गुरु बाबा रामदेव भी धीरेंद्र शास्त्री की कथा में पहुंचे। यहां मंच से बाबा रामदेव ने कहा- जो गो-माता की सेवा नहीं करते, सिर्फ रक्षा की बात करते हैं, वे सनातन के नाम पर कलंक हैं। अब ये बात कहीं भी लगे, लगने दो। जो लोग कहते हैं कि गो-माता राष्ट्र माता बने, लेकिन कर क्या रहे हो, ये तो बता दो। जो कुछ नहीं कर रहे, वे लोग सनातन के नाम पर कलंक हैं। उन्होंने कहा- दूसरी बात जो बच्चों को गुरुकुल में नहीं पढ़ाते, वे अंग्रेजों और मुगलों की औलाद हैं। क्या मतलब हुआ, ये जो मैकाले पाप करके गया। इंडियन एजुकेशन सिस्टम बनाकर गया। अब इसको साफ करना एजुकेशन मंत्री का काम है। अब देखिए, रामकथा से जुड़ी PHOTOS... धीरेंद्र शास्त्री की जबरदस्त बैटिंग,चौके-छक्के लगाए बागेश्वर धाम (MP) के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री 24 जनवरी (शनिवार) की देर रात करीब एक बजे अपने भक्त (राखी बहनों) के घर चाय पीने पहुंचे। कोटा के रामगंजमंडी इलाके में करीब आधा घंटा रुके थे। इस दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी साथ थे। इससे पहले धीरेंद्र शास्त्री रात करीब 12 बजे मोड़क स्थित ग्राउंड पर क्रिकेट खेला और चौके-छक्के लगाए। (पूरी खबर पढ़ें) ... पल-पल की अपडेट के लिए ब्लॉग पढ़िए...
Dainik Bhaskar बड़वानी में खंडवा-वडोदरा नेशनल हाईवे धंसा:एमपी-गुजरात को जोड़ने वाली सड़क पर 6 फीट का गड्ढा, करीब एक घंटे तक रुका रहा ट्रैफिक
बड़वानी में मध्य प्रदेश और गुजरात को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे पर सड़क अचानक धंस गई। इस पर करीब 6 फीट गहरा गड्ढा हो गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त मौके से कोई गुजर नहीं रहा था। हालांकि, ट्रैफिक करीब एक घंटे तक प्रभावित रहा। पुलिस और नगर पालिका के अमले ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। पुल के एप्रोच रोड पर आधे हिस्से से वाहनों को एक-एक कर निकाला। फिर गड्ढे में मुरम डाली। घटना रविवार सुबह बड़वानी मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर छोटी कसरावद गांव में नर्मदा नदी पर बने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे पुल से पहले हुई। यह सड़क खंडवा-वडोदरा नेशनल हाईवे 347 बी का हिस्सा है, जो मध्य प्रदेश को गुजरात से जोड़ता है। इससे दिनभर में करीब 10 हजार गाड़ियां गुजरती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सड़क के नीचे से गुजर रही पानी की पाइपलाइन ज्यादा प्रेशर से फूट गई। जिसके चलते मिट्टी बैठी और सड़क धंस गई। देखिए, 4 तस्वीरें... रात में सड़क धंसती तो बड़ा हादसा होने की आशंका थी इससे पहले राहगीरों ने एहतियातन गड्ढे के आसपास बैरिकेड्स और पत्थर रख दिए थे, ताकि किसी वाहन चालक या व्यक्ति को नुकसान न हो। नेशनल हाईवे से गुजर रहे निखिल ने कहा- जहां गड्ढा हुआ, वहीं पाइपलाइन फूटी हुई थी, जिससे तेज गति से पानी निकल रहा था। वहीं, विजय ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा- यह रोड दिनभर व्यस्त रहता है। दिन में तो वाहन चालक सावधानी से निकल सकते हैं, लेकिन रात में यहां पूरी तरह अंधेरा रहता है। पुल पर भी स्ट्रीट लाइट्स नहीं जलती हैं। 3 घंटे में मरम्मत काम पूरा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के इंजीनियर विनोद कुमार सेन ने कहा- पाइपलाइन फूटने के कारण पानी के प्रेशर से सड़क का एक हिस्सा डैमेज हो गया। जैसे ही सूचना मिली, हम लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि करीब 3 घंटे में रोड की मरम्मत कर दी गई। फिलहाल, सेफ्टी के साथ ट्रैफिक शुरू करा दिया है। ये खबर भी पढ़ें... भोपाल में 100 मीटर सड़क धंसी, हादसे के बाद एक लेन का ट्रैफिक रोका गया भोपाल के बिलखिरिया के पास एक सड़क का करीब 100 मीटर का हिस्सा धंस गया। इसके बाद एक तरफ का रास्ता बंद करा दिया गया है। यह सड़क एमपीआरडीसी की है, जो इंदौर, होशंगाबाद, जबलपुर, जयपुर, मंडला, सागर को जोड़ती है। पढ़ें पूरी खबर...
Dainik Bhaskar गणतंत्र दिवस पर 982 पुलिस कर्मियों को सेवा मेडल:इनमें 125 वीरता पुरस्कार शामिल; जम्मू-कश्मीर पुलिस को सबसे ज्यादा 45 मेडल
गणतंत्र दिवस 2026 पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैलेंट्री अवॉर्ड्स और सेवा मेडल की घोषणा की है। इस बार 982 पुलिस, फायर ब्रिगेड, होम गार्ड, सिविल डिफेंस और करेक्शनल सर्विस से जुड़ें कर्मियों को अलग-अलग सेवा मेडल दिए गए है। इन पुरस्कारों में 125 वीरता पदक (गैलेंट्री मेडल्स) भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा 45 वीरता पदक जम्मू और कश्मीर ऑपरेशन थिएटर में तैनात कर्मियों को दिए गए हैं। इसके बाद नक्सल हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के 35 और पूर्वोत्तर क्षेत्र में तैनात 5 कर्मियों को दिए गए हैं। फायर ब्रिगेड सर्विस के 4 बचावकर्मी भी वीरता पदक विजेताओं में चुने गए हैं। वीरता पदक में CBI के 31 अधिकारी भी शामिल जम्मू और कश्मीर पुलिस को सबसे ज्यादा 33 वीरता पदक दिए गए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस को 31 मेडल, उत्तर प्रदेश पुलिस को 18 मेडल और दिल्ली पुलिस को 14 मेडल दिए गए हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में, CRPF एकमात्र बल है जिसे 12 पदकों के साथ वीरता पुरस्कार मिले हैं। इस सूची में अधिकारियों और कर्मियों को 101 राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक (PSM) और 756 मेधावी सेवा पदक (MSM) भी शामिल हैं। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के 31 अधिकारियों/कर्मचारियों को विशिष्ट सेवा के लिए प्रेसिडेंट पुलिस मेडल और सराहनीय सेवा के लिए पुलिस मेडल से सम्मानित किया गया है।
Dainik Bhaskar पीएम मोदी की मन की बात का 130वां एपिसोड:साल 2026 का पहला; गणतंत्र दिवस, सेना की भूमिका, नागरिक कर्तव्य पर चर्चा कर सकते हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात का आज 130वां एपिसोड प्रसारित होगा। साल 2026 का पीएम का ये पहला एपिसोड भी है। पीएम आज गणतंत्र दिवस 2026, नागरिक कर्तव्य और सेना की भूमिका पर चर्चा कर सकते हैं। साथ ही देश के युवाओं-महिलाओं, आत्मनिर्भर भारत, किसानों, डिजिटल सुरक्षा और जन-भागीदारी से भी बोल सकते हैं। 2025 में मन की बात का आखिरी एपिसोड 28 दिसंबर को हुआ था। पीएम ने इसमें देश की उपलब्धियों पर चर्चा की थी। उन्होंने 2026 की चुनौतियों, संभावनाओं, डेवलपमेंट पर भी चर्चा की थी। पीएम ने कहा था कि 2025 भारत के लिए गर्व भरे मील के पत्थरों का साल था। चाहे राष्ट्रीय सुरक्षा हो, खेल हो, वैज्ञानिक इनोवेशन हो या दुनिया के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म हों, भारत का असर हर जगह दिखाई दे रहा था। 'मन की बात' के पिछले 5 एपिसोड... ........................................... पीएम मोदी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... क्रिकेटर वैभव समेत 20 बच्चों को बाल पुरस्कार: सरवण ने ऑपरेशन सिंदूर में जवानों की सेवा की, ब्योमा ने एक को बचाने में जान गंवाई वीर बाल दिवस पर 26 दिसंबर को 20 बच्चों को 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। पीएम मोदी ने भी विजेता बच्चों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जेन जी और जेन अल्फा ही हमें विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें...
Dainik Bhaskar तमिलनाडु CM बोले-राज्य में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं:इसे थोपने का हमेशा विरोध करेंगे, तमिल के लिए हमारा प्यार कभी नहीं मरेगा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम के स्टालिन ने तमिल भाषा शहीद दिवस पर रविवार को राज्य के भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि यहां हिंदी के लिए कभी भी कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने आगे कहा कि हम इसे थोपने का हमेशा विरोध करेंगे। तमिल के तमिल भाषा के लिए हमारा प्यार कभी नहीं मरेगा। स्टालिन ने कहा कि जब भी हिंदी को हम पर थोपा गया, इसका उसी तेजी से विरोध भी किया गया। CM ने कहा कि मैं उन शहीदों को कृतज्ञतापूर्वक सम्मान देता हूं जिन्होंने तमिल के लिए अपनी कीमती जान दे दी। भाषा युद्ध में अब और कोई जान नहीं जाएगी। वीडियो शेयर कर शहीदों को याद किया तमिलनाडु CM ने भाषा शहीद दिवस के मौके पर X पर हिंदी विरोधी आंदोलन से जुड़े इतिहास का एक छोटा वीडियो शेयर किया। इसमें 1965 में हिंदी के विरोध में हुए संघर्ष से जुड़ी तस्वीरें हैं। CM ने दिवंगत DMK के दिग्गजों, सीएन अन्नादुरई और एम करुणानिधि के योगदान को भी याद किया। स्टालिन ने आगे कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी विरोधी आंदोलन का नेतृत्व करके उपमहाद्वीप में विभिन्न भाषाई राष्ट्रीय जातियों के अधिकार और पहचान की रक्षा की। 1964-65 में कई लोगों ने आत्मदाह किया था भाषा शहीदों का मतलब उन लोगों से है जिन्होंने 1964-65 में पूरे तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन के दौरान, मुख्य रूप से आत्मदाह करके अपनी जान कुर्बान कर दी थी। DMK लगातार केंद्र सरकार पर न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के माध्यम से हिंदी थोपने का आरोप लगा रही है। भाषा को लेकर केंद्र से लंबे समय से चल रहा विवाद तमिलनाडु की स्टालिन सरकार और केंद्र के बीच लंबे समय से राज्य में हिंदी भाषा के इस्तेमाल को लेकर तकरार चल रही है। पछले साल मार्च में CM स्टालिन ने स्टेट बजट 2025-26 के सिंबल से रुपए का सिंबल '₹' हटाकर तमिल अक्षर 'ரூ' (तमिल भाषा में रुपए को दर्शाने वाले ‘रुबाई’ का पहला अक्षर) लगा दिया था। CM स्टालिन केंद्र सरकार की 3 भाषा फार्मूले (Three Language Policy) का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कई बार भाजपा पर राज्य के लोगों पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा था कि राज्य की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) से शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को फायदा हुआ हुआ है। हिंदी पर बैन के लिए विधानसभा में बिल लाने वाले थे स्टालिन तमिलनाडु सरकार अक्टूबर में विधानसभा में राज्य में हिंदी भाषा के इस्तेमाल पर बैन वाला बिल लाने वाली थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार पूरे तमिलनाडु में हिंदी के होर्डिंग्स, बोर्ड, फिल्मों और गानों पर बैन लगाना चाहती है। सरकार ने इस बिल पर चर्चा के लिए कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। इसके बाद से हिंदी पर बैन की अटकलें तेज थीं। भाषा विवाद पर पिछले बयान… 21 दिसंबर: उदयनिधि बोले- तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की इजाजत नहीं मिलेगी तमिलनाडु के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने 21 दिसंबर को नागोर के एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- तमिलनाडु में पॉलिसी लागू नहीं की इसलिए शिक्षा निधि के 2,000 करोड़ रुपए रोके जा रहे हैं। आप चाहें 10,000 करोड़ रुपए फ्री में दे दें लेकिन तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की इजाजत नहीं मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… 21 नवंबर: उदयनिधि स्टालिन बोले- संस्कृत मरी हुई भाषा:मोदी को तमिल की चिंता तो हिंदी क्यों थोप रहे तमिलनाडु के डिप्टी CM उदयनिधि स्टालिन ने संस्कृत भाषा को लेकर विवादित बयान दिया है। DMK लीडर ने 21 नवंबर को केंद्र सरकार की आलोचन करते हुए कहा कि तमिल डेवलपमेंट के लिए सिर्फ 150 करोड़ रुपए दिए जाते हैं। जबकि संस्कृत जो एक मरी हुई भाषा है, उसे 2400 करोड़ रुपए मिलते हैं। पूरी खबर पढ़ें… ---------- ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु गवर्नर का बिना स्पीच दिए विधानसभा से वॉकआउट:कहा- राष्ट्रगान का फिर अपमान हुआ; CM स्टालिन बोले- ये असेंबली की बेइज्जती तमिलनाडु विधानसभा सत्र के दौरान 20 जनवरी को सदन में हाईलेवल ड्रामा हुआ। राज्यपाल आरएन रवि एक बार फिर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए स्पीच दिए बिना ही असेंबली से बाहर चले गए। पिछले सालों की तरह गवर्नर ने कहा कि तमिल गान के बाद राष्ट्रगान बजाया जाए। लेकिन स्पीकर अप्पावु ने इसके लिए मना कर दिया। इसके बाद गवर्नर रवि शुरुआती भाषण पढ़े बिना ही विधानसभा से बाहर चले गए। इससे पहले 2024-25 में भी वे ऐसा कर चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar कॉलेज छोड़ 27 साल का युवक बनेगा जैन संत:बोले- 32 लाख का पैकेज छोड़ सॉफ्टवेयर इंजीनियर साध्वी बनी थी, यह देख मेरा मन बदला
ब्यावर की रहने वाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी (28) ने एडॉब (Adobe) में 32 लाख रुपए का सालाना पैकेज छोड़ा। सांसारिक जीवन त्याग कर दिसंबर 2024 में जैन साध्वी बन गईं। ये देख मुझे भी संयम पथ पर चलने की प्रेरणा मिली। उसी समय मैंने भी संत बनने का निश्चय कर लिया था। यह कहना है ब्यावर के रहने वाले अनिष्क कांठेड़ का। 27 साल के अनिष्क डीफार्मा के स्टूडेंट हैं। ये अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर जैन संत बनेंगे। 28 जनवरी को बीकानेर के उदासर में जैन भगवती दीक्षा ग्रहण करेंगे। यह दीक्षा उन्हें व्यसन मुक्ति के प्रणेता जैनाचार्य प्रवर रामलालजी महाराज (रामगुरु) प्रदान करेंगे। इससे पहले इनके परिवार के 5 लोग दीक्षा ले चुके हैं। इस दीक्षा महोत्सव को लेकर ब्यावर सहित देशभर के जैन समाज में उत्साह का माहौल है। समारोह में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से सैकड़ों श्रद्धालुओं के उदासर पहुंचने की संभावना है। दीक्षा से पूर्व ब्यावर में धार्मिक कार्यक्रम शुरू दीक्षा से पूर्व ब्यावर स्थित जैन जवाहर भवन में श्री साधुमार्गी जैन श्रावक संघ की ओर से विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। भगवान महावीर, आचार्य नानेश और आचार्य रामगुरु के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्री साधुमार्गी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष गौतम चौधरी ने बताया कि विराट दीक्षा महोत्सव के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। संघ महामंत्री धर्मीचंद ओस्तवाल के अनुसार, अध्यक्ष के नेतृत्व में केंद्रीय कार्यालय आनंद भवन में प्रतिदिन बैठकें हो रही हैं और विभिन्न समितियों का गठन कर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस दौरान उपाध्यक्ष निहाल कोठारी, कैलाश खींचा, ऋषभ कांकरिया सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। संयम शुभारंभ महोत्सव एवं कुंकुम समारोह 24 जनवरी को ब्यावर के विनोद नगर स्थित जैन जवाहर भवन के नानेश रत्नम हॉल में मुमुक्षु अनिष्क के दीक्षा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ। 'संयम शुभारंभ महोत्सव एवं कुंकुम समारोह' में नगर और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी और गुरु भगवंतों के जयकारे लगाए। समारोह का संचालन अनिष्क के मामा और केकड़ी संघ के महामंत्री ऋषभ सोनी ने किया। चौबीसी गीतों से गूंजा परिसर, परिवार हुआ भावुक समता युवा संघ के अध्यक्ष अंकुश बोहरा ने बताया कि अनिष्क के सम्मान में जैन मित्र मंडल की तीनों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में चौबीसी गीतों का भव्य आयोजन हुआ। लगभग दो घंटे तक चले इस कार्यक्रम में समता महिला मंडल एवं श्राविकाओं ने जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की स्तुति में भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किए। एक संयम भजन के दौरान अनिष्क सहित उनका पूरा परिवार भावुक हो उठा। परिवार से 5 लोग पहले ले चुके दीक्षा अनिष्क के पिता प्रेमचंद कांठेड़ का देहांत हो चुका है। मां नीता काठेड़ अधिकतर समय समाज के कार्यक्रमों में जुड़ी रहती हैं। एक बहन की शादी हो गई है। दूसरी बहन साध्वी बन चुकी है। इसके अलावा मौसी भी जैन साध्वी बन चुकी हैं। परिवार में कुल पांच लोग दीक्षा ग्रहण कर चुके हैं। --------------- यह खबर भी पढ़िए... राजस्थान के पांच युवक-युवती बनेंगे संत-साध्वी:मुमुक्षु बोलीं- फैसले पर परिवार नाराज हुआ, घरवालों को मनाने के लिए 3 दिन उपवास किया सांसारिक जीवन को छोड़कर राजस्थान के पांच युवक-युवतियों ने दीक्षा ली थी। इनमें चार युवती और एक युवक शामिल थे। बाड़मेर में 16 फरवरी (रविवार) को दीक्षा कार्यक्रम हुआ था। इस दौरान जैन संत ने युवक-युवतियों को दीक्षा दी। संयम पथ को चुनने के लिए किसी ने RAS तो किसी ने टीचर की कोचिंग छोड़ी थी। पढ़ें पूरी खबर....
Dainik Bhaskar वंदे मातरम् के संस्कृत शब्दों पर पेंटिंग्स बनी थीं:123 साल पहले तेजेंद्र मित्रा ने कैनवास पर उकेरा; कर्तव्य पथ के बैकग्राउंड में दिखेंगी
देश इस बार 77वां गणतंत्र दिवस वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के साथ मना रहा है। मुख्य परेड की थीम भी वंदे मातरम् पर रखी गई है। कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां निकलेंगी, जो 'स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम, समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत' थीम पर आधारित होंगी। इसी दौरान कर्तव्य पथ के बैकग्राउंड में तेजेंद्र कुमार मित्रा की 1923 में वंदे मातरम् पर आधारित पेंटिंग्स को दिखाया जाएगा। ये पेंटिंग्स 'वंदे मातरम् चित्रधारा' नाम की एक किताब में संग्रहित की गईं थीं। इस वंदे मातरम् एल्बम को 1923 में कानपुर में प्रकाश पुस्तकालय के शिव नारायण मिश्रा वैद्य ने पब्लिश करवाया था। 16 जनवरी को दिल्ली के साउथ ब्लॉक में डिफेंस सेक्रेटरी आरके सिंह ने गणतंत्र दिवस समारोह पर प्रेस ब्रीफिंग रखी थी। इसी दौरान उन्होंने बताया कि यह एक दुर्लभ और आउट ऑफ प्रिंट किताब है. जिसमें अरविंद घोष के लिखे वंदेमातरम् गीत का पूरा अंग्रेजी अनुवाद भी है। तेजेंद्र की बनाई पेंटिंग्स वंदे मातरम् गीत के कुछ संस्कृत शब्दों को दर्शाती हैं। पहले देखिए तेजेंद्र की बनाई पेंटिंग्स.... ये सभी पेंटिंग, वी सुंदरम के ब्लॉग स्पॉट से ली गई हैं। इसे 3 मई 2010 को लिखा गया था। सुंदरम तमिलनाडु कैडर के एक आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने 1994 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। ब्लॉग के मुताबिक... 7 सितंबर 1905 को बनारस में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में वंदे मातरम् गीत गाए जाने की शताब्दी के उपलक्ष्य में 10 सितंबर 2006 को चेन्नई के रॉयपेट्टा में राजाजी सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स ने एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया। सभा के तुरंत बाद, श्री श्री आचार्य (मंडयम श्रीनिवासचारियार के बेटे डॉ. पार्थसारथी ने वंदे मातरम् एल्बम नामक एक किताब दी, जो 1923 में कानपुर में प्रकाश पुस्तकालय के शिव नारायण मिश्रा वैद्य ने पब्लिश की थी। इस पुस्तक में तेजेंद्र कुमार मित्रा के बनाए दुर्लभ और सुंदर चित्र हैं, जिनमें वंदे मातरम् गीत के संस्कृत शब्दों को दिखाया गया है। इस दुर्लभ किताब के कुछ पन्ने ब्लॉग में प्रस्तुत कर रहा हूं। किताब का पहला पन्ना... कैसे लिखा गया वंदे मातरम्... पढ़िए पूरी कहानी... ब्रिटिश सरकार ने 1857 की क्रांति के बाद भारत में ब्रिटिश राष्ट्रगान, 'गॉड सेव द क्वीन', लागू करने की कोशिश की। यह माहौल बनाने के लिए कि उनका राष्ट्रगान ही भारत का राष्ट्रगान है। अंग्रेजों ने इस गीत को कार्यक्रमों, सेना और स्कूलों में शामिल करने का फरमान जारी किया। इस पूरी कवायद से बंकिम चंद्र को बहुत गुस्सा आया। साल था 1876 था, भारतीय जनता ब्रिटिश राष्ट्रगान से नफरत करती थी। बंकिम चंद्र ने इस पर गहराई से विचार किया। उन्होंने महसूस किया कि पिछले हजार साल की गुलामी के कारण भारत कभी भी एक एकजुट देश नहीं रहा और इसलिए भारत का कोई राष्ट्रगान नहीं था 17 नवंबर 1875 को उन्होंने वंदे मातरम् नाम से छह भागों वाला गीत लिखा, जो देशभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत था और भारत को अपनी मातृभूमि के रूप में संबोधित करता था। अपने मित्रों को यह गीत सुनाने के बाद उन्होंने कहा कि यही भारतीयों का सच्चा राष्ट्रगान होना चाहिए। इसके बाद बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1882 में 'आनंद मठ' उपन्यास लिखा। यानी इसे लिखने से पांच साल पहले वंदे मातरम् लिखा जा चुका था। आनंद मठ 'संन्यासी विद्रोह' पर आधारित था। इस उपन्यास में देशभक्त संन्यासियों को सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गाते हुए दिखाया गया। 1907 में फहराया गया था वंदे मातरम् लिखा ध्वज 1907 में भीकाजी कामा ने भारत का ध्वज फहराया था। इसमें हरा, पीला और लाल रंग था। इस पर 8 कमल बने थे। बीच में 'वन्दे मातरम्' लिखा था। सबसे नीचे की पट्टी पर सूर्य और चंद्रमा बना था। ----------------------------------- गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... 1857 के गुमनाम शहीद- 168 साल से सड़ रहे 282 शहीदों के कंकाल, अंग्रेजों ने कुएं में जिंदा दफनाया, हत्यारे अफसर के नाम पर अमृतसर में सड़क पंजाब में वाघा बॉर्डर से सिर्फ 35 किमी दूर अजनाला नाम का एक छोटा सा शहर है। यहां गुरुद्वारा सिंह सभा के कैंपस में एक कुआं है। इस कुएं को ‘शहीदों का कुआं या ‘कलियांवाला खोह’ के नाम से जाना जाता है। इसके पास ही रखे लोहे के बक्से में इंसानों की हड्डियां भरकर रखी गई हैं। ये हड्डियां 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले 282 सैनिकों की हैं। पढ़ें पूरी खबर...
Dainik Bhaskar जहरीली हवा से हर साल फेफड़ों में आधा ग्राम प्रदूषण:कैंसर, हार्ट अटैक की वजह बन सकता है, 581 करोड़ खर्च के बावजूद राजस्थान बदहाल
राजस्थान में हवा सुधारने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 2019-20 में 19 हजार करोड़ रुपए का 'क्लीन एयर एक्शन प्लान' (NACP) लागू किया। लक्ष्य था PM10 और PM2.5 (धूल जैसे बेहद बारीक कण) में 20 से 40 प्रतिशत तक कमी लाना। छह साल बाद भी प्रदेश में हालात जस के तस हैं। NACP में शामिल राजधानी जयपुर, जोधपुर, कोटा और अलवर जैसे बड़े शहरों में हवा खराब है। स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (RSPCB) के तीन साल के डेटा से साफ है कि 581 करोड़ खर्च करने के बाद भी जिन शहरों पर सबसे ज्यादा फोकस था, वहीं सुधार सबसे कम दिख रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… प्रदूषण बोर्ड के 2023-2025 के औसत PM2.5 डेटा के मुताबिक, जयपुर में यह स्तर करीब 53 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। इसका मतलब यहां रहने वाला हर व्यक्ति साल में करीब 0.39 ग्राम जहरीले कण सांस के साथ अंदर ले रहा है। अलवर में औसत PM2.5 लगभग 49 माइक्रोग्राम रहा, जो सालाना 0.36 ग्राम प्रदूषण के बराबर है। अजमेर में यह 62 माइक्रोग्राम है, यानी साल में 0.45 ग्राम जहर फेफड़ों में पहुंच रहा है। जोधपुर में औसत 58 माइक्रोग्राम (0.42 ग्राम) और कोटा में 60 माइक्रोग्राम (0.44 ग्राम) है। बोर्ड के डेटा और मेडिकल स्टैंडर्ड के मुताबिक, राजस्थान के शहरों में रहने वाला हर व्यक्ति साल में औसतन 0.4 से 0.5 ग्राम जहरीले कण अपने फेफड़ों में भर रहा है, यानी हर साल आधा ग्राम जहर। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि सीधे खून में घुस जाते हैं और सालों बाद दिल, फेफड़े और मस्तिष्क पर असर दिखाते हैं। डराने वाली बात यह है कि इसमें PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य भारी कण शामिल ही नहीं हैं। ये कैलकुलेशन RSPCB के 2023–2025 के PM2.5 डेटा और मेडिकल स्टैंडर्ड (20 क्यूबिक मीटर हवा/दिन) पर आधारित है। राष्ट्रीय मानक से भी 3-4 गुना ज्यादा जहरीली हवा PM2.5 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का सुरक्षित मानक सिर्फ 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जबकि भारत का राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम तय किया गया है। इसके उलट राजस्थान के बड़े शहरों में पीक महीनों में PM2.5 का स्तर 120 से 180 माइक्रोग्राम तक पहुंच रहा है। यानी हम भारत के मानक से भी 3-4 गुना और WHO के मानक से 9-15 गुना ज्यादा जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इतनी प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहना हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अस्थमा और फेफड़ों का संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। जनवरी जैसे महीनों में इसका असर अस्पतालों की OPD में साफ दिखता है, जहां सांस और एलर्जी से जुड़े मरीज तेजी से बढ़ते हैं। NCAP फंड का हिसाब-किताब अभी 96 स्टेशन, 15 और लगाने की तैयारी राजस्थान में फिलहाल 96 AQI स्टेशन काम कर रहे हैं। इनमें 47 ऑटोमैटिक और 49 मैनुअल हैं। इसके बावजूद बड़े शहरों में प्रदूषण की रियल-टाइम तस्वीर अब भी अधूरी मानी जा रही है। इसी वजह से बोर्ड अब 15 नए AQI स्टेशन लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके अंतर्गत जयपुर में 4, अलवर, खैरथल, कोटा और डीग में एक-एक स्टेशन लगाए जाएंगे। इसके अलावा कोटपूतली, उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, किशनगढ़ (अजमेर), ब्यावर और सलूंबर में भी एक-एक स्टेशन का प्लान है। बोर्ड का दावा है कि इससे निगरानी बेहतर होगी और ज्यादा सटीक डेटा मिलेगा। 60% खराब AQI का कारण रोड डस्ट RSPCB के मेंबर सेक्रेट्री कपिल चंद्रावल के मुताबिक, राजस्थान के बड़े शहरों में खराब हवा के पीछे फैक्ट्री या वाहनों के धुएं से भी बड़ा कारण सड़कों की धूल और निर्माण कार्य हैं। बोर्ड के सर्वे बताते हैं कि खराब AQI का करीब 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ रोड डस्ट और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी से आ रहा है। जहां सड़कें टूटी हुई हैं, मिट्टी खुली पड़ी है, निर्माण साइट्स बिना कवर चल रही हैं और पानी का छिड़काव नहीं हो रहा, वहीं सबसे ज्यादा जहरीले कण हवा में उड़ रहे हैं। बोर्ड के मुताबिक, करीब 20 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों से, 10 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयों से और बाकी कचरा जलाने, खुले प्लॉट और ईंट भट्टों से आता है। यानी हवा साफ करने की असली चाबी नगर निगम, PWD और विकास प्राधिकरण के हाथ में है। अगर सड़कें समय पर साफ हों, निर्माण साइट्स पर कवरिंग हो और जुर्माना वसूल हो, तो AQI में आधे से ज्यादा सुधार यहीं से आ सकता है। हकीकत यह है कि मशीन से झाड़ू, पानी का छिड़काव और साइट मॉनिटरिंग ज्यादातर फाइलों में ही सिमटी हुई है। अधिकारी बोले- सुधार आया, आंकड़े जस के तस बोर्ड के अधिकारी भले ही ‘धीरे-धीरे सुधार’ की बात कर रहे हों, लेकिन उनके अपने आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। तीन साल के डेटा में जयपुर, जोधपुर, अजमेर, अलवर और कोटा जैसे शहरों में AQI और PM2.5 अब भी राष्ट्रीय मानक से कई गुना ऊपर है। न कोई स्थायी गिरावट दिखती है, न कोई ऐसा ट्रेंड जो बताए कि हालात सच में सुधर रहे हैं। बोर्ड के सालाना औसत आंकड़े बताते हैं कि जिन शहरों में 2023 में हवा 'खराब' श्रेणी में थी, वे 2025 में भी उसी श्रेणी से बाहर नहीं निकल पाए। कुछ महीनों में अस्थायी गिरावट जरूर दिखती है, लेकिन सालाना औसत में हालात लगभग जस के तस बने हुए हैं। हर विभाग की अपनी प्राथमिकता है और जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल दी जाती है। यहीं पूरी चेन टूट जाती है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हम नोटिस भेज देते हैं, लेकिन अमल करवाने वाला कोई और होता है। ऐसे में फाइलें घूमती रहती हैं और कोई ठोस कार्रवाई हो ही नहीं पाती। हालांकि अब सख्ती की है, लेकिन अभी भी काफी सुधार की गुंजाइश है। RSPCB के मेंबर सेक्रटरी कपिल चंद्रावल से पूछा कि तीन साल में करोड़ों खर्च होने के बाद भी PM2.5 क्यों नहीं घटा तो उनका जवाब था कि यह दीर्घकालिक और क्षेत्रीय प्रदूषण है, जिस पर मौसमी और भौगोलिक कारकों का असर पड़ता है। AQI स्टेशनों का नियमित रख-रखाव होता है। लेकिन मानसरोवर, रीको और मुरलीपुरा जैसे इलाकों को हाई-रिस्क जोन घोषित क्यों नहीं किया गया, इस पर कोई जवाब नहीं मिला। कितना खतरनाक है PM2.5 PM2.5 इतना बारीक होता है कि नाक-गले के सामान्य फिल्टर इसे रोक नहीं पाते। यह सीधे फेफड़ों में पहुंचकर खून में मिल जाता है। इससे दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों का कैंसर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक तक का खतरा बढ़ जाता है। सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल के डॉ. विशाल गुप्ता कहते हैं कि जनवरी में सांस और एलर्जी से जुड़े केस 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं। जेके लोन हॉस्पिटल के डॉ. हरिमोहन मीणा के मुताबिक, बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता है। देश के 13, हमारे 3 शहर सबसे बड़े गैस चैम्बर विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 (State of Global Air 2025) के मुताबिक, विश्व की लगभग 36% आबादी ऐसी जगह रहती है, जहां हवा में धूल (PM) WHO के सुरक्षित स्तर से बहुत ज्यादा है। करीब 26 करोड़ लोग खाना पकाने के लिए लकड़ी या कोयला जलाते हुए बहुत प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं। भारत की बात करें तो दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 शहर भारत में हैं। इनमें दिल्ली, गुरुग्राम (हरियाणा) जैसे शहर सबसे खराब स्थिति में हैं। वहीं इस सूची में राजस्थान के भिवाड़ी, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ भी शामिल हैं। इन तीनों शहरों को वैश्विक स्तर पर भी सबसे प्रदूषित शहरों में दर्ज किया गया है। इसके अलावा जयपुर, जोधपुर, अलवर, अजमेर, कोटा और बीकानेर जैसे शहरों में PM प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानक से कई गुना ऊपर रहता है। मानसून और ठंडी हवाओं के मौसम में यह और बढ़ जाता है।
Dainik Bhaskar अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में घुसने की कोशिश, धक्का-मुक्की:आई लव बुलडोजर... CM योगी जिंदाबाद के नारे लगे; शिष्य बोले- शंकराचार्य की जान को खतरा
प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच 7 दिनों से विवाद जारी है। शनिवार रात कुछ युवक भगवा झंडा लिए नारे करते हुए पहुंच गए। शंकराचार्य के शिविर में घुसने की कोशिश की। आई लव बुलडोजर और CM योगी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। इस दौरान अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से युवकों की धक्का-मुक्की हो गई। इससे पहले, अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों ने शंकराचार्य की जान को खतरा बताया था। कहा था-प्रशासन और उसके गुंडे हैं। संत के वेश में यहां शैतान घूम रहे। कि शिविर की सुरक्षा के लिए अंदर और बाहर 12 CCTV कैमरे लगवाए हैं। शुक्रवार को अचानक अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ गई थी। अखिलेश ने कहा- शंकराचार्य ने नकली सनातनियों की पोल खोली सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य विवाद पर कहा- हमें खुशी है कि अविमुक्तेश्वरानंद डटे हुए हैं। एक-एक सनातनी उनके साथ है। उन्होंने कम से कम नकली सनातनियों की पोल खोल दी। हमारा उनसे सीधा संपर्क है। इससे पहले शुक्रवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य को समझदार नेता बताया था। उन्होंने कहा- ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए, जो समझते हैं कि अफसरों से गलती हुई है। जो अकड़ में बैठा हो, उसे मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए। दरअसल, गुरुवार को डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा था- शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करता हूं और उनसे स्नान करने की प्रार्थना करता हूं। मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था, जानिए 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए। पहले में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने और दूसरे में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल पर सवाल पूछे गए। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिस के जवाब भेज दिए थे। शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए...
Dainik Bhaskar कच्छ में हुई थी 185 बच्चों, 20 टीचर्स की मौत:गणतंत्र दिवस की परेड निकाल रहे थे, तभी उन पर ढह गईं इमारतें
घटना 26 जनवरी 2001 की ही है। गुजरात में कच्छ के अंजार शहर में 20 स्कूलों के बच्चों की गणतंत्र दिवस की परेड निकल रही थी। बच्चे यूनिफॉर्म पहने, हाथों में तिरंगे लेकर भारत माता की जय के नारों के साथ आगे बढ़ रहे थे। टीचर्स सभी को लाइन में चलने की हिदायत दे रहे थे। नगरपालिका की 18 स्कूलों और 2 कन्या विद्यालयों, यानी कुल 20 स्कूलों के बच्चे और टीचर्स इस परेड का हिस्सा थे। रैली को टाउन हॉल तक जाना था। परेड संकरे रास्तों वाले खत्री चौक पहुंची ही थी कि तभी सुबह 8.40 बजे धरती कांप उठी। आसपास दो-तीन मंजिला इमारतें थीं। बच्चे-टीचर्स कुछ समझ पाते कि इससे पहले ही एक-के-बाद-एक इमारतें भरभराकर उन पर ढह गईं। इस भयानक आपदा में 185 बच्चों और 20 टीचर्स की मौत हो गई थी। परेड में मौजूद कुछ गिने-चुने छात्र और शिक्षक ही बच पाए थे, जिनसे भास्कर की टीम ने बात की। पेश हैं, इनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश… तीन–चार लोगों ने स्लैब काटकर बाहर निकाला: मित्तल ठक्कर केतनभाई के बाद हम परेड में शामिल रही छात्रा मित्तल ठक्कर से मिले। वे भी इस आपदा का शिकार हुईं थीं। मित्तल भूकंप के समय अंजार की स्कूल नंबर 4 में छठी कक्षा की छात्रा थीं। वे बताती हैं कि परेड शुरू हुए अभी कुछ ही समय हुआ था कि भूकंप आ गया। जब भूकंप आया तब हम अंजार के खत्री चौक इलाके में थे, जो उस भूकंप में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र था। उस समय वहां के घर ताश के पत्तों की तरह पल भर में ढहने लगे। किसी को भागने तक का मौका नहीं मिला। भूकंप शुरू होने के एक मिनट से भी कम समय में मैं भी मलबे में दब गई। कुछ समय के लिए मैं बेहोश हो गई थी। जब होश आया, तो पता चला कि मैं दो मंजिला मकान के स्लैब के नीचे दबी हूं। हमारे ऊपर से लोग ठेले गुजर रहे थे अपने रेस्क्यू के बारे में मित्तल बताती हैं- मलबा हटाने के दौरान किसी को मेरी टी-शर्ट दिख गई थी। इसके बाद दो–तीन लोगों ने मेरे ऊपर पड़े स्लैब को हटाकर मुझे बाहर निकाला। मेरे बगल में ही एक बच्चा दबा हुआ है, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। मेरी दोनों सहेलियां की मौत हो गई अपनी सहेलियों को याद करते हुए मित्तल कहती हैं- हमेशा की तरह रैली के लिए भी हम एक साथ ही घर से निकले थे। हम शुरुआत से एक-दूसरे का हाथ पकड़कर साथ चल रहे थे। मलबे में हम एक साथ ही दब गए थे। रेस्क्यू के बाद मुझे पता चला कि मेरी दोनों पक्की सहेलियों शिवानी और प्रियंका की मौत हो चुकी थीं। जब मुझे बाहर निकाला गया, तब मेरा एक पैर फ्रैक्चर था। रेस्क्यू टीम ने मुझे एक तरफ बिठाया। थोड़ी देर बाद मुझे ढूंढते हुए मेरे पिता वहां पहुंचे। मैंने उन्हें देखते ही जोर से आवाज दी। आज भी मैं उस मंजर को याद कर सिहर उठती हूं। मलबे की धूल में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था: जेठालाल ठक्कर मित्तल के पिता जेठालाल ठक्कर भी उस आपदा के प्रत्यक्षदर्शी हैं। जेठालाल उस समय अंजार की स्कूल नंबर 6 में प्रधानाचार्य थे। जेठालाल बताते हैं कि हर साल गणतंत्र दिवस की परेड सावरचंद नाके से शुरू होकर बाजार से गुजरती हुई टाउन हॉल तक जाती थी। परेड के बाद टाउन हॉल में ध्वजवंदन होता था। सभी स्कूलों के बच्चे नाके पर इकट्ठा हुए थे। हर बच्चे के हाथ में एक-एक झंडा था। बच्चों को तीन-तीन की कतार में खड़ा किया गया था। शिक्षक, दो पुलिसकर्मी और बच्चे तय रूट के अनुसार आगे बढ़ रहे थे। लेकिन बच्चे मुख्य सड़क तक पहुंचते, उससे पहले ही भूकंप ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। वे कहते हैं- एक के बाद एक इमारतें गिरती जा रही थीं और उनके मलबे से इतनी धूल उड़ रही थी कि पास का भी कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। कुछ देर बाद जब धूल बैठी तो थोड़ा दिखाई दिया। तब मुझे पता चला कि रैली में शामिल बच्चे इमारतों के मलबों में दब गए हैं। मेरी बेटी भी उसी रैली में थी। कुछ समय के लिए मेरा दिमाग बिल्कुल सुन्न हो गया था। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कहां जाऊं, क्या करूं। जहां नजर डालो, चारों तरफ मलबे के ढेर और दिल दहला देने वाले दृश्य थे। वे बताते हैं कि मलबा इस कदर फैला था कि रास्ते तक नजर नहीं आ रहे थे। कई लोग फंसे हुए दिख रहे थे, लेकिन बिना किसी उपकरण के मलबा हटाया नहीं जा सकता था। शुरुआती दिनों में यहां न बिजली थी और न ही कोई संचार सुविधा थी, जिससे पूरी जानकारी मिल सके। रैली 45 मिनट देर से शुरू हुई, इससे जानमाल का नुकसान बढ़ गया इस रैली का हिस्सा रहे और चार घंटे तक मलबे में दबे रहे शिक्षक विश्रामभाई मकवाणा से भास्कर ने बातचीत की। विश्रामभाई पिछले 36 वर्षों से अंजार के स्कूल नंबर 17 में टीचर हैं। वे बताते हैं- मैं 1991 से इस स्कूल में हूं। 26 जनवरी 2001 को भी हर साल की तरह टाउन हॉल तक रैली निकालकर वहां ध्वजवंदन कार्यक्रम रखा गया था। यह रैली लगभग 1.5 से 2 किलोमीटर लंबी होती है। इस रैली को सुबह 7:30 बजे शुरू होना था, लेकिन उस दिन 8:15 बजे तक रैली निकल पाई। अगर रैली समय पर निकल जाती, तो वह तय स्थान की खुली जगह पर पहुंच चुकी होती और इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। विश्रामभाई बताते हैं कि रैली में उनके स्कूल से तीन शिक्षक वे खुद, कासम साहब, गिरीशभाई चावड़ा और 15 से 20 बच्चे शामिल हुए थे। विश्रामभाई बताते हैं- भूकंप आने से पहले रैली का बड़ा हिस्सा खत्री चौक से गुजर चुका था। आखिरी के बच्चे वहीं गिरते मकानों के नीचे दब गए। उस समय बाजार की गलियां इतनी संकरी थीं कि मुश्किल से बड़ी गाड़ी निकल पाती थी। हालात ऐसे थे कि किसी को भागने या बचने का मौका ही नहीं मिला। हम तीन–चार शिक्षक साथ चल रहे थे। एक शिक्षक मुझसे सिर्फ 8–10 फीट की दूरी पर थे, वे भी वहीं दब गए। मैं भी पूरी तरह मलबे में दब गया था। मेरे ऊपर एक क्लर्क का शव पड़ा था। एक अन्य स्थानीय निवासी भी मेरे पास ही दबे हुए थे। सुबह 8.45 से दोपहर 1:30 बजे तक मैं मलबे में दबा रहा। एक बच गए शिक्षक ने इधर-उधर खबर दी, तब कुछ लोग आए और मुझे बाहर निकाला। मलबे में दबे हालात को याद करते हुए विश्रामभाई कहते हैं- मेरे पास स्कूल नंबर 2 के रफीकभाई भी दबे हुए थे। रफीकभाई का हाथ मेरे नाक के पास आ गया था। मैंने उनसे कहा- हाथ हटाइए, मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। लेकिन हालात ऐसे थे कि वे हाथ ही नहीं हिला पा रहे थे। लेकिन, हम दोनों एक साथ जिंदा बाहर निकाले गए। चार दिन तक मलबे में दबा रहा: केतन राठोड़ इनके बाद हम केतन राठोड़ से मिले। वे पेशे से इलेक्ट्रिशियन हैं। वर्ष 2001 में वे अंजार की स्कूल नंबर 14 में सातवीं कक्षा के छात्र थे। केतन रैली में शामिल नहीं हुए थे, क्योंकि रैली उनके घर के सामने से गुजरने वाली थी। उन्होंने सोचा था कि जब रैली घर के पास से निकलेगी, तब वे उसमें शामिल हो जाएंगे। तभी भूकंप में उनका घर ढह गया और वे मलबे में दब गए। चार दिन बाद वे सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। केतन आज भी अपनी स्कूल और खोए हुए सहपाठियों को भुला नहीं पाए हैं। केतन कहते हैं- मैं रोज अपने दो दोस्तों के साथ स्कूल जाता था। फिर भूकंप में जो हुआ, वह तो सबको पता है। आज भी जब 26 जनवरी आती है, तो सब कुछ याद आ जाता है… और यह भी कि मैं खुद मलबे में दब गया था। वे बताते हैं- मैं खेल रहा था। इसी बीच दादी ने मुझे बुलाया। मैं ऊपर से नीचे ही आ रहा था कि भूकंप आया और हमारा घर ढह गया। मैं और मेरी दादी दोनों मलबे में दब गए। मैं नीचे दबा था और मेरी दादी मेरी छाती के ऊपर आ गईं। वहीं मेरी दादी की मौत हो गई, लेकिन मेरी सांसें चल रही थीं। जहां भी देखता, चारों तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा था। हिलने-डुलने या बाहर निकलने की हिम्मत ही नहीं थी। मलबे के अंदर दबे हुए मुझे बाहर के लोगों और JCB मशीनों के चलने की आवाजें भी सुनाई देती थीं। केतन आगे बताते हैं- मैं करीब 4 दिन तक मलबे में दबा रहा। आर्मी के एक जवान ने मुझे बाहर निकाला था। बाहर निकाले जाने के पांच-छह घंटे बाद मुझे होश आया। इसके बाद इलाज के लिए मुझे हेलिकॉप्टर से भुज ले जाया गया था। केतन कहते हैं- हर साल 26 जनवरी आते ही वह मंजर आंखों के सामने आ जाता है। मेरी आंखों के सामने ही मेरी दादी ने दम तोड़ दिया और मैं कुछ भी नहीं कर पाया। ------------------ कच्छ भूकंप से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… कलेक्टर के नाम पर भुज में बसा शहर, मलबे से कच्छ को खड़ा करने वाले 6 लोगों की कहानी 26 जनवरी, 2001 के दिन गुजरात के भुज जिले में भीषण भूकंप आया था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.7 थी। करीब 700 किलोमीटर दूर तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। कच्छ और भुज शहर में 12,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और करीब 6 लाख लोगों को बेघर होना पड़ा। पूरी खबर पढ़ें… तबाही के बीच पैदा हुआ बेटा, नाम रखा भूकंप; एक बच्चा 3 दिन बाद मलबे से निकला जिंदा यह 26 जनवरी 2001 की सुबह थी। घड़ी में 8.40 मिनट का समय हुआ था, तभी गुजरात के कच्छ में विनाशकारी भूकंप आया। इसी समय अंजार तालुका की वोहरा कॉलोनी में असगरअली लकड़ावाला घर के बाहर बैठे हुए थे। भूकंप के झटके आते ही वे बाहर भागे। पूरी खबर पढ़ें..
Dainik Bhaskar भास्कर अपडेट्स:दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में युवक की गोली मारकर हत्या, आरोपी फरार
दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में शनिवार देर रात 32 साल के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात बुलंद मस्जिद क्षेत्र में हुई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस के मुताबिक 24 जनवरी की रात करीब 11:24 बजे शास्त्री पार्क थाना क्षेत्र में फायरिंग की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि समीर उर्फ मुस्तकीम उर्फ कामू पहलवान को गोली मारी गई है। पुलिस ने मृतक की पहचान 32 वर्षीय समीर उर्फ मुस्तकीम उर्फ कामू पहलवान के रूप में की है। वह बुलंद मस्जिद इलाके का रहने वाला था। घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। टीम ने मौके से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए, जिन्हें जांच में शामिल किया गया है। डीसीपी नॉर्थ ईस्ट आशीष मिश्रा ने बताया कि शास्त्री पार्क थाने में संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कई पुलिस टीमें लगाई गई हैं।
Dainik Bhaskar अब नहीं छूटेगी पंजाब-चंडीगढ़ की कोई भी बड़ी खबर:डेली शाम 6 बजे दैनिक भास्कर एप पर देखिए दिनभर की खबरें, हर बड़ी हलचल
अब पंजाब और चंडीगढ़ की कोई भी बड़ी खबर आपसे नहीं छूटेगी। राजनीति हो, क्राइम हो, सरकार का कोई बड़ा फैसला हो या मौसम का बड़ा अलर्ट– हर बड़ी खबर आपको सबसे सटीक मिलेगी। दैनिक भास्कर एप पर आज से हर दिन शाम 6 बजे पंजाब दिनभर लॉन्च किया जा रहा है। जिसमें लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला, बठिंडा समेत पूरे पंजाब की बड़ी खबरें एक ही प्लेटफॉर्म पर दिखेंगी। चंडीगढ़ में हो रही हर बड़ी घटना की सटीक और तेज जानकारी सीधे आप तक पहुंचेगी। सिर्फ यही नहीं, दैनिक भास्कर एप पर आप दिन भर 150+ छोटे बड़े शहरों की खबरें और वीडियो भी देख सकते हैं। किसी भी बिग इवेंट या ब्रेकिंग न्यूज का नोटिफिकेशन आपको सबसे पहले मिलेगा। तो अलर्ट हो जाइए, हर दिन शाम 6 बजे दैनिक भास्कर एप का पंजाब दिनभर देखने के लिए और जुड़े रहिए पंजाब-चंडीगढ़ की हर बड़ी हलचल से।
Dainik Bhaskar RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनेंगे तेजस्वी!:पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक; रोहिणी ने उठाए सवाल, बोलीं- घुसपैठियों के हाथ में है पार्टी की कमान
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 25 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। बैठक सुबह 12 बजे पटना के होटल मौर्या में होगी। इस बैठक में लालू यादव और राबड़ी देवी भी शामिल होंगी। चुनाव के बाद राजद की ये पहली बड़ी रणनीतिक बैठक है, जिसमें भविष्य की दिशा तय की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर फैसला लिया जा सकता है। लिहाजा ये बैठक अहम है। रोहिणी ने लिखा- लालूवाद को तहस-नहस किया जा रहा इधर, बैठक से पहले रोहिणी ने X पर लिखा, जिसे सही मायने में लालू यादव कि विचारधारा को आगे ले जाने की परवाह होगी, वह जरूर पार्टी की मौजूदा स्थिति को लेकर जिम्मेवार लोगों से सवाल करेगा। वर्त्तमान की कड़वी , चिंताजनक एवं दुःखद सच्चाई यही है कि आज जनता के हक -हकूक की लड़ाई लड़ने के लिए जानी जाने वाली, जन-जन की पार्टी की असली कमान फासीवादी विरोधियों के द्वारा भेजे गए वैसे घुसपैठियों-साजिशकर्ताओं के हाथों में है , जिन्हें लालूवाद को तहस -नहस करने के टास्क के साथ भेजा गया है। कब्जा जमाए बैठे ऐसे लोग अपने गंदे मकसद में काफी हद तक सफल होते भी दिखते हैं। नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रहे को सवालों से भागने,सवालों से बचने,जवाब देने से मुंह चुराने, जवाब देने की बजाए भ्रम फैलाने, लालूवाद और पार्टी की हित की बात करने वालों के साथ दुर्व्यवहार, अभद्र आचरण, अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने की बजाए अपने गिरेबान में झांकना होगा और अगर "वो" चुप्पी साधता है, तो उस पर साजिश करने वाले गिरोह के साथ मिलीभगत का दोष और आरोप खुद ही साबित होता है .. 27 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष भाग बैठक में भाग लेंगे लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को देखते हुए संगठन की कमान युवा नेतृत्व को सौंपने की तैयारी मानी जा रही है। हालांकि अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। आरजेडी की बैठक में देश के 27 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष भाग लेने के लिए पटना आए हुए हैं। इनके अलावा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हिस्सा लेंगे। इसमें 200 से अधिक डेलिगेट्स भाग ले रहे हैं। बाहर से आए नेताओं को होटल मौर्या में ठहराया गया है। पहले से अहम फैसले ले रहे हैं तेजस्वी भले ही पद की आधिकारिक घोषणा न हुई हो, लेकिन तेजस्वी यादव पहले से ही पार्टी के अधिकतर महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे हैं। संगठनात्मक मामलों से लेकर राजनीतिक रणनीति तक उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। पार्टी के भीतर भी उन्हें भविष्य के नेता के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं पर कार्रवाई को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हो सकती है। कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर ठोस और सख्त निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है। RJD की कार्यकारिणी बैठक से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए...
Dainik Bhaskar नंदा देवी राजजात को लेकर एक मत नहीं कुरुड़-नौटी:राजकुंवर बोल चुके- ऊंचे इलाकों में व्यवस्था नहीं, माता बोलीं- मुझे मेरे ऊंचे कैलाश जाना है
चमोली जिले में 2026 में होने वाली नंदादेवी राजजात यात्रा को लेकर विवाद गहरा गया है। एक तरफ कुरुड़ मंदिर में देवी के पाश्वा (देवी का अवतार) ने कैलाश जाने की इच्छा जताई है, जिसके बाद गौड़ ब्राह्मणों ने यात्रा की तिथियां घोषित कर दी हैं। वहीं, दूसरी ओर नौटी में राजा के प्रतिनिधियों ने यात्रा मार्गों की अधूरी तैयारियों के चलते यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया है। इस विवाद के बीच वाण गांव के लोग और यात्रा संचालन में अहम भूमिका निभाने वाले बधान पट्टी के 14 बुजुर्ग असमंजस में हैं। उनका कहना है कि जब तक राजा और राज्य सरकार औपचारिक रूप से राजजात के लिए सहमति नहीं देते, तब तक वे यात्रा में शामिल नहीं होंगे। ऐसे में बिना सरकारी सहयोग के इस विशाल धार्मिक यात्रा का संचालन एक बड़ी चुनौती बन गया है, खासकर निर्जन पड़ावों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर। वाण गांव में हुई बैठक में ग्रामीणों ने कुरुड़ और नौटी के लोगों के बीच आपसी मध्यस्थता के बाद ही यात्रा के आयोजन की मांग की है। उनका कहना है कि नंदा देवी राजजात एक पवित्र और ऐतिहासिक यात्रा है, जिसका आयोजन आपसी समन्वय, परंपराओं के सम्मान और शासन-प्रशासन के सहयोग से ही संभव है। पहले जानिए एक पक्ष का क्या कुछ कहना है? बड़ी नंदा जात 2026 की तिथियों का ऐलान- कुरुड़ गांव में एक पक्ष ने उत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा देवी की ऐतिहासिक बड़ी नंदा जात 2026 की तिथियों का ऐलान कर दिया है। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर चमोली जिले के नंदानगर स्थित सिद्धपीठ नंदाधाम कुरुड़ में यह घोषणा विधिवत रूप से की गई। मां नंदा देवी का पार्श्व अवतरण हुआ- गौड़ पुजारियों और मंदिर समिति की उपस्थिति में 'दिन पट्टा' निकाला गया, जिसके साथ ही बड़ी नंदा जात की तिथियां सार्वजनिक की गईं। इस शुभ अवसर पर मां नंदा देवी का पार्श्व अवतरण हुआ, जिसके बाद परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ बड़ी जात के शुभारंभ की आधिकारिक घोषणा की गई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी- मंदिर प्रांगण में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जो इस ऐतिहासिक यात्रा के प्रति लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक है। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जो इस यात्रा के महत्व और लोकप्रियता को दर्शाता है। 5 सितंबर 2026 को शुरू होगी यात्रा- तय कार्यक्रम के अनुसार मां नंदा देवी की डोली 5 सितंबर 2026 को नंदाधाम कुरुड़ से अपनी यात्रा शुरू करेगी। विभिन्न पड़ावों से होते हुए 16 सितंबर को डोली अपने धर्म भाई के गांव वाण पहुंचेगी। बड़ी नंदा जात 20 सितंबर को अपने अंतिम पड़ाव कैलाश (होमकुंड) पहुंचेगी, जहां विधिवत धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मां नंदा देवी को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु परंपरा अनुसार जामुन डाली लौटेंगे। 2027 में यात्रा कराने पर अड़ा दूसरा पक्ष 2027 में होगा आयोजन- दूसरे पक्ष का कहना है कि यात्रा के लिए अभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी नहीं हुई हैं। राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि वर्ष 2027 की वसंत पंचमी को राजजात का दिनपट्टा जारी किया जाएगा। उन्होंने सरकार से एक वर्ष के भीतर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग भी रखी है, ताकि यात्रा को सुचारू रूप से संपन्न कराया जा सके। मनौती की छंतोली का आगमन- घोषणा से पहले गुरुवार शाम को राजकुंवर कांसुवा से मनौती की छंतोली लेकर नौटी पहुंचे थे। वसंत पंचमी के मौके पर शुक्रवार सुबह से ही नंदा देवी मंदिर नौटी में विधिवत धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो गए थे। परंपरा का निर्वहन- राजजात समिति के सचिव भुवन नौटियाल ने बताया कि वर्ष 2026 में राजजात केवल प्रस्तावित थी, जबकि परंपरा के अनुसार राजजात की घोषणा मनौती के दौरान ही की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2024 में पहला अनुष्ठान मौडवी में संपन्न हुआ था और अब दूसरा अनुष्ठान मनौती का चल रहा है। कांसुवा में पूजा-अर्चना- इससे पूर्व राजकुंवरों के गांव कांसुवा में मनौती की छंतोली की पूजा संपन्न की गई। दोपहर बाद ढोल-दमाऊं और भंकोरों की मंगल धुनों के साथ मनौती की छंतोली पैदल नौटी के लिए रवाना हुई। मनौती पूर्ण होने के बाद की घोषणा- राजजात के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि मनौती पूर्ण होने के बाद विधिवत रूप से राजजात की घोषणा की गई है और अब वर्ष 2027 में भव्य आयोजन की तैयारियां शुरू की जाएंगी। 3 प्वॉइंट्स में समझिए नौटी-कुरुड़ विवाद 12 वर्ष की परंपरा में कभी नहीं हुई यात्रा लाटू देवता के पुजारी खीम सिंह नेगी ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब राजजात यात्रा अपने तय समय से टली है। इससे पहले वर्ष 2012 में भी यात्रा प्रस्तावित थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था। 2014 में आयोजित नंदादेवी राजजात यात्रा में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी, जिसने इसे विश्व प्रसिद्ध बना दिया। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा देती है। 1843 से 2000 तक की यात्राओं के बीच 14 से 26 वर्षों का अंतराल रहा है। उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार 1843 में यात्रा आयोजित हुई, इसके बाद 1863, 1886, 1905, 1925, 1951, 1968, 1987 और फिर 2000 में राजजात यात्रा संपन्न हुई। इन सभी आयोजनों के बीच अंतराल 14 से 26 वर्षों तक रहा। इससे यह स्पष्ट होता है कि 12 वर्ष की परंपरा व्यवहार में कभी स्थापित नहीं हो पाई। अब नंदा देवी राजजात के बारे में जानिए... यह उत्तराखंड की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा है, जिसमें देवी नंदा को उनके ससुराल कैलाश भेजने के लिए लंबी पैदल यात्रा की जाती है। यात्रा करीब 280 किमी की होती है, जिसे राज्य की सबसे लंबी धार्मिक पैदल यात्रा भी कहते हैं। इसमें चौसिंगा खाडू और रिंगाल की छंतोलियां मुख्य आकर्षण होती हैं। यह देवी के मायके से कैलाश लौटने का प्रतीक मानी जाती है। यात्रा में रूपकुंड और शैल समुद्र ग्लेशियर के पास से होते हुए कैलाश (होमकुंड) तक जाया जाता है। वाण गांव के बाद चमड़े की वस्तुएं, गाजे-बाजे, महिलाएं और बच्चे आगे नहीं जाते। यह एशिया की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है, जिसमें सैकड़ों देवी-देवताओं की डोलियां और हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
Dainik Bhaskar दूषित पानी से कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष की मौत:इंदौर में मृतकों का आंकड़ा 28 पर पहुंचा; दो और मरीजों की हालत गंभीर
इंदौर में दूषित पानी से 28वीं मौत हुई है। भागीरथपुरा निवासी रिटायर्ड शिक्षक राजाराम बौरासी (75) ने रविवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बौरासी कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष भी थे। परिजन ने बताया कि राजाराम बौरासी को शुक्रवार को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। हालत बिगड़ने पर पहले स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया, लेकिन आराम नहीं मिला। इसके बाद शनिवार सुबह उन्हें सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उधर, स्वास्थ्य विभाग ने कहा- 2018-19 की एंजियोग्राफी रिपोर्ट के अनुसार राजाराम बौरासी हृदय रोग से पीड़ित थे। उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या भी थी। उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों में उल्टी-दस्त की पुष्टि नहीं होती है। फिलहाल, दूषित पानी से बीमार 10 लोग सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 4 आईसीयू में हैं। इनमें से एक महिला और एक पुरुष मरीज की स्थिति चिंताजनक है। दो दिन में दो लोगों ने तोड़ा था दम इससे पहले शुक्रवार को ही 63 साल के बद्री प्रसाद ने दम तोड़ा था। बेटे शैलेंद्र ने बताया कि उन्हें 4 जनवरी को उल्टी-दस्त के कारण एमवाय अस्पताल में एडमिट किया था। वहां चार दिन रहने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया था। 17 जनवरी को हालत खराब होने पर अरबिंदो अस्पताल ले गए। शुक्रवार दोपहर को मौत हो गई। वहीं, गुरुवार रात को विद्या बाई (82) की अरबिंदो अस्पताल में मौत हो गई थी। उनके बेटे शिवनारायण ने कहा- मां को 10 जनवरी से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। घर पर इलाज चल रहा था। मंगलवार को कमजोरी बढ़ने से वे बाथरूम जाने के दौरान गिर गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। ज्यादा उम्र और कमजोरी के कारण सर्जरी नहीं हो सकी। ऐसे में हम उन्हें घर ले आए। गुरुवार रात को फिर तबीयत बिगड़ी तो उन्हें अरबिंदो अस्पताल ले गए। जहां 2 घंटे बाद उनकी मौत हो गई। ये खबर भी पढ़ें... इंदौर में दूषित पानी ने चार बेटियों का पिता छीना इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के चलते चार बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। घर के कमाने वाले मुखिया की तबीयत दूषित पानी के कारण बिगड़ी और कुछ ही दिनों में उन्होंने दम तोड़ दिया। पिता की मौत के बाद परिवार के सामने सवाल है- अब क्या होगा। पढ़ें पूरी खबर...
Dainik Bhaskar हिमाचल में भारी बर्फबारी-680 से ज्यादा सड़कें बंद, टूरिस्ट फंसे:श्रीनगर में पारा माइनस 1.4°; यूपी के 10 जिलों में बारिश, उत्तराखंड में हिमस्खलन का अलर्ट
देश के पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और बारिश के बाद उत्तर भारत में सर्दी अचानक बढ़ गई। हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के कारण दो नेशनल हाईवे समेत 680 से ज्यादा सड़कें बंद हैं। लाहौल-स्पीती के कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान माइनस 7.2 डिग्री रहा। यहां 600 से ज्यादा पर्यटक फंसे हुए हैं। मनाली के पास 100 से ज्यादा गाड़ियां बर्फ में फंसी हैं। जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में बर्फबारी जारी है। हालांकि श्रीनगर एयरपोर्ट पर उड़ानें शुरू हो गईं। गुलमर्ग में तापमान माइनस 12 और श्रीनगर में माइनस 1.4 डिग्री दर्ज किया गया। जम्मू–श्रीनगर हाईवे समेत कई सड़कें दो दिन से बंद हैं। सेना और प्रशासन ने फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालकर खाने व रहने की व्यवस्था की। शनिवार को मध्य प्रदेश में मौसम बदल गया। सुबह कोहरा और दिन में ठंडी हवाओं से ग्वालियर-चंबल में तापमान गिरा। दतिया सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 18.6 डिग्री रहा। शनिवार को यूपी के लखनऊ, कानपुर समेत 10 जिलों में बारिश हुई। हाथरस और इटावा में ओले गिरे। बाराबंकी और एटा में बिजली गिरने से आग लग गई। रक्षा मंत्रालय के DGRE ने उत्तराखंड में बर्फबारी के कारण पांच जिलों के लिए अगले 24 घंटे में हिमस्खलन का हाई अलर्ट जारी किया है। ऊंचाई वाले इलाकों में आज शाम 5 बजे तक हिमस्खलन की चेतावनी दी गई है। राजस्थान में बीकानेर का लूणकरणसर सबसे ठंडा रहा, जहां 0.3 डिग्री दर्ज किया गया। माउंट आबू में तापमान 0.6 और जयपुर में 9.4 डिग्री सेल्सियस रहा। दिल्ली में बारिश के बाद तेज सर्दी पड़ी। साथ ही एयर क्वालिटी इंडेक्स 176 रहा, जो मॉडरेट श्रेणी में है। पंजाब के बठिंडा में तापमान 0.8 डिग्री और हरियाणा के हिसार में 1.6 डिग्री दर्ज किया गया। फरीदकोट और फिरोजपुर में भी कड़ाके की ठंड रही। चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 5.3 डिग्री रहा। देशभर में मौसम की 4 तस्वीरें... अगले 2 दिन के मौसम का हाल… 26 जनवरी 27 जनवरी
Dainik Bhaskar गोल्डन टेंपल सरोवर में कुल्ला करने की फुटेज सामने आई:युवक घूम-घूमकर वीडियो बनाता रहा, कल निहंगों ने पिटाई की, गाजियाबाद से अमृतसर लाया जाएगा
अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में कुल्ला करने वाले मुस्लिम युवक सुब्हान रंगरीज की CCTV फुटेज सामने आई हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने यह फुटेज निकाली है। जिसमें स्पष्ट दिख रहा है कि युवक गोल्डन टेंपल में माथा टेकने नहीं आया था। वह सिर्फ इंस्टाग्राम रील के लिए यहां वीडियो शूट करने के लिए आया था। इसी आधार पर SGPC ने माना कि वह गोल्डन टेंपल में बेअदबी की नीयत से आया था। जिस वजह से उसके खिलाफ अमृतसर में पुलिस को शिकायत दे दी गई है। युवक अभी गाजियाबाद पुलिस की हिरासत में है। निहंगों ने धार्मिक भावना आहत करने के आरोप में उसे पकड़ा और पिटाई करने के बाद पुलिस को सौंप दिया था। हालांकि युवक 2 बार माफी मांग चुका है लेकिन पहली बार जेब में हाथ और दूसरी बार भी उसके तरीके से सिख समुदाय ने माफी को सही नहीं माना और अब उसके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में BNS की धारा 298 के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। जानिए, 3 CCTV फुटेज में क्या दिखा... दिल्ली का रहने वाला सुब्हान रंगरीज 13 जनवरी को गोल्डन टेंपल में आया था। इसके बाद उसने सरोवर में बैठकर कुल्ला किया। उसने मुंह में पानी भरा और वहीं थूक दिया। इसके बाद वह गोल्डन टेंपल परिसर में घूमा और दूसरे साथी से वीडियो शूट कराए। SGPC ने टाइम के साथ 13 जनवरी की ये फुटेज निकाली हैं। पहली फुटेज, टाइम- 11.20 बजे सुब्हान रंगरीज गोल्डन टेंपल परिसर में दाखिल हुआ। इस दौरान उसके सिर पर टोपी पहन रखी है। गोल्डन टेंपल में एंट्री के बाद करीब 10 मिनट तक वह वहां घूमता रहा। दूसरी फुटेज, 11.30 बजे इसमें सुब्हान रंगरीज सरोवर के पास नजर आया। यहां वह नंगे पैर सरोवर में बैठा। जहां उसने कुल्ला किया। इस दौरान वह अपने एक दोस्त से वीडियो बनवाता हुआ दिख रहा है। तीसरी फुटेज, टाइम- 11:40 बजे सुब्हान रंगरीज सरोवर क्षेत्र से निकलकर निशान साहिब के पास पहुंचा। जहां उसने दोबारा वीडियो रिकॉर्ड किया। इसके बाद वह गोल्डन टेंपल के बाहर स्थित प्लाजा एरिया में गया। वहां 7 से 8 मिनट तक रुका। वीडियो बनाई और फिर परिसर से बाहर निकल गया। युवक के वीडियो को लेकर क्या एतराज हुआ इंस्टाग्राम पर एक्टिव सुब्हान रंगरीज ने गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में कुल्ला किया था। उसने पानी मुंह में लिया। इसके बाद उसने एक बार वहीं थूक दिया। इस दौरान वह वीडियो भी रिकॉर्ड करवाता रहा। इसके बाद उसने गोल्डन टेंपल की तरफ उंगली भी उठाई। फिर उसने ही ये वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर डाल दिया। जिसमें उसने खुद को मुस्लिम शेर बताया। उसका ये वीडियो वायरल हो गया। जिस पर सिख श्रद्धालुओं ने कड़ा एतराज जताया कि पवित्र सरोवर में थूककर उसने धार्मिक भावना आहत की है। इसके अलावा वह गोल्डन टेंपल की तरफ उंगली भी दिखा रहा है। इसके बाद SGPC ने इस पर कड़ा एतराज जताया। 2 बार माफी मांगी लेकिन तरीके पर सवाल उठे पहली बार माफी मांगते वक्त हाथ जेब में डाले हुए थे सुब्हान रंगरीज ने पहली बार वीडियो जारी कर कहा- भाइयों, मैं 3 दिन पहले श्री दरबार साहिब गया था। बचपन से मैं वहां जाना चाहता था। मुझे वहां की मर्यादा के बारे में नहीं पता था। मैंने सरोवर के पानी से वजू किया था, धोखे से मेरे मुंह से पानी निकलकर उसमें गिर गया। मैं सारे पंजाबी भाइयों से सॉरी बोलता हूं। मैं वहां आकर भी सॉरी बाेलूंगा। मैं पूरी सिख कम्युनिटी को सॉरी बोलता हूं। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। हालांकि इस दौरान उसने हाथ जेब में डाले हुए थे। जिसे सिख समुदाय ने सही नहीं माना। दूसरी बार एक बार ही हाथ जोड़ा इसके बाद युवक सुब्हान रंगरीज ने 17 सेकेंड का नया वीडियो जारी किया। इसमें उसने कहा- जब मैं दरबार साहिब गया था, तब मुझसे एक बड़ी गलती हो गई। यह गलती भूलवश हुई थी। मुझे वहां की मर्यादा की पूरी जानकारी नहीं थी, नहीं तो मैं ऐसी गलती कभी नहीं करता। आप मुझे अपना बेटा समझकर, अपना भाई समझकर माफ कर दीजिए। इस दौरान उसने एक बार हाथ भी जोड़ा। वीडियो के ऊपर भी उसने सॉरी दिल से लिखा हुआ था। ***************** ये खबर भी पढ़ें... गोल्डन टेंपल सरोवर में कुल्ला करने वाले की पिटाई:गाजियाबाद में निहंगों ने घेरा, पुलिस ने हिरासत में लिया अमृतसर में गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में कुल्ला करने वाले मुस्लिम युवक की शनिवार को गाजियाबाद में निहंगों ने पिटाई कर दी। वह निहंग विक्की थॉमस के साथ वीडियो में नजर आया। इस दौरान उसके साथ बैठे ही किसी निहंग ने उसे थप्पड़ जड़ा। इसके बाद कुल्ला करने वाला और उसका वीडियो बनाने वाला यानी दोनों युवक माफी भी मांगते हुए नजर आए। पूरी खबर पढ़ें...
Dainik Bhaskar 7 वर्षीय भाई ने खोला बहन के मर्डर का राज:फरीदाबाद में मां को बताया- गिनती न लिखने पर पापा ने पीटा, जमीन पर पटका
फरीदाबाद में साढ़े 4 साल की वंशिका के मर्डर का राज उसके ही 7 साल के भाई ने खोला। भाई ने अपनी मां को बताया कि बहन 50 तक उल्टी गिनती नहीं लिख पाई, जिसके बाद पिता ने बेलन से उसकी जमकर पिटाई की। सिर जमीन पर पटक कर मारा। इस पिटाई के बाद पति ने पत्नी को कहा था कि बच्ची सीढ़ियों से गिर गई।, जिससे उसकी मौत हो गई। पत्नी सच भी मान बैठी थी, लेकिन 7 साल के बेटे ने सारा राज खोल दिया। उसी के बाद पत्नी ने पति के खिलाफ सेक्टर-58 थाने में शिकायत दी। आरोपी पिता ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने 1 दिन के रिमांड के बाद आरोपी को जेल भेज दिया है। दूसरी तरफ महिला अपने बेटे को लेकर किराये का मकान छोड़कर चली गई। सिलसिलेवार पढ़ें क्या है पूरा मामला.... पति नाइट तो पत्नी डे शिफ्ट में काम करती थी सेक्टर 58 थाना पुलिस के अनुसार, यह घटना झाड़सेतली गांव में हुई। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले का रहने वाला कृष्ण जयसवाल (31) अपनी पत्नी रंजीता और तीन बच्चों के साथ यहां किराए पर रहता था। कृष्ण और रंजीता दोनों एक निजी कंपनी में हेल्पर के तौर पर काम करते हैं। कृष्ण रात की शिफ्ट में काम करता है, जबकि रंजीता दिन की शिफ्ट में। इस वजह से, जब एक काम पर जाता था, तो दूसरा घर पर रहकर बच्चों की देखभाल करता था। उनके सबसे बड़े बेटे की उम्र लगभग 7 साल है, दूसरी बेटी वंशिका साढ़े 4 साल की थी, और सबसे छोटी बच्ची 2 साल की है। 21 जनवरी को नशे की हालत में पीटा आरोपी कृष्ण जयसवाल नशे का आदी था। 21 जनवरी को कमरे में उसका बेटा और मंझली बेटी वंशिका घर पर थे, जबकि सबसे छोटी बेटी पड़ोसियों के पास थी। कमरे का दरवाजा बंद था। कृष्ण अपनी बेटी वंशिका से 1 से 50 तक गिनती लिखवा रहा था, और वह भी उल्टी गिनती लिखने के लिए कह रहा था। जब वंशिका गिनती नहीं लिख पाई, तो वह गुस्से में आ गया और उसने बच्ची को बेलन से पीटना शुरू कर दिया। उसने बच्ची को फर्श पर भी पटक दिया। बच्ची के बेहोश होने पर वह उसको गोद में उठाकर बेटे के साथ सरकारी अस्पताल में पहुंचा। इसी दौरान उसने अपनी पत्नी को भी कॉल करके अस्पताल में बुला लिया। अस्पताल में डाक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। पत्नी को झूठ बोला-बेटी सीढ़ियों से गिर गई कृष्ण की पत्नी रंजीता जब अस्पताल पहुंची तो उसने झूठ बोला। कहा- बच्ची सीढ़ियों से गिर गई। पत्नी इसी को सच मान रही थी। कुछ देर में ही 7 साल के बेटे ने बताया कि पापा ने बहन को बेलन से पीटा और जमीन पर सिर देकर मारा। इसके बाद रंजीता ने बच्ची के शरीर को देखा तो उसको चोट के निशान मिले। जिसके बाद उसने पुलिस को सूचना देकर कृष्ण को पकड़वा दिया। सख्ती से पूछताछ में जुर्म कबूला पुलिस ने शिकायत पर कृष्ण को हिरासत में ले लिया। जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने बच्ची को पीटने की बात कबूल की। उसने बताया कि बेटी स्कूल नहीं जाती थी, इसलिए घर पर ही वह उसे पढ़ाता था। गिनती न लिख पाने के कारण गुस्से में उसने बेटी को ज्यादा पीट दिया, जिसमें उसकी मौत हो गई। रिमांड के बाद जेल भेजा पिता पुलिस के अनुसार बच्ची की मां अपने दोनों बच्चों के साथ वापस यूपी अपने घर जा चुकी है। सेक्टर 58 थाना इंचार्ज आजाद सिंह ने बताया कि आरोपी पिता को पुलिस ने एक दिन के रिमांड पर लिया था। जिसको पूरा करने के बाद उसको जेल भेज दिया गया है।
Dainik Bhaskar पानीपत BJP सचिव का रिश्वत लेने का VIDEO:ड्रेन में केमिकल डालने की एवज में लिए 5 हजार; मामला थाने तक पहुंचा तो लौटाई रकम
पानीपत जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिला सचिव का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कथित रूप से 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि ड्रेन में अवैध रूप से केमिकल वाला पानी डालने की एवज में यह पैसे लिए। वीडियो वायरल होने के बाद सियासी गलियारों में खलबली मच गई। इसके बाद मामले की शिकायत और वीडियो पुलिस तक भी पहुंच गया। बताया जा रहा है कि मामला बढ़ता देख भाजपा सचिव रविंद्र रावल ने पैसे लौटा दिए। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में रविंद्र रावल ने कहा- मेरे खिलाफ साजिश रची गई है। राजनीति में मेरी टांग खिंचाई की जा रही है। उन वीडियो को भी तरोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। असल बात ये है कि इन ट्रैक्टर चालकों से मेरा बहुत पुराना लेन-देन है। उस दिन इन्होंने मुझे कॉल कर पैसे देने के लिए बुलाया था। मैंने इन्हें ड्रेन में केमिकल युक्त पानी डालते पकड़ लिया था। इसी के बाद इन्होंने ये कहानी बना दी है। मैं जल्द ही इनके खिलाफ एक्शन लूंगा। यहां पढ़िए, क्या है पूरा मामला... SHO बोले- थाने तक पहुंचे लोग, लेकिन शिकायत नहीं मिली बापौली थाना प्रभारी वीरेंद्र ने बताया कि दोनों पक्ष थाने तक जरूर पहुंचे थे, लेकिन मामले की शिकायत नहीं दी गई है। अगर अभी भी हमारे पास कोई शिकायत आ जाए, तो हम निश्चित तौर पर जांच-पड़ताल कर कार्रवाई अमल में लाएंगे। हमें भी मामला वायरल हो रही वीडियो के माध्यम से पता लगा था। -------------------प्रदूषण कैसे और क्यों फल-फूल रहा? स्लाइड---------------- गंदे पानी से क्या नुकसान होगा जानिए..... भूजल प्रदूषण, बीमारियों का खतरा केमिकल ड्रेन के माध्यम से रसायन ज़मीन के अंदर रिस रहे हैं, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों का पीने का पानी जहरीला हो गया है। हैंडपंपों से अब रंगीन और बदबूदार पानी निकल रहा है। ड्रेन के पास बसे गांवों, जैसे भलौर, बापौली और सनौली, में कैंसर, किडनी फेलियर, लीवर की बीमारियां और गंभीर चर्म रोगों के मामले बढ़ने की आशंका बनी हुई है। खेती और पशुओं पर असर इसी ड्रेन के पानी का अनजाने में सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल हो रहा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं और जमीन की उपजाऊ शक्ति खत्म हो रही है। जहरीला पानी पीने से ग्रामीणों के मवेशी आए दिन मर रहे हैं।
Dainik Bhaskar वचन निभाने राखी बहनों के घर पहुंचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री:आधे घंटे तक रुके और चाय पी, कोटा क्रिकेट ग्राउंड पर चौके-छक्के लगाए
बागेश्वर धाम (MP) के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री 24 जनवरी (शनिवार) की देर रात करीब एक बजे अपने भक्त (राखी बहनों) के घर चाय पीने पहुंचे। कोटा के रामगंजमंडी इलाके में करीब आधा घंटा रुके थे। इस दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी साथ थे। इससे पहले धीरेंद्र शास्त्री रात करीब 12 बजे मोड़क स्थित ग्राउंड पर क्रिकेट खेला और चौके-छक्के लगाए। पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा 23 जनवरी से रामगंज मंडी (कोटा) इलाके के मोड़क के गुणदी गांव में चल रही है। आज (रविवार) कथा का समापन होगा। श्रीराम कथा के पहले दिन राखी बांधी थी श्रीराम कथा के पहले दिन (23 जनवरी) भावना और खुशबू राठौर ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई बनाने की इच्छा जताई थी। दोनों बहनों ने राखी भी बांधी थी। दोनों लड़कियों ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री से घर आने का न्योता दिया था। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि वे तीन दिन रामगंज मंडी में हैं। उनके घर चाय पीने जरूर आएंगे। खुशबू सरकारी टीचर है और छोटी बहन भावना ने नीट का पेपर दिया है। भावना ने एसटीसी भी कर रखी है। बहनों से वादा निभाया आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने बहनों से किया हुआ वायदा निभाया। शनिवार देर रात करीब एक बजे रामगंज मंडी के वार्ड नंबर 3 की इंद्रप्रस्थ कॉलोनी स्थित भावना और खुशबू राठौर के घर पहुंचे। धीरेंद्र शास्त्री को घर में देख भावना और खुशबू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दोनों बहनों की आंखों से खुशियों के आंसू निकल आए। धीरेंद्र शास्त्री को भाई बनाना चाहती थीं भावना ने कहा- मुझे विश्वास था, मेरे भाई मेरे घर चाय पीने जरूर आएंगे। अपना किया हुआ वादा पूरा करेंगे। भावना ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को बताया था कि वे दोनों बहने हैं। उनका कोई भाई नहीं है। इसलिए वह आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को राखी बांधकर अपना भाई बनना चाहती थीं। उन्होंने कई बार प्रयास किया लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। रामगंज मंडी में जब कथा करने आचार्य शास्त्री पहुंचे तो दोनों बहनों ने ठान ली कि वह अब अपनी इच्छा पूरी करके रहेंगी। आखिरकार वो आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई बनाने और घर पर बुलाकर चाय पिलाने में सफल रहीं। पिता बोले- बेटियों का सपना पूरा हुआ दोनों बहनों के पिता लालचंद राठौर और माता हेमलता राठौर ने आचार्य को बताया कि दोनों बेटियां अक्सर उनसे ऐसी बातें किया करती थीं। परंतु उनको विश्वास नहीं होता था। कई बार बेटी को समझाया भी कि यह संभव नहीं है। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री कभी भी उसके घर चाय पीने नहीं आएंगे। बागेश्वर धाम सरकार का आशीर्वाद है कि बेटियों का सपना पूरा हुआ और आज स्वयं आप भगवान के रूप में हमारे घर पधारे हैं। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने खुशबू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि आज से हम तुम्हारे भाई हैं। भाई की कमी कभी महसूस मत करना। बागेश्वर धाम आने का न्योता दिया आचार्य धीरेंद्र शास्त्री करीब आधा घंटा इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में रुके। उन्होंने चाय पी। खुशबू और भावना के माता-पिता और वहां उपस्थित भक्तों का हालचाल जाना। घर से विदा होने से पहले दोनों बहनों को बागेश्वर धाम आने का निमंत्रण दिया। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने भावना व खुशबू के पिता लालचंद्र राठौर को बागेश्वर धाम की तरफ से एक कूपन भी दिया। आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के साथ शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर भी मौजूद रहे। पहले शिक्षा मंत्री के घर पहुंचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री शनिवार रात करीब 9 बजे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कोटा के रंगबाड़ी स्थित आवास पहुंचे थे। यहां से करीब 10 बजे बोरखेड़ा इलाके में पहुंचे और भक्तों से संवाद किया। रात करीब 12 बजे मोड़क स्थित मंगलम सीमेंट फैक्ट्री के ग्राउंड पहुंचे। यहां उन्होंने भक्तों के साथ 30 से 45 मिनट तक क्रिकेट खेला था। यहां मनोज जैन, कमल जैन के बुलावे पर पहुंचे थे। बहनों के बुलावे पर आधी रात के बाद घर आए क्रिकेट खेलने के बाद धीरेंद्र शास्त्री रामगंज मंडी के लिए रवाना हुए। इसी इलाके के इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में रात करीब 1 बजे भावना और खुशबू के घर पहुंचे थे।
Dainik Bhaskar खबर हटके- पति के अफेयर पर पत्नी मांग रही माफी:अब मर्द भी गर्भनिरोधक दवा खाएंगे; शादी में दोस्त नहीं आए तो नौकरी छोड़ी
एक महिला को पति के अफेयर का खुलासा करने के कारण 15 दिनों तक उससे माफी मांगने की सजा मिली है। वहीं दुल्हन ने शादी में ऑफिस के दोस्तों के नहीं आने पर नौकरी छोड़ दी। इधर एक लड़के ने गर्लफ्रेंड की फरमाइशें पूरी करने के लिए 8 करोड़ की चोरी की। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
Dainik Bhaskar टियर-2 और टियर-3 शहर नए जॉब हब:मेट्रो सिटी से डेढ़ गुना ज्यादा वैकेंसी, इस साल देश में 1.28 करोड़ नौकरियां बनने की उम्मीद
भारत में नौकरियों की लहर मेट्रो सिटी से बाहर इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में दिख रही है। टियर-2 और 3 शहरों में भर्ती की रफ्तार 20% तक हो गई है, जबकि मेट्रो सिटी में यह 14% रही। लीडिंग जॉब्स एंड टैलेंट प्लेटफॉर्म फाउंडइट के मुताबिक, इस साल 1.28 करोड़ संभावित नौकरियों के साथ छोटे शहरों में हायरिंग तेजी से बढ़ रही है। अपग्रेड रिक्रूट की रिपोर्ट के मुताबिक AI और बेहतर स्थिरता के कारण कंपनियां छोटे शहरों में ‘रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर’ बना रही हैं। 2027 तक एआई एक्सपोजर वाले टेक रोल्स 20% से बढ़कर 32% तक पहुंच सकते हैं। वहीं, 79% एचआर लीडर्स मानते हैं कि छोटे शहरों में टैलेंट के जॉब में ‘टिके रहने की दर’ मेट्रो के बराबर या उससे बेहतर है। वित्त वर्ष 2024 में इन शहरों का टेक हायरिंग में हिस्सा 12% था जो 2027 तक 19.7% पहुंच सकता है। कंपनियां इन शहरों में इंजीनियरिंग, सपोर्ट, डेटा एनालिटिक्स, बैकएंड ऑपरेशंस जैसी भूमिका को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर्स बन रहे, छोटे शहरों में हाइटेक नौकरियां बढ़ रहीं कंपनियां कम लागत और व्यापक टैलेंट पूल के लिए टियर-2 शहरों में टैलेंट हब्स तैयार कर रही हैं। इससे भर्ती महानगरों से बाहर फैल रही है। बड़े शहरों में लोग जल्दी-जल्दी नौकरियां बदलते हैं, जबकि छोटे शहरों में कर्मचारी लंबे समय तक टिकते हैं। अपग्रेड रिक्रूट ने टियर-2,3 शहरों से आने वाले प्लेसमेंट मैंडेट्स में 40% वृद्धि देखी है। एक साल में यहां एआई इंजीनियर्स, डेटा एनालिस्ट और ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट की मांग 40% बढ़ी है-खासकर बीएफएसआई, आईटी सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में। अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी, कोयंबटूर, कोच्चि, इंदौर और लखनऊ जैसे शहर अब एआई-संबंधित हायरिंग मैंडेट्स के लगभग एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करते हैं। जॉब मार्केट 9 पॉइंट्स में जाने आखिर छोटे शहर क्यों बन रहे जॉब हब? ----------- ये खबर भी पढ़ें…
Dainik Bhaskar जस्टिस उज्जल भुइयां बोले–जजों का तबादला न्यायपालिका का आंतरिक मामला:सरकार के खिलाफ फैसला देने पर ट्रांसफर ठीक नहीं, संविधान सर्वोच्च है
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने शुक्रवार को कहा कि जजों का ट्रांफर न्यायपालिका का आंतरिक मामला है। इसमें सरकार या केंद्र की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ फैसले देने वाले जजों का तबादला करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हस्तक्षेप है। जस्टिस भुइयां ने पुणे के ILS लॉ कॉलेज में प्रिंसिपल जी.वी. पंडित मेमोरियल लेक्चर के दौरान ये बाते कही। जस्टिस भुइयां की स्पीच की तीन बड़ी बातें... सरकार के पुनर्विचार के बाद जस्टिस श्रीधरन का ट्रांसफर बदला गया अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन का ट्रांसफर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बदलकर इलाहाबाद हाई कोर्ट करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम के बयान में यह दर्ज था कि यह बदलाव केंद्र सरकार के पुनर्विचार अनुरोध के बाद किया गया। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जस्टिस श्रीधरन सीनियरिटी के आधार पर कॉलेजियम का हिस्सा बनते, जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट में उनकी सीनियरिटी काफी नीचे थी। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि जस्टिस श्रीधरन की पहचान एक स्वतंत्र जज के रूप में रही है, जिनमें BJP मंत्री विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई टिप्पणी के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर FIR दर्ज करने का आदेश शामिल है। -------------- ये खबर भी पढ़ें… CJI अटैक मामला, आरोपी वकील की बार एसोसिएशन मेंबरशिप खत्म:बेंगलुरु में FIR; चीफ जस्टिस बोले- हम हैरान थे, लेकिन अब यह बीती बात है सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने गुरुवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई पर हमले की कोशिश करने वाले वकील राकेश किशोर (71) की मेंबरशिप तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी। SCBA ने कहा कि वकील का व्यवहार पेशेवर नैतिकता, शिष्टाचार और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा का गंभीर उल्लंघन है। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar बंगाल SIR,EC ने गड़बड़ी वाले 1.25 करोड़ नाम सार्वजनिक किए:पंचायत-ब्लॉक ऑफिस में चिपकाई जाएगी लिस्ट, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- जांच पारदर्शी रहे
SC के आदेश पर चुनाव आयोग ने SIR की लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट वेबसाइट पर डाली, पंचायत-ब्लॉक और वार्ड दफ्तरों में चस्पा होगी चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार SIR के तहत ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ लिस्ट में शामिल मतदाताओं के नाम शनिवार को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिए। अब यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और नगर वार्ड दफ्तरों में चिपकाई जाएगी। मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है। बाकी राज्यों में इसे जल्द लागू किया जाएगा। 19 जनवरी को SC ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस वाले 1.25 करोड़ वोटर्स को लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन को लेकर चुनाव आयोग असमंजस में था, क्योंकि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को जरूरी सॉफ्टवेयर शुक्रवार देर रात तक नहीं मिल पाया था। चुनाव आयुक्त बोले- बाकी राज्यों में भी जल्द लागू होगा SIR मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR फिलहाल 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सुचारू रूप से चल रहा है। बाकी राज्यों में भी इसे जल्द लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। बिहार में SIR पर एक भी अपील नहीं CEC के मुताबिक बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम मतदाता सूची के खिलाफ एक भी अपील दर्ज नहीं हुई। इसी आधार पर हुए चुनावों में 67.13% मतदान हुआ, जबकि महिलाओं की भागीदारी 71.78% रही। अभिषेक बनर्जी का आरोप- लिस्ट जारी करने में जानबूझकर देरी इधर तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने शनिवार शाम को कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आयोग के अपने पत्र के बावजूद 24 जनवरी तक सभी ग्राम पंचायतों और नगर वार्डों में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची प्रकाशित नहीं की गई। जिस सॉफ्टवेयर ने 7 करोड़ से ज्यादा फॉर्म का विश्लेषण कर एक घंटे में गड़बड़ियां पकड़ लीं, वही अब सूची जारी करने में धीमा पड़ गया है। क्या देरी जानबूझकर की जा रही है? ---------- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल SIR,गड़बड़ी वाले 1.25 करोड़ नाम सार्वजनिक करने का निर्देश:सुप्रीम कोर्ट बोला- जांच पारदर्शी रहे, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। कहा कि वे 10 दिन में अपने डॉक्यूमेंट्स चुनाव आयोग को पेश करें। चुनाव आयोग ने राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान नाम, सरनेम, आयु में गड़बड़ी की वजह 1.25 करोड़ वोटर्स को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar सदानंद सरस्वती बोले-कौन शंकराचार्य है, यह प्रशासन तय नहीं करेगा:माघ मेले में संतों को गंगा स्नान से रोकने पर भड़के; कहा-यह परंपरा गुरु-शिष्य आधारित
माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर धार्मिक हलकों में नाराजगी तेज हो गई है। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी प्रशासन को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं। शनिवार को नरसिंहपुर में मुक्तानंद संस्कृत पाठशाला के जीर्णोद्धार समारोह में पहुंचे शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य परंपरा गुरु-शिष्य प्रणाली पर आधारित है, न कि प्रशासनिक आदेशों पर। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शृंगेरी पीठ में विधिवत अभिषेक हो चुका है, जिसमें वे स्वयं साक्षी रहे हैं। प्रशासन का हस्तक्षेप करना सही नहीं शंकराचार्य ने कहा कि उनके गुरु ने केवल दो ब्रह्मचारियों को संन्यास प्रदान किया—एक वे स्वयं और दूसरे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती—जिससे उनकी वैधता स्वतः सिद्ध होती है। ऐसे में प्रशासन द्वारा पहचान पर सवाल खड़े करना धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप है। सत्ता कभी भी स्थायी नहीं होती माघ मेले की घटना को निंदनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि गंगा स्नान से किसी भी साधु-संत या ब्राह्मण बालक को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और सत्ता के अहंकार में किए गए कार्य समाज में निंदा का कारण बनते हैं। प्रजा की भावना का सम्मान करें सभी शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने लोकतंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की व्यवस्था में जनप्रतिनिधि जनता के मत से चुने जाते हैं, इसलिए उनका कर्तव्य है कि वे प्रजा की भावना और देश की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि सरकारों का काम धार्मिक विरासत में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि उसका संरक्षण करना है।
Dainik Bhaskar खड़गे बोले- केंद्र सरकार राज्यपालों को कठपुतली बना रही:गवर्नर गैर-बीजेपी सरकारों को परेशान करते हैं, उन्हें पीएम ऑफिस से ऑर्डर मिल रहे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को कहा कि PM ऑफिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय गवर्नरों को निर्देश दे रहे हैं। खड़गे ने भाजपा सरकार पर कांग्रेस की सत्ता वाले और दूसरी गैर-BJP राज्य सरकारों को परेशान करने के लिए गवर्नरों को कठपुतली बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कर्नाटक के हुबली में एक जनसभा के दौरान लोगों से आने वाले सभी चुनावों में BJP के खिलाफ वोट करने की अपील की और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर तानाशाही शासन आ सकता है। खड़गे ने कहा कि राज्यपालों को कहा जाता है कि वे सिद्धारमैया या कांग्रेस सरकार द्वारा तैयार भाषण विधानसभा के जॉइंट सेशन में न पढ़ें। उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ कर्नाटक में ही नहीं हुआ, बल्कि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भी हुआ है। जहां-जहां कांग्रेस या गैर-बीजेपी सरकारें हैं, वहां राज्यपाल परेशानियां खड़ी कर रहे हैं। राज्यपाल निजी तौर पर मानते हैं कि उन्हें ऊपर से आदेश मिलते हैं। दरअसल 22 जनवरी को कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने संयुक्त सत्र में सरकार का तैयार भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया और अपना भाषण सिर्फ तीन पंक्तियों में खत्म किया। इस पर कांग्रेस सरकार ने कड़ा विरोध जताया। यह हाल के दिनों में गैर-बीजेपी शासित दक्षिणी राज्यों में राज्यपाल और सरकार के बीच तीसरा टकराव है; इससे पहले केरल और तमिलनाडु में भी ऐसे मामले हो चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष बोले- देश में हिटलर राज आएगा उन्होंने आरोप लगाया, "BJP को पावर से हटाने के लिए, आने वाले सभी चुनावों में, चाहे छोटे हों या बड़े, BJP के खिलाफ वोट करें। तभी गरीब, मिडिल क्लास, छोटे काम करने वाले लोग बच पाएंगे, नहीं तो इस देश में हिटलर, मुसोलिनी, सद्दाम हुसैन जैसा राज आएगा। आ गया है। उन्होंने पूछा- मोदी सरकार ने देश के लिए क्या किया है? BJP ने कांग्रेस, नेहरू, इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बुराई करने के अलावा कुछ नहीं किया है। खड़गे बोले- सरकार मनरेगा की जगह कमजोर कानून लाई राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने केंद्र सरकार पर मनरेगा (MGNREGA) एक्ट को खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोगों को अधिकार देने वाले कानून बनाए थे, जबकि मोदी सरकार ऐसे कानून ला रही है जो लोगों के अधिकार कम करते हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत गरीबों को काम का अधिकार मिला था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे छीनकर उसकी जगह कमजोर कानून ला दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विरोध नहीं हुआ, तो सरकार गरीबों से जुड़ी कई योजनाएं भी खत्म कर देगी। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें... कर्नाटक राज्यपाल ने विधानसभा में अभिभाषण की 3 लाइन पढ़ीं, सदन छोड़कर निकले, मनरेगा के जिक्र पर आपत्ति कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 22 जनवरी को राज्य विधानमंडल के जॉइंट सेशन को संबोधित किया। उन्होंने सरकार के तैयार भाषण की केवल तीन लाइन ही पढ़ीं और सदन से बाहर चले गए। एक दिन पहले राज्यपाल ने सेशन संबोधित करने से इनकार किया था। पूरी खबर पढ़ें...
Dainik Bhaskar जुबीन गर्ग के परिवार ने PM को लेटर लिखा:मामले में तेजी से सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट की मांग, सिंगर की मौत सिंगापुर में हुई थी
असम के सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले में उनके परिवार ने शनिवार (24 सितंबर) को PM नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा। लेटर में मांग की है कि सिंगर की मौत के मामले में तेजी से सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट बनाई जाए। परिवार ने यह भी मांग की है कि सजा मिलने तक केस में किसी भी आरोपी को जमानत न दी जाए। साथ ही सिंगापुर में जांच पर भी निगरानी रखी जाए। जुबीन की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के समुद्र में तैराकी के दौरान हुई थी। जुबीन वहां नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में शामिल होने गए थे। लेटर पर जुबीन की पत्नी गरिमा, बहन पाल्मी बोरठाकुर और चाचा मनोज बोरठाकुर के दस्तखत हैं। असम पुलिस इस मामले में 12 दिसंबर 2025 को ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसमें साल लोगों को आरोपी बनाया गया है। लेटर में ये मांगे भी शामिल सिंगापुर की जांच में किसी साजिश की बात नहीं सिंगापुर में स्थानीय एजेंसियां भी वहां अलग जांच कर रही है। वहां की कोरोनर कोर्ट ने हाल ही में किसी साजिश की आशंका से इनकार करते हुए कहा कि जुबीन गर्ग अत्यधिक नशे में थे और लाइफ जैकेट पहनने से इनकार करने के बाद लाजरस आइलैंड के पास समुद्र में डूब गए। ------------------- ये खबर भी पढ़ें: असम का कमरकुची बना सिंगर जुबीन का स्मारक स्थल:गांव में हर रोज 5 से 10 हजार लोग पहुंच रहे; अबतक 5 लाख गमछे चढ़े सिंगर जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर को सिंगापुर में डूबने से हो गई थी। 23 सितंबर को सोनापुर जिले के कमरकुची में उनका अंतिम संस्कार हुआ था। गुवाहाटी से 31 किमी दूर इस गांव में 10 बीघा के करीब जमीन को जुबीन का 'देवालय' सा मान लिया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
Dainik Bhaskar पति-पत्नी के विवाद ने रोकी दिल्ली की बिजली:पति ने नहीं दिए ₹250, गुस्से में पत्नी हाईटेंशन टॉवर पर चढ़ी, 3 घंटे बंद रही लाइन
सिंगरौली के झारा गांव में शनिवार को उस समय अफरा तफरी मच गई, जब एक महिला 200 फीट ऊंचे हाईटेंशन बिजली टॉवर पर चढ़ गई। घटना की सूचना मिलते ही सरई थाना पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और बिजली विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए एनटीपीसी की 36 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन बंद कराई गई, जिससे दिल्ली जाने वाली बिजली सप्लाई करीब तीन घंटे तक प्रभावित रही। सरई थाना पुलिस की जांच में सामने आया है कि महिला का पति गुजरात में प्राइवेट नौकरी करता है और वहीं रहता है। दोपहर करीब 3 बजे महिला पति को बिना बताए झारा गांव का मेला देखने पहुंची थी। मेले में उसने नाव झूला झूलने के लिए पति को फोन कर 250 रुपए मांगे। फोन पर बातचीत के दौरान पति इस बात पर नाराज हो गया कि वह बिना बताए मेला देखने क्यों आई। आरोप है कि पति ने गुस्से में महिला से दोबारा सामने नहीं आने की बात कह दी। इससे आहत होकर महिला ने पास लगे हाईटेंशन बिजली टॉवर पर चढ़कर हंगामा शुरू कर दिया। तस्वीरों में देखिए पूरा घटनाक्रम तीन घंटे की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित नीचे उतारा प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार महिला से बातचीत कर उसे समझाया। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। सरई एसडीएम धर्म मिश्रा ने बताया कि प्रशासनिक प्रयासों से स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लिया गया है। महिला से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि महिला की काउंसलिंग की जा रही है। .............................................. यह खबर भी देखें शादी की जिद पर अड़ा प्रेमी युवक टावर पर चढ़ा सिंगरौली के देवसर थाना क्षेत्र के धनहा गांव में शुक्रवार को एक युवक प्रेम प्रसंग के चलते मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक ने मांग कि जब तक उसकी प्रेमिका मौके पर आकर उससे शादी के लिए सहमति नहीं देती, वह नीचे नहीं उतरेगा। इस घटना के बाद टावर के नीचे ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। हालांकि पुलिस की समझाइश के बाद युवक 5 घंटे बाद टावर से नीचे उतर गया। पढ़ें पूरी खबर
Dainik Bhaskar राहुल बोले- चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं:वोट चोरी की साजिश में शामिल; दावा- गुजरात SIR में गड़बड़ी, कांग्रेस का वोटर काटा गया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘जहां-जहां SIR है, वहां-वहां वोट चोरी है। SIR अब एक व्यक्ति, एक वोट के संवैधानिक अधिकार को नष्ट करने का हथियार बन चुका है, जिससे सत्ता का फैसला जनता नहीं भाजपा करे। उन्होंनें शनिवार को X पोस्ट में लिखा- गुजरात में SIR के नाम पर जो किया जा रहा है, वह एक सुनियोजित, संगठित और रणनीतिक वोट चोरी है। चुनाव आयोग इस वोट चोरी की साजिश में प्रमुख सहभागी है। राहुल ने दावा किया कि कांग्रेस को समर्थन देने वाले खास समुदायों और बूथों से चुन-चुनकर वोट हटाए गए। जहां-जहां भाजपा को हार का अंदेशा होता है, वहां मतदाताओं को सिस्टम से ही गायब कर दिया जाता है। राहुल की पोस्ट गुजरात कांग्रेस की X पोस्ट पर आई है। इसमें कहा गया कि राहुल गांधी ने वोटों में हेराफेरी को उजागर किया। इसके बाद से भाजपा ने चुनाव में धांधली का ‘नेक्स्ट लेवल मॉडल’ अपना लिया है। राहुल बोले- SIR थोपा गया राहुल ने दावा किया कि कर्नाटक के आलंद में भी यही पैटर्न दिखा है। यही महाराष्ट्र के राजुरा में हुआ। अब यही ब्लूप्रिंट गुजरात, राजस्थान और हर उस राज्य में लागू किया जा रहा है। जहां SIR थोपा गया है। SIR को एक व्यक्ति, एक वोट के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के हथियार में बदल दिया गया है। पहले देखिए गुजरात कांग्रेस की पोस्ट की तस्वीरें… गुजरात कांग्रेस का दावा है कि नियमों के तहत SIR के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की। जनता से आपत्तियां दर्ज कराने का कहा। इसकी लास्ट डेट 18 जनवरी तय की गई थी। 15 जनवरी तक कुछ ही आपत्तियां आईं, लेकिन इसके बाद अचानक लाखों आपत्तियां (फॉर्म-7) दाखिल की गईं। जब चुनाव आयोग ने 12 लाख आपत्तियों का आंकड़ा जारी किया, तो यह साफ हो गया कि नियमों का उल्लंघन करते हुए खास जातियों, समुदायों और क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है। एक ही व्यक्ति के नाम से अलग-अलग नामों और हस्ताक्षरों के साथ दर्जनों आपत्तियां दाखिल की गईं हैं, जबकि चुनाव आयोग एक मूक दर्शक बना रहा। कांग्रेस का आरोप है कि कांग्रेस ने आपत्तियों से जुड़ी जानकारी मांगते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इससे चुनावी धांधली पूरी तरह उजागर हो जाती है। चुनाव आयोग ने अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही सत्तारूढ़ दल के पास गिरवी रख दी है। …………………. SIR से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. प.बंगाल की फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख बदल सकती है: EC बोला- 14 फरवरी तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक काम पूरा होना मुश्किल पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समय-सीमा बढ़ाई जा सकती है। चुनाव आयोग 14 जनवरी को जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख बढ़ाने पर विचार कर रहा है। आयोग ने सुनवाई की अंतिम तारीख 7 फरवरी और फाइनल वोटर लिस्ट की अंतिम तारीख 14 फरवरी तय की थी। EC अधिकारी ने कहा- लोकल लेवल पर लिस्ट लगाना, हर वोटर को रसीद देना लंबी प्रोसेस है। जल्दबाजी नहीं कर सकते। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar हवा में थी फ्लाइट,यात्री ने खोला इमरजेंसी फ्लैप स्विच:कोलकाता से जयपुर आ रहे इंडिगो के विमान में मचा हड़कंप; पायलट ने कराई सुरक्षित लैंडिंग
कोलकाता से जयपुर आ रही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब उड़ान के दौरान एक पैसेंजर ने एयरक्राफ्ट का इमरजेंसी फ्लैप स्विच खोल दिया। इस हरकत के चलते फ्लाइट में अचानक इमरजेंसी अलार्म बजने लगा और पायलट के कॉकपिट में इमरजेंसी से जुड़ा अलर्ट मैसेज पहुंच गया। हालांकि, क्रू की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। फ्लाइट जैसे ही जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड हुई, वहां पहले से अलर्ट सुरक्षा एजेंसियों ने यात्री को हिरासत में ले लिया। जांच के बाद यात्री को एयरपोर्ट थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। कोलकाता से जयपुर के लिए भरी थी उड़ान दरअसल, इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-114 बीती रात को कोलकाता से उड़ान भरकर जयपुर के लिए आ रही थी। उड़ान के दौरान चेतन नाम के पैसेंजर ने बिना किसी कारण के एयरक्राफ्ट का फ्लैप स्विच खोल दिया। जैसे ही स्विच खुला, एयरक्राफ्ट के भीतर तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलार्म बज उठा, जिससे फ्लाइट में मौजूद सभी यात्रियों में हड़कंप मच गया। पायलट ने फ्लाइट को सुरक्षित जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड कराया अलार्म बजते ही पायलट और केबिन क्रू पूरी तरह सतर्क हो गए। पायलट को कॉकपिट में इमरजेंसी अलर्ट मिला, जिसके बाद स्थिति की जांच की गई। हालांकि क्रू की सूझबूझ से हालात को नियंत्रित कर लिया गया और फ्लाइट को सुरक्षित रूप से जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड कराया गया। फ्लाइट शुक्रवार रात करीब 10 बजकर 11 मिनट पर जैसे ही जयपुर एयरपोर्ट पहुंची, पहले से अलर्ट सुरक्षा एजेंसियों ने चेतन को हिरासत में ले लिया। जांच के बाद यात्री को एयरपोर्ट थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। पैसेंजर से पूछताछ में जुटी पुलिस एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, पैसेंजर की इस लापरवाही से फ्लाइट की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। फिलहाल पुलिस पैसेंजर से पूछताछ कर रही है कि उसने फ्लैप स्विच क्यों खोला और उसके पीछे क्या मंशा थी। बता दें, कि उड़ान के दौरान इस तरह की हरकतें गंभीर सुरक्षा उल्लंघन की श्रेणी में आती है। इसके लिए कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। घटना के बाद एयरपोर्ट और एयरलाइंस की सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर एक बार फिर सतर्कता बढ़ा दी गई है। क्या होता है फ्लैप स्विच एवन हेलिकॉप्टर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर सोहन सिंह नाथावत ने बताया- फ्लैप स्विच अलग-अलग फ्लाइट के हिसाब से कॉकपिट में या कॉकपिट के बाहर हो सकता है। फ्लैप स्विच एक उपकरण है, जिसका उपयोग एयरक्राफ्ट के पंखों के पीछे लगे फ्लैप्स को ऊपर या नीचे करने के लिए किया जाता है। जब फ्लैप्स नीचे खुलते हैं, तो यह पंख की सतह को बढ़ाकर कम गति पर भी लिफ्ट बढ़ाते हैं, जिससे टेकऑफ (उड़ान) में आसानी होती है। लैंडिंग (उतरने) के समय, फ्लैप्स हवा में रुकावट (ड्रैग) पैदा करते हैं, जो विमान को धीमा करने और सुरक्षित रूप से नीचे उतारने में मदद करता है। यह आमतौर पर एक छोटा लिवर या स्विच होता है, जिसे पायलट 0°, 10°, 20° या 30° जैसी विभिन्न स्थितियों पर सेट कर सकते हैं। दोषी को 2 साल तक की कैद हो सकती है सोहन सिंह नाथावत ने बताया- एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर विमान के किसी उपकरण (स्विच, बटन आदि) के साथ छेड़छाड़ करता है, तो उसे 2 साल तक की कैद या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। उन्होंने बताया- अगर ऐसी छेड़छाड़ से विमान की सुरक्षा या किसी की जान जोखिम में पड़ती है, तो सजा और भी सख्त हो सकती है। साथ ही ऐसे दोषी यात्रियों को एयरलाइंस द्वारा 'नो-फ्लाई लिस्ट' (प्रतिबंधित यात्रियों की सूची) में डाला जा सकता है। ये खबरें भी पढ़िए जयपुर-मुंबई एअर इंडिया फ्लाइट का फ्यूल लीक हुआ:रनवे पर जाते वक्त पायलट को खराबी का सिग्नल मिला, यात्रियों को दूसरे प्लेन से भेजा गया जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एअर इंडिया की फ्लाइट AI-622 में फ्यूल लीकेज की वजह से टेकऑफ रोक दिया गया। यह फ्लाइट शाम 7:55 बजे जयपुर से मुंबई के लिए रवाना होने वाली थी और एयरक्राफ्ट रनवे की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान तकनीकी सिस्टम में खराबी का अलर्ट मिला। (पूरी खबर पढ़ें) मुंबई-जयपुर फ्लाइट के लैंडिंग गियर में खराबी,फुल इमरजेंसी लैंडिंग:हाइड्रोलिक सिस्टम में लीकेज होने लगा, 189 यात्री सवार थे जयपुर एयरपोर्ट पर मुंबई से जयपुर आ रही स्पाइसजेट एयरलाइंस की फ्लाइट SG-649 की इमरजेंसी लैंडिंग हुई। फ्लाइट के लैंडिंग गियर के हाइड्रोलिक सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई थी। पायलट ने ATC को इसकी सूचना देकर इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। विमान में 189 पैसेंजर्स सवार थे। (पूरी खबर पढ़ें)
Dainik Bhaskar तेलंगाना में जहरीला इंजेक्शन देकर 300 कुत्तों की हत्या:सरपंच ने चुनाव में वादा किया था; एक महीने में 900 कुत्तों को मारा जा चुका
तेलंगाना के जगतियाल जिले के पेगडापल्ली गांव में 300 आवारा कुत्तों की जहरीला इंजेक्शन देकर हत्या कर दी गई। एक एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के दावे के मुताबिक गांव के सरपंच ने दिसंबर में हुए चुनाव में जनता से कुत्तों से छुटकारा दिलाने का वादा किया था। मामले में BNS और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। FIR में गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव को दोषी ठहराया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सरपंच ने आवारा कुत्तों को मारने के लिए कुछ लोगों को काम पर रखा था। इससे पहले जनवरी में ही तेलंगाना में कुल 600 कुत्तों को अलग अलग गांवों में जहर देकर मारने की घटना सामने आई थीं। इससे मरने वाले कुल कुत्तों की संख्या 900 पहुंच गई है। पुलिस बोली- दफनाने की जगह से 80 कुत्तों के शव निकाले गए पुलिस ने बताया कि दफनाने की जगह से लगभग 70 से 80 कुत्तों के शव निकाले गए। ऐसा लग रहा था कि शवों को तीन से चार दिन पहले दफनाया गया था। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर, हम घटना में आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं कर सकते। उन्होंने आगे कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है और आगे की जांच जारी है। 14 जनवरी को पहला केस सामने आया तेलंगाना के गांवों में ग्राम पंचायत चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर आवारा कुत्तों को मारने के मामले सामने आए हैं। बीते एक हफ्ते में अलग-अलग जिलों के गांवों में करीब 600 कुत्तों की कथित तौर पर हत्या की गई है। पालवंचा मंडल के 5 गावों- भवानीपेट, पालवंचा, फरीदपेट, वाड़ी और बंदारामेश्वरपल्ली गांवों में बीते दो-तीन दिनों में करीब 200-300 आवारा कुत्तों को मारने का आरोप है। पुलिस ने पांच सरपंचों सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इससे पहले, हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में 6 जनवरी से 9 जनवरी के बीच लगभग 300 आवारा कुत्तों की हत्या का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस संबंध में दो महिला सरपंचों और उनके पतियों सहित नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पूरी खबर पढ़ें… -------------- ये खबर भी पढ़ें… आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट बोला- हमारी टिप्पणियां मजाक नहीं:मौत मामले में डॉग फीडर्स भी जिम्मेदार; हर जगह स्थानीय प्रशासन फेल सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, ‘आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो नगर निकाय के साथ ही डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।’ कोर्ट ने कहा- पिछली सुनवाई की हमारी टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा। हम गंभीर हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar भिंड में बलाएं लेकर फौजी पति को दी आखिरी विदाई:लोगों से बोलीं- रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा, 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
जम्मू के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हादसे में शहीद हुए भिंड के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव चितावली (अटेर) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के 6 वर्षीय बेटे भावेश भदौरिया ने मुखाग्नि दी। इससे पहले जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बता दें कि डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह समेत 10 जवान शहीद हुए थे। शिवानी ने शहीद पति की अंतिम विदाई के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने पति के पार्थिव शरीर के पास रो रहे लोगों से कहा, “रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा।” इसके बाद वह पति के पार्थिव शरीर के पास बैठ गईं और दोनों हाथों से पति के गालों को चूमते हुए बार-बार बलाएं लेती रहीं। उनका हौसला देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। आखिरी कॉल पर कहा था- मुझे डर लग रहा है दैनिक भास्कर से चर्चा में पत्नी शिवानी ने बताया कि 21 जनवरी की रात उनकी शैलेंद्र से आखिरी बात हुई थी। उस रात शैलेंद्र ने एक सपना देखा था। उन्होंने बताया, "मैंने सपने में देखा कि दोनों बेटियों को बहुत पढ़ाया, पैसा खर्च किया, लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं। घरवाले शादी को लेकर चिंतित हैं। पैसे नहीं बचे हैं।" शिवानी ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा था, “चिंता मत करो, हमारे पास प्लॉट है। रिटायरमेंट के बाद उसे बेचकर बेटियों की शादी कर देंगे।” इस पर शैलेंद्र ने कहा था- “मुझे बहुत डर लग रहा है। कुछ होने वाला है।” इसके बाद उनके शहीद होने की खबर आई। पिता बोले- दादा भी 1972 में शहीद हुए थे शहीद के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और नम आंखों से कहा, “मेरे तीन पुत्र हैं। तीनों ही आर्मी में हैं। शैलेंद्र मेरा दूसरा बेटा था। मुझे अपने बेटे पर गर्व है। उसने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। ऐसे शूरवीर बेटे पर मैं कुर्बान हूं।” उन्होंने बताया कि शैलेंद्र के दादा भी सेना में थे। वर्ष 1972 में शहीद हुए थे। आज मेरा बेटा भी शेर की तरह शहीद हुआ है। तीनों भाई सेना में, बड़े भाई बोले- फौजी होने पर गर्व शहीद के बड़े भाई देव सिंह ने बताया कि हम तीन भाई हैं। तीनों ही सेना में रहे हैं। मैं रिटायर हो चुका हूं। एक फौजी होने के नाते गर्व भी है कि भाई ने देश रक्षा में प्राण न्योछावर किए। अंतिम सलामी देने पहुंचे ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने कहा कि पूरा आर्मी परिवार शहीद के परिजनों के साथ खड़ा है। परिवार को मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। बेटे को बिलखता देख रो पड़े लोग शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें के नारे लगाए। शमशान घाट पर हजारों की भीड़ के बीच जब मासूम भावेश ने पिता का पार्थिव शरीर देखा तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। मुखाग्नि देने से पहले वह पिता से लिपट गया। इस मौके पर मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल और तहसीलदार जगन सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
Dainik Bhaskar थरूर बोले-कांग्रेस के किसी भी स्टैंड का विरोध नहीं किया:केवल ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर असहमति थी, इसके लिए माफी नहीं मांगूंगा
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि मैंने पार्लियामेंट में कांग्रेस के किसी भी स्टैंड का किसी भी स्टेज पर विरोध नहीं किया है। उन्होंने आगे कहा कि एकमात्र मुद्दा जिस पर सिद्धांत के आधार पर पब्लिक में असहमति हुई, वह ऑपरेशन सिंदूर था। उन्होंने कहा कि इस मामले पर मैंने बहुत मजबूत स्टैंड लिया था, और मैं उसके लिए कोई माफी नहीं मांगूंगा। पहलगाम की घटना के बाद, मैंने खुद इंडियन एक्सप्रेस में एक कॉलम लिखा था। मैंने उस आर्टिकल में कहा था कि यह बिना सजा के नहीं जा सकता, इसका जवाब देना ही होगा। तिरुवनंतपुरम सांसद ने शनिवार को कोझिकोड के केरल लिटरेचर फेस्टिवल में दर्शकों के सवालों का जवाब देते हुए ये बातें कहीं। थरूर की स्पीच की बड़ी बातें… थरूर के पिछले 5 बयान जो चर्चा में रहे… 9 जनवरी: नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन हर समस्या के लिए उन्हें गलत ठहराना सही नहीं केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में 9 जनवरी को शशि थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले दोषी ठहराना पूरी तरह गलत और अनुचित है। थरूर ने कहा- मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र-विरोधी है, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू-विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें… 1 जनवरी: शशि थरूर बोले- मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका केरल के वायनाड स्थित सुल्तान बथेरी में कहा कि मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका। मेरा सवाल है, किसने कहा कि मैंने पार्टी लाइन छोड़ दी। जब मैंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय व्यक्त की तो पार्टी और मैं एक ही लाइन पर खड़े थे। शशि ने कहा था कि मैं 17 साल से पार्टी में हूं और सहकर्मियों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। अब अचानक किसी गलतफहमी की कोई जरूरत नहीं है। पूरी खबर पढ़ें… 27 दिसंबर- प्रधानमंत्री का हारना भारत के हारने जैसा विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, भारत की होती है। अगर राजनीति में कोई प्रधानमंत्री की हार पर खुश होता है, तो वह भारत की हार की खुशी मना रहा होता है। भारत को पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा खतरों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें... 25 दिसंबर- अवैध प्रवासियों पर सरकार का एक्शन सही देश में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले लोगों (अवैध प्रवासियों) के खिलाफ सरकार के एक्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को ठीक से संभालना सरकार की जिम्मेदारी है। पूरी खबर पढ़ें... 4 नवंबर- भारत में पॉलिटिक्स फैमिली बिजनेस भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए एक लेख में कहा था- भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है। जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, तब तक लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सकेगा। पूरी खबर पढ़ें... ………………………… ये खबर भी पढ़ें... थरूर ने वीर सावरकर अवॉर्ड लेने से इनकार किया: बोले-आयोजकों ने बिना पूछे नाम घोषित किया कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 10 अक्टूबर को X पर एक पोस्ट में वीर सावरकर अवॉर्ड को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा- मैं ये अवॉर्ड लेने नहीं जा रहा हूं। मुझे इसके बारे में केरल में रहते हुए मीडिया रिपोर्ट्स से ही जानकारी मिली। कांग्रेस सांसद ने कहा कि आयोजकों ने बिना पूछे मेरा नाम घोषित किया है। ऐसे में दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar तिरुवनंतपुरम नगर-निगम ने BJP पर लगाया जुर्माना:यहां BJP का ही मेयर; PM के दौरे पर फ्लैक्स बोर्ड लगाने को लेकर पुलिस केस भी दर्ज
तिरुवनंतपुरम नगर निगम ने भारतीय जनता पार्टी(BJP) पर 19.7 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। ये जुर्माना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केरल दौरे के दौरान शहर में फुटपाथों पर फ्लेक्स बोर्ड लगाने पर लगाया गया है। बोर्ड लगाने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक तिरुवनंतपुरम नगर निगम के सचिव की शिकायत के बाद कैंटोनमेंट पुलिस ने शुक्रवार देर रात BJP जिला अध्यक्ष करमना जयन के खिलाफ मामला दर्ज किया। दिसंबर में हुए नगर निगम चुनाव में तिरुवनंतपुरम में BJP ने 50 सीटें जीती थीं। इसके बाद 26 दिसंबर को BJP के वीवी राजेश को यहां का मेयर बनाया गया था। FIR में केरल हाइकोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप FIR में केरल हाई कोर्ट के कई आदेशों और स्थानीय स्वशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन का आरोप है। इसमें कहा गया कि BJP जिला समिति ने प्रधानमंत्री के दौरे के हिस्से के रूप में फुटपाथों पर फ्लेक्स बोर्ड लगाए। इससे पालियम जंक्शन से पुलिमूडु जंक्शन तक जनता को असुविधा हुई। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 (लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किए गए आदेशों की अवज्ञा) और 285 (सार्वजनिक रास्तों में खतरा, बाधा और जोखिम पैदा करना) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(b) (जनता को बाधा, असुविधा और खतरा पैदा करना) के तहत दर्ज किया गया है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि BJP नेताओं को अवैध रूप से लगाए गए फ्लेक्स बोर्ड हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। 26 दिसंबर: केरल में पहली बार भाजपा का मेयर बना केरल में पहली बार भाजपा का मेयर चुना गया है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में 26 दिसंबर को हुए मेयर चुनाव में भाजपा के वीवी राजेश को 51 वोट मिले। जिसमें एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन भी शामिल था। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के पी शिवाजी को 29 वोट, जबकि कांग्रेस गठबंधन (UDF) उम्मीदवार केएस सबरिनाथन को 19 वोट मिले। जिनमें से दो को बाद में अमान्य घोषित कर दिया गया। पूरी खबर पढ़ें… 45 साल से LDF का कब्जा था तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर पिछले 45 साल से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) का कब्जा था। 2020 में तिरुवनंतपुरम के स्थानीय निकाय चुनावों में LDF ने 52 वार्ड जीते थे। भाजपा-नेतृत्व वाले NDA को 33 वार्ड मिले थे और UDF ने 10 वार्डों में जीत हासिल की थी। तिरुवनंतपुरम कांग्रेस सांसद शशि थरूर का गढ़ माना जाता है। ---------- ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- तमिलनाडु में DMK सरकार का काउंटडाउन शुरू, ये बस एक परिवार की जी हुजूरी में लगे हैं; केरल में पीएम ने कहा- यहां भाजपा की नींव पड़ गई पीएम मोदी ने शुक्रवार को तमिलनाडु और केरल का दौरा किया। केरल के तिरुवनंतपुरम में 55 मिनट की स्पीच में पीएम ने कहा कि 1987 के पहले गुजरात में बीजेपी एक हाशिए की पार्टी थी। अखबार में दो लाइन नहीं छपती थीं। तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में पीएम ने कहा कि राज्य के लोग डीएमके के कुशासन से मुक्ति चाहते हैं। डीएमके सरकार का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar 5 मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू छात्रा को बुर्का पहनाया, VIDEO:बोलीं- इस्लाम कबूल करो किस्मत बदल जाएगी, यूपी के मुरादाबाद में सभी पर FIR
यूपी के मुरादाबाद में 5 मुस्लिम लड़कियों ने एक हिंदू छात्रा को जबरन बुर्का पहनाया। आरोप है कि कोचिंग से निकलने के बाद उसे सड़क पर घेर लिया। बैग से बुर्का निकाला और पहना दिया। कहने लगीं कि इस्लाम कबूल करो, किस्मत बदल जाएगी। इसमें बहुत खूबसूरत लगोगी। पीड़ित और आरोपी लड़कियां एक ही स्कूल में 12वीं में पढ़ती हैं। सभी की उम्र 15-17 साल के बीच है। साथ में कोचिंग भी जाती हैं। घटना 20 दिसंबर की है, लेकिन 22 जनवरी को लड़की के भाई ने थाने में FIR कराई। पुलिस ने पांचों लड़कियों पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की, तो शुक्रवार को CCTV सामने आया। मामला बिलारी कस्बे के एक मोहल्ले का है। पीड़ित लड़की चौधरी समाज से आती है। 3 तस्वीरें में देखिए पूरी घटना... भाई बोला- ‘मेरी बहन का ब्रेनवॉश किया’ हिंदू छात्रा के भाई ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि मेरी नाबालिग बहन बिलारी कस्बे के मोहल्ला शाहकुंज कॉलोनी में एक टीचर के घर ट्यूशन पढ़ने जाती थी। मेरे घर से 1.5 किमी की दूरी पर कोचिंग है। बाकी पांचों मुस्लिम छात्राएं भी उसके साथ जाती थीं। 11वीं क्लास में इन लड़कियों से मेरी बहन की दोस्ती थी। सभी मोहल्ले और आसपास की थीं, तो स्कूल और ट्यूशन साथ में जाती थीं। छात्राओं ने मेरी बहन का ब्रेनवॉश करना शुरू कर दिया। पांचों उसे बार-बार इस्लाम धर्म कबूल करने के लिए उकसाती रहती थीं। उसके मन में हिंदू धर्म के प्रति घृणा पैदा करने की कोशिश की। 'बहन घरवालों की बातें भी नहीं सुनती थी' भाई ने कहा, “एक बार लड़कियां मेरी बहन को रेस्टोरेंट में लेकर गईं। इसी दौरान पांचों ने खाना ऑर्डर किया। इसी दौरान लड़कियों ने खाने में कुछ मिला दिया। वहीं मेरी बहन उनके झांसे में आ गई। उसका सिर भारी रहने लगा। इसके बाद से मेरी बहन घरवालों की बातें भी नहीं सुनती थी। मना करने के बाद भी उन्हीं मुस्लिम लड़कियों के साथ ही स्कूल और कोचिंग आती-जाती थी। मैंने एक साधु को दिखाया तो उसने भी बताया कि इस पर किसी ने कुछ करा दिया है। 20 दिसंबर को मुस्लिम लड़कियां ट्यूशन से निकलीं। इसके बाद कोचिंग से दूसरी वाली गली में गईं। यहीं मेरी बहन को बुर्का पहनाया। बहन ने मुझसे पूरी बात बताई। 'घटना के पीछे जरूर कोई गहरी साजिश' भाई ने कहा, “इस पूरी घटना के पीछे जरूर कोई गहरी साजिश है। कोई इस्लामिक संगठन छात्राओं को आगे करके हिंदू नाबालिग लड़कियों को बरगलाकर धर्मांतरण की मुहिम चला रहा है, जिसकी जांच कर उसके खिलाफ कार्रवाई करना आवश्यक है।” पोल में हिस्सा लेकर राय दे सकते हैं- घटना को लेकर हिंदू संगठनों में भी आक्रोश घटना को लेकर हिंदू संगठनों में भी आक्रोश है। संगठनों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि स्कूलों को धर्मांतरण के साए से दूर रखा जा सके। एसपी ग्रामीण कुंवर आकाश ने बताया- शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -------------------------------------- ये खबर भी पढ़िए- कानपुर में बक्से में 45 मिनट बंद रहा बॉयफ्रेंड:घर में चाची आईं तो ताला लगाया; पुलिस ने लड़के को बाहर निकाला कानपुर में लड़की का बॉयफ्रेंड बक्से के अंदर 45 मिनट तक बंद रहा। वह अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने पहुंचा था। इसी बीच लड़की की चाची घर पहुंच गईं। शक होने पर चाची ने दरवाजा खटखटाया, तो लड़की ने बॉयफ्रेंड को बक्से में छिपा दिया। फिर बाहर से ताला लगा दिया। पढ़ें पूरी खबर...
Dainik Bhaskar पंजाब में गणतंत्र दिवस से पहले रेलवे लाइन पर धमाका:सरहिंद में मालगाड़ी का इंजन क्षतिग्रस्त, 4 फीट हिस्सा उड़ा; RDX से ब्लास्ट करने का शक
गणतंत्र दिवस से 48 घंटे पहले पंजाब में फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद में रेलवे लाइन पर एक जोरदार धमाका हुआ है। इस घटना में एक मालगाड़ी का इंजन क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि उसके चालक को चोटें आई हैं। सूत्रों के अनुसार, यह धमाका बेहद खतरनाक था। इसमें आरडीएक्स का इस्तेमाल होने का शक जताया जा रहा है। यह घटना शुक्रवार रात करीब 11 बजे उस समय हुई, जब एक मालगाड़ी नई बिछाई गई रेल लाइन से गुजर रही थी। यह नई रेलवे लाइन विशेष रूप से मालगाड़ियों के संचालन के लिए ही बनाई गई है। मालगाड़ी का इंजन जैसे ही खानपुर फाटकों के पास पहुंचा, अचानक जोरदार धमाका हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि रेलवे लाइन का लगभग तीन से चार फीट हिस्सा पूरी तरह से उड़ गया। धमाके में मालगाड़ी के इंजन चालक को चोटें आई हैं। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। रेलवे अधिकारियों को तुरंत इसकी सूचना दी गई। धमाका होने की पुष्टि पुलिस के अधिकारी भी कर रहे हैं। धमाका कैसे हुआ? इसके बारे में पुलिस अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग एंगलों से जांच करनी शुरू कर दी है। रेलवे लाइन पर धमाके से हुए नुकसान के कुछ PHOTOS.. हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं...
Dainik Bhaskar अमृतसर के गोल्डन टेंपल विवाद में माफी अस्वीकार:गाजियाबाद पहुंचे निहंग, बोले- धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली हरकत
पंजाब के अमृतसर में गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में कुल्ला करने वाले मुस्लिम युवक सुब्हान रंगरीज को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। युवक की ओर से सोशल मीडिया पर माफी मांगे जाने के बावजूद सिख समुदाय ने अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया है। इसी कड़ी में कुछ निहंग सिख यूपी के गाजियाबाद पहुंचे और युवक के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। निहंगों का कहना है कि जिस तरह की हरकत युवक ने की, वह सिखों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिख समुदाय पर अक्सर कानून हाथ में लेने के आरोप लगाए जाते हैं, इसलिए वे सबसे पहले कानून के दायरे में रहकर पुलिस के पास आए हैं। उनके पास युवक से जुड़ी पूरी जानकारी मौजूद है। वे चाहते हैं कि वह सार्वजनिक रूप से आकर सिख मर्यादा के अनुसार माफी मांगे। उधर, इस मामले में गाजियाबाद पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि युवक सुब्हान दिल्ली का रहने वाला है। इस बारे में उसे पूछताछ की जाएगी। निहंग सिखों की ओर से गाजियाबाद के थाने में दी गई शिकायत... सिलसिलेवार ढंग से जानिए गोल्डन टेंपल में कुल्ला करने का मामला... पवित्र सरोवर में कुल्ला करते हुए रील बनाई पंजाब के अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में एक युवक के पवित्र सरोवर में कुल्ला करते हुए रील बनाई गई। वीडियो को 'मुस्लिम शेर' लिखकर सोशल मीडिया पर डाला गया है। जो युवक कुल्ला करता दिखाई दे रहा है, उसे मुस्लिम टोपी पहनी हुई है। ये वीडियो सामने आने के बाद विरोध शुरू हो गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मनन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि वीडियो की जांच होगी। अगर यह ओरिजिनल है, तो फिर उस वक्त सेवादार कहां थे, इसकी जांच की जाएगी। हालांकि बाद में युवक ने माफी मांग ली। बता दें कि SGPC की तरफ से पहले ही धार्मिक भावनाओं को देखते हुए गोल्डन टेंपल परिसर में रील बनाने को लेकर रोक लगाई गई है। इसके लिए वहां सेवादारों की ड्यूटी लगाई गई है कि वे किसी को वहां इस तरह का आपत्तिजनक वीडियो न बनाने दें। जानिए, रील में क्या दिख रहा इस संबंध में 13 सेकेंड की रील वायरल हो रही है। इसमें दिख रहा है कि गोल्डन टेंपल के सरोवर में एक युवक पैर डालकर बैठा है और मुंह धो रहा है। इस दौरान वह 3 बार मुंह में पानी भरकर कुल्ला करता है और एक बार उस पानी को दोबारा सरोवर में ही थूक देता है। इसके बाद वह मुंह धोता है और फिर अंगुलियों से सामने गोल्डन टेंपल को भी दिखाता है। युवक ने काले रंग की जैकेट और जींस पहनी है और सिर पर काले रंग की मुस्लिम टोपी पहनी हुई है। ये मर्यादा के विपरीत- SGPC प्रधान SGPC के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के पावन सरोवर में युवक की तरफ से की गई, हरकत मर्यादा के विपरीत है। गोल्डन टेंपल सिख धर्म का सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल है। इस तरह की घटनाओं से सिखों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचती है। उन्होंने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब सिर्फ सिखों ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए आस्था का प्रतीक है। यहां मर्यादा, परंपरा और नियमों का पूर्ण रूप से पालन करना चाहिए। युवक ने माफी मांगी, कहा-जानकारी नहीं थी वीडियो वायरल होने के बाद युवक सामने आया। युवक ने कहा कि वह बचपन से ही श्री हरमंदिर साहिब जाना चाहता था, उसने पवित्र सरोवर में कुल्ला किया। इस दौरान उससे गलती से सरोवर में थूक गिर गया। उसे श्री हरमंदिर साहिब की मर्यादा के बारे में जानकारी नहीं थी। वह जल्द ही श्री हरमंदिर साहिब आएगा और वहां जाकर भी माफी मांगेगा।
Dainik Bhaskar जोधपुर- 'थ्री इडियट्स' वाले वांग्चुक जेल में कर रहे एक्सपेरिमेंट:बैरक अब गर्मी में भी ठंडे रहेंगे, पेरेंटिंग एडवाइज ले रहा जेल स्टाफ
एक्टिविस्ट व साइंटिस्ट सोनम वांगचुक जोधपुर में जेल में एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। गर्मियों में भी जेल को ठंडा रखने को लेकर वह इनाेवेशन में जुटे हैं। इतना ही नहीं, जेल के स्टाफ उनसे बेहतर पेरेंटिंग के टिप्स भी ले रहे हैं। इसका खुलासा उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने किया है। गीता आंत्र प्रिन्योर हैं। सोनम से मिलने जोधपुर जेल में वह अक्सर आती रहती हैं। मशहूर हिंदी फिल्म 'थ्री इडियट्स' सोनम वांगचुक के जीवन पर बनी है। वांगचुक पिछले चार महीने से जोधपुर की जेल में हैं। उन्हें लद्दाख के लिए स्टेट-हुड मांगने और 6वें शेड्यूल में जोड़ने के लिए चल रहे धरने से NSA के तहत गिरफ्तार किया गया था। वांगचुक को लेकर सोशल मीडिया पर खूब बात होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर क्या हो रहा है? सोनम का जेल में क्या हाल है? वे वहां अपना समय कैसे बिताते हैं। इस पर उनकी पत्नी से दैनिक भास्कर ने बात की। सवाल: जेल में सोनम वांगचुक क्या सोचते हैं? जवाब: लद्दाख में लोग इसलिए चुप हैं, क्योंकि उन्हें डराया गया है। पहले इंटरनेट भी बंद था। इस बारे में सोनम और मैं बात करते हैं। उन्हें दुख होता है कि क्यों लोग बातों को नहीं रख पा रहे। बात सिर्फ भारत की ही नहीं, अमेरिका में देखो क्या हो रहा है। सवाल: जेल में क्या कोई एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं? जवाब: जोधपुर जेल के कॉन्स्टेबल और जेलर, बच्चों के लिए सोनम वांगचुक से लगातार पेरेंटिंग एडवाइज ले रहे हैं। सोनम प्रयोग करने में माहिर हैं। उन्होंने पहले भी ऐसे कई इनोवेटिव प्रयोग किए हैं। सोनम ने पिछले दिनों मुझसे कहा कि सुप्रीम कोर्ट और जेल अथॉरिटी के जरिए उन्हें कुछ इंस्ट्रूमेंट्स और थर्मामीटर मिल गए हैं। इनका उपयोग वह जेल के बैरक को कुछ बेहतर करने के लिए करेंगे, ताकि वह गर्मियों में ठंडे रहें और सर्दियों में गर्म। फिलहाल वे लगातार किताबें पढ़ रहे हैं। --- सोनम वांगचुक को राजस्थान शिफ्ट करने की यह खबर भी पढ़िए... सोनम वांगचुक जोधपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट:लद्दाख से कड़ी सुरक्षा में लाए गए; सरकार ने लेह में हुई हिंसा का जिम्मेदार माना था लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शुक्रवार को अरेस्ट कर लिया गया। उन्हें लद्दाख से कड़ी सुरक्षा में जोधपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया। (पढ़िए पूरी खबर)
Dainik Bhaskar 18वां रोजगार मेला आज- पीएम 61 हजार जॉब लेटर बांटेंगे:देशभर के 45 जगहों पर आयोजन; अब तक 11 लाख लोगों को रोजगार मिला
पीएम मोदी शनिवार को 18वें रोजगार मेले में 61 हजार जॉब लेटर बांटेंगे। ये नियुक्ति गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों में की गई है। रोजगार मेले का आयोजन देश के 45 जगहों पर किया जाएगा। रोजगार मेले का आयोजन देश भर में 45 स्थानों पर किया जाएगा। पिछला रोजगार मेला 24 अक्टूबर 2025 को आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री ने 22 अक्टूबर 2022 को रोजगार मेले का पहला फेज शुरू किया था। अब तक 11 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल चुका है। 17वां रोजगार मेला: पीएम बोले- यह केवल सरकारी नौकरी नहीं, राष्ट्र सेवा का मौका पिछले साल अक्टूबर में 17वें रोजगार मेले में जॉब लेटर बांटते हुए पीएम ने कहा, आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हम भारत की युवा क्षमता को एक बड़ी ताकत मानते हैं। हम हर क्षेत्र में इसी दृष्टिकोण और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारी विदेश नीति भी भारत के युवाओं के हितों पर केंद्रित है। युवाओं के लिए एक और बड़ा कदम है प्रतिभा सेतु पोर्टल। जो उम्मीदवार यूपीएससी की अंतिम सूची तक पहुंचे, लेकिन सिलेक्ट नहीं हुए। उनकी मेहनत भी अब व्यर्थ नहीं जाएगी। इसीलिए निजी और सार्वजनिक संस्था इस पोर्टल से उन युवाओं को निमंत्रित कर सकती है। इंटरव्यू कर सकती हैं। और अवसर भी दे सकते हैं। युवाओं की प्रतिभा का यह सदुपयोग ही भारत के युवा सामर्थ्य को दुनिया के सामने लेकर आएगा। अक्टूबर 2022 से शुरू हुआ था रोजगार मेला प्रधानमंत्री ने 22 अक्टूबर 2022 को रोजगार मेले का पहला फेज शुरू किया था। तब PM ने कहा था- हमारा लक्ष्य देश के युवाओं को 2023 के आखिर तक 10 लाख सरकारी नौकरियां देना था। नवंबर 2023 तक कुल 11 रोजगार मेलों में 7 लाख से ज्यादा युवाओं को जॉइनिंग लेटर दिए गए थे। 11 लाख का आंकड़ा 2025 में पूरा हुआ था। हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले 12 फरवरी 2024 को 12वां रोजगार मेला आयोजित हुआ था, जिसमें सबसे ज्यादा 1 लाख जॉब लेटर बांटे गए थे। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- तमिलनाडु में DMK सरकार का काउंटडाउन शुरू: ये बस एक परिवार की जी हुजूरी में लगे हैं तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में पीएम ने कहा कि राज्य के लोग डीएमके के कुशासन से मुक्ति चाहते हैं। डीएमके सरकार का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। पीएम ने गांधी परिवार का नाम लिए बिना कहा कि तमिलनाडु सरकार बस एक परिवार की जी हुजूरी में लगी है। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar अविमुक्तेश्वरानंद बोले- केशव मौर्य समझदार, CM बनाना चाहिए:धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- सनातन का मजाक न बनाएं, दोनों सनातनी...समझौता कर लें
प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच 6 दिनों से विवाद जारी है। इसी बीच, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कोटा में कहा- दोनों पक्ष सनातनी हैं, आपस में बैठकर समझौता करें। सनातन का मजाक बनने से कोई फायदा नहीं। वहीं, अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य को समझदार नेता बताया। कहा- डिप्टी सीएम समझदार हैं, ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए। वो समझते हैं कि अफसरों से गलती हुई। जो अकड़ में बैठा हो, उसे मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए। दरअसल, यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने गुरुवार को कहा था- पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनसे प्रार्थना करता हूं कि स्नान करें। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत शुक्रवार सुबह बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार था। 5 घंटे दवा खाकर आराम करते रहे। मेला प्रशासन से टकराव के चलते अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या के बाद वसंत पंचमी का भी संगम स्नान नहीं किया। अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है- जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक मैं स्नान नहीं करूंगा। फिलहाल, अविमुक्तेश्वरानंद को दो नोटिस भेजने के बाद से अफसर चुप्पी साधे हैं। मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था, जानिए 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे। प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने पर सवाल पूछे गए थे, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल पर सवाल पूछे गए। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिस के जवाब भेज दिए थे। शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए...
Dainik Bhaskar ममता बोलीं-SIR की चिंता में बंगाल में रोज 4 आत्महत्याएं:110 से ज्यादा लोगों की मौत हुई; चुनाव आयोग और केंद्र सरकार जिम्मेदार
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुक्रावार कहा कि बंगाल में SIR की चिंता में हर रोज 3 से 4 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। अब तक 110 से ज्यादा लोग मर चुके हैं। रोज 3-4 लोग SIR की चिंता में आत्महत्या कर रहे हैं। 40-45 लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इतने साल बाद क्या हमें यह साबित करना पड़ेगा कि हम इस देश के नागरिक हैं? ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता के रेड रोड पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के कार्यक्रम ये बातें कही। ड्राफ्ट लिस्ट से 58 लाख नाम हटने का दावा ममता बनर्जी ने बताया कि दिसंबर में जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि राज्य में कुल 7.6 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 1.66 करोड़ मतदाताओं की नागरिकता को लेकर संदेह जताया गया है। उन्हें दस्तावेजों की दोबारा जांच के लिए सुनवाई का नोटिस भेजा गया है। ममत बोलीं- मेरा नाम बनर्जी और बंदोपाध्याय दोनों तरह लिखा जाता है मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में एक ही उपनाम की अलग-अलग वर्तनी आम बात है। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि मेरा सरनेम बनर्जी और बंदोपाध्याय दोनों तरह से लिखा जाता है, लेकिन SIR कराने वालों को यह तक समझ नहीं है। ममता के मुताबिक इसी तरह की गड़बड़ियों के कारण 1.38 करोड़ लोगों को नोटिस भेजे गए। ममता ने आरोप लगाया कि बुजुर्ग लोगों को भी SIR की सुनवाई के लिए बुलाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को भी इस संबंध में नोटिस क्यों भेजा गया। BJP पर साजिश और इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप मुख्यमंत्री ने भाजपा पर बंगाल के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. अंबेडकर और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे महापुरुषों का अपमान किया जा रहा है और देश के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने BLO पर कार्रवाई की प्रक्रिया तय की इसी बीच चुनाव आयोग ने सभी राज्यों को चिट्ठी भेजकर कहा है कि अगर कोई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मिसकंडक्ट करता है, आयोग के निर्देशों का पालन नहीं करता, नियमों का उल्लंघन करता है या चुनावी काम में लापरवाही करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। चुनाव आयोग के लेटर की तीन बड़ी बातें… ------- ये खबर भी पढ़ें… चुनाव आयोग बोला- सभी राज्यों की SIR प्रोसेस अलग:जिनके नाम कटे, उनकी शिकायतें नहीं मिलीं; सर्वे में केवल BLO शामिल, पुलिस नहीं चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन(SIR) प्रक्रिया में जिनके नाम कटे हैं, अभी तक किसी की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है। SIR की सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे किसी एक मामले के तथ्यों को उठाकर उन्हें किसी दूसरे राज्य की SIR प्रक्रिया पर लागू करना गलत होगा, क्योंकि हर जगह प्रक्रिया अलग रही है। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar कच्छ भूकंप के 25 साल:तबाही के बीच पैदा हुआ बेटा, नाम रखा भूकंप; एक बच्चा 3 दिन बाद मलबे से निकला जिंदा
यह 26 जनवरी 2001 की सुबह थी। घड़ी में 8.40 मिनट का समय हुआ था, तभी गुजरात के कच्छ में विनाशकारी भूकंप आया। इसी समय अंजार तालुका की वोहरा कॉलोनी में असगरअली लकड़ावाला घर के बाहर बैठे हुए थे। भूकंप के झटके आते ही वे बाहर भागे। कुछ ही सेकेंड्स में कॉलोनी के लगभग सभी घर मलबे में तब्दील हो चुके थे। यहां रहने वाले 300 लोगों में से 123 लोगों की मौत हो चुकी थी। किस्मत से असगरअली के घर को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था, जिससे उनका परिवार सुरक्षित बच गया था। लेकिन, कच्छ से करीब 86 किमी दूर मांडवी में असगरगली के ससुराल पक्ष के 8 लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन उसी परिवार का 8 महीने का बच्चा मलबे के नीचे सांसें ले रहा था। 3 दिनों से मलबे में दबा रहा 8 महीने का मुर्तुजा इसी परिवार में आठ महीने का एक बच्चा गुम था। यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि वह तीन दिन तक मलबे में दबे रहने के बाद भी जिंदा बच गया था। मुर्तजा नाम का यह बच्चा अब 25 साल का हो चुका है। इस त्रासदी में मुर्तजा ने अपने पूरे परिवार को खो दिया था। उनके दादा, माता-पिता, चाचा-चाची और उनकी दो बेटियां-परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई थी। मुर्तजा की दादी उस समय अपने मायके मोरबी गई हुई थीं, जिससे उनकी जान बच गई थी। असगरअली बताते हैं कि मलबे में दबे मुर्तजा को सेना के एक जवान ने बाहर निकाला था। उसने जैसे ही एक पत्थर हटाया तो उसके नीचे मुर्तजा था। आर्मी की मेडिकल टीम ने वहीं उसका प्राथमिक इलाज किया। उसके सिर में गंभीर चोटें थीं। इसके बाद मुर्तजा को मुंबई के लीलावती अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां 21 दिन तक उसका इलाज चला। इलाज के बाद वह अपनी दादी के साथ रहने लगा। मुर्तजा जब डेढ़ साल के थे, तभी असगरअली ने उन्हें गोद ले लिया था। मुर्तजा अब भुज में असगर अली के साथ ही रहते हैं और हार्डवेयर बिजनेस में उनक हाथ बंटाते हैं। आज भी मुर्तजा के चेहरे पर उस समय मलबे से लगी चोटों के निशान हैं, जो उसे इस आपदा की लगातार याद दिलाते हैं। मुर्तजा बताते हैं कि उसके फूफा के दो बेटे हैं और वह तीसरा भाई है। तीनों साथ रहते हैं। तीनों की शादी हो चुकी है और सभी संयुक्त परिवार में हंसी-खुशी से रहते हैं। दूसरा किस्सा... भूकंप आने के 5 मिनट बाद पैदा हुआ, नाम रखा ‘भूकंप’ कच्छ में रहने वाली शनिबेन 26 जनवरी 2001 की सुबह खेत पर थीं। इसी दौरान उन्हें प्रसव पीड़ा होने लगी तो वे घर लौट आईं। इसी दौरान 8.40 बजे भूकंप आ गया। भूकंप आने के 5 मिनट बाद ही उनके बेटे का जन्म हुआ था। किस्मत से शनिबेन का घर आपदा में बच गया था, जिससे मां-बेटे और उनकी बड़ी बेटी की जान बच गई थी। शनिबेन बताती हैं कि भूकंप में उनका पूरा घर हिल रहा था। वे घर से बाहर आकर बेहोश हो गई थीं। जब उन्हें होश आया तो वे एक दूसरे घर के दालान में थीं। एक बुजुर्ग महिला ने उनकी मदद की और वहीं बेटे का जन्म हुआ। शनिबेन बताती हैं कि बच्चे के जन्म के बाद दो दिन तक इलाज नहीं मिल सका था। अमेरिकन डॉक्टर ने कहा- इसका नाम ‘भूकंप’ रख दो हालांकि, इसके बाद बचाव टीमें शहर में आ गई थीं। काफी कमजोरी आ जाने के चलते तीसरे दिन उन्हें बेटे के साथ शहर ले जाया गया। यहां अमेरिका से आए डॉक्टर्स की टीम थी। इसी दौरान नर्स ने उनसे पूछा कि बच्चे का नाम क्या है। शनिबेन ने उससे कहा कि अभी इसका कोई नाम नहीं रखा है। तभी एक अमेरिकन डॉक्टर ने कहा- इसका नाम ‘भूकंप’ रख दो। उस समय मैंने कहा- आपको जो नाम देना हो दे दीजिए। इलाज के दो-तीन दिन बाद मां-बेटे घर लौट आए और बच्चे का नाम भूकंप ही रख दिया। शनिबेन के बाद हमने उनके बेटे भूकंप रबारी से भी बात की। भूकंप फिलहाल एक कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करता है। भूकंप ने कहा कि जब मैं छोटा था तो आसपास के बच्चे ‘भूकंप-भूकंप’ कहकर ही बुलाते थे। शुरू में उसे समझ नहीं आता था, लेकिन मां ने मुझे बताया कि हमारी जान बचाने वाले विदेश से आए एक डॉक्टर ने उसका नाम ‘भूकंप’ रखा था। भूकंप कहता है कि इतनी बड़ी आपदा में भी वे बच गए, इसलिए उसके लिए ‘भूकंप’ नाम बुरा नहीं है। भूकंप के जन्म के समय मौजूद उसके मामा गाभाभाई रबारी ने बताया कि उस दिन वे खुद घटनास्थल पर मौजूद थे। सुबह 8:40 बजे भूकंप आया और 8:45 बजे उनके भांजे का जन्म हुआ। जब बहन को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो सबसे पहले वे दाई को लेकर आए थे। कच्छ में भूकंप के बाद विदेशों से सैकड़ों डॉक्टर्स की टीमें गुजरात पहुंची थीं। भांजे के जन्म के पांचवें दिन अमेरिकी डॉक्टर ने कहा—इतनी बड़ी आपदा में भी यह बच्चा बच गया है। इसलिए इसका नाम ‘भूकंप’ रख देना चाहिए। फिर हम उसे इसी नाम से ही बुलाने लगे।
Dainik Bhaskar कच्छ भूकंप के 25 साल:कलेक्टर के नाम पर भुज में बसा शहर, मलबे से कच्छ को खड़ा करने वाले 6 लोगों की कहानी
26 जनवरी, 2001 के दिन गुजरात के भुज जिले में भीषण भूकंप आया था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.7 थी। करीब 700 किलोमीटर दूर तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। कच्छ और भुज शहर में 12,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और करीब 6 लाख लोगों को बेघर होना पड़ा। भूकंप का सबसे ज्यादा असर कच्छ में हुआ था। कच्छ में चारों ओर सिर्फ तबाही थी। ऐसा लग रहा था कि कच्छ अब शायद कभी दोबारा खड़ा नहीं हो पाएगा। लेकिन, कच्छ के पुनर्निर्माण में ऐसे कई चेहरे रहे, जिनकी इच्छाशक्ति, दूरदृष्टि और कड़ी मेहनत ने कच्छ को दोबारा खड़ा कर दिया। ऐसे ही कुछ चर्चित चेहरों की कहानी भास्कर की विशेष सीरीज कच्छ भूकंप @25 में पेश की जा रही है। 1. कच्छ भूकंप के बाद सीएम बने थे नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक चर्चित सूत्र है- आपदा को अवसर में बदलना। यह विचारधारा भूकंप की त्रासदी के बाद स्पष्ट रूप से सामने आई। कच्छ भूकंप के करीब 8 महीनों बाद (3 अक्बूटर, 2001) नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। आज जो कच्छ आप देख रहे हैं, वह नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि का ही परिणाम है। इन्फ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, पोर्ट और पर्यटन के विकास के जरिए उन्होंने गुजरात के इस सबसे बड़े जिले की पूरी तस्वीर बदल दी। रेगिस्तानी कच्छ तक पानी पहुंचाया मोदी ने भूकंप में तबाह हुए हजारों घरों का पुनर्निर्माण कराया और गांवों तथा शहरों में दोबारा रौनक लौटाई। पहले सूखा क्षेत्र माने जाने वाले कच्छ की सबसे बड़ी जरूरत पानी थी। नरेंद्र मोदी ने कच्छ की प्यास बुझाने के लिए नर्मदा योजना का पानी यहां तक पहुंचाया। इससे खेती को बड़ा लाभ हुआ। इसके अलावा मोदी ने उद्योगों के लिए टैक्स में छूट दी, जिससे कच्छ में बड़े-बड़े उद्योग आए और हजारों लोगों को रोजगार मिला। आज के समय में कच्छ की गिनती एशिया के बड़े औद्योगिक केंद्रों (इंडस्ट्रियल हब) में होती है। रणोत्सव ने बदली कच्छ की तस्वीर कच्छ में पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए नरेंद्र मोदी ने 2005 में रणोत्सव की शुरुआत करवाई। पहला रणोत्सव सिर्फ तीन दिनों के लिए आयोजित किया गया था। आज वही रणोत्सव 100 से अधिक दिनों तक चलता है और दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। वर्ष 2005 से पहले जिस रण में जाने को कोई तैयार नहीं होता था, उसी रण ने आज कच्छ की एक अलग और वैश्विक पहचान बना दी है। 2. कलेक्टर बिपिन भट्ट: अपार्टमेंट मॉडल पर शहर बसाने का खाका तैयार किया बिपिन भट्ट सेवानिवृत्त अतिरिक्त कलेक्टर हैं। कच्छ में भूकंप के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उनके नाम पर बिपिन भट्ट नगर भी बसाया गया। कच्छ के इतिहास में शायद यह पहली ऐसी घटना है, जब किसी अधिकारी के नाम पर पूरा नगर बसाया गया हो। टाउन प्लानिंग थी सबसे बड़ी चुनौती बिपिन भट्ट ने दिव्य भास्कर से विशेष बातचीत में बताया कि वर्ष 2002 में उनकी नियुक्ति भुज शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में हुई थी। उन्होंने करीब 10 महीने तक इस जिम्मेदारी को निभाया। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती नया शहरी नियोजन (टाउन प्लानिंग) करना था। रो-हाउस की बजाय अपार्टमेंट मॉडल पर शहर बसाने की योजना तैयार करने में सात दिन लगे। योजना को अंतिम रूप देने के बाद एक ही दिन में भर्ती कर काम शुरू कर दिया गया। जहां पहले इतनी संकरी गलियां थीं कि मुश्किल से स्कूटर या साइकिल निकल पाती थी, वहां अब ऐसे चौड़े रास्तों की योजना बनाई गई, जिनसे बड़े वाहन भी आसानी से गुजर सकें। इस काम में अखबारों, स्थानीय लोगों और स्वयंसेवी संस्थाओं का अच्छा सहयोग मिला। 3. सुरेश मेहता: कच्छ को टैक्स हॉलिडे घोषित करवाया वर्ष 1969–70 में अहमदाबाद में जज के रूप में सेवा दे चुके मूल रूप से कच्छ के मांडवी निवासी सुरेश मेहता एक अनुभवी और परिपक्व राजनेता भी हैं। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता कच्छ भूकंप के समय राज्य के उद्योग मंत्री थे। नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद कच्छ को दोबारा खड़ा करने के काम में सुरेश मेहता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कच्छ के लिए विशेष पैकेज घोषित करवाने में उनका अहम रोल रहा। कच्छ को टैक्स हॉलिडे घोषित किए जाने के बाद मुंद्रा और गांधीधाम जैसे इलाकों में बड़े-बड़े उद्योग स्थापित हुए। कच्छ के लोगों को रोजगार मिल सके, इसके लिए उन्होंने बड़े उद्योगपतियों से यहां निवेश करने का निवेदन किया था। अडाणी, टाटा और वेलस्पन जैसी दिग्गज कंपनियों का कच्छ में आना सुरेश मेहता की मेहनत का ही परिणाम था। इन बड़ी कंपनियों के आने से कच्छ की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। ब्रॉडगेज लाइन को भुज तक बढ़ाने की परमिशन ली सुरेश मेहता बताते हैं- उस समय रेलवे की ब्रॉडगेज लाइन सिर्फ कांडला पोर्ट तक ही थी। मेरी मांग थी कि ब्रॉडगेज को भुज तक बढ़ाया जाए। इसके लिए मैंने कई स्तरों पर लगातार प्रयास किए। वे आगे बताते हैं- खाड़ी ऐसा इलाका था, जहां पहुंचने के लिए रापर होकर घूमकर जाना पड़ता था, जिसकी दूरी करीब 150 किलोमीटर हो जाती थी। उस समय वहां फोन की सुविधा भी नहीं थी। भूकंप के दौरान प्रमोद महाजन टेलिकॉम मंत्री थे। उन्होंने हालात देखे और हमें सैटेलाइट फोन उपलब्ध कराए। इसके बाद प्रमोद महाजन ने खड़ी गांव को गोद भी लिया। 4. रसिक ठक्कर: लगातार 18 दिनों तक वे खुद श्मशान में डटे रहे भुज पूरी तरह तबाह हो चुका था। चारों ओर मलबा फैला था और उसके नीचे अनगिनत शव दबे हुए थे, जिन्हें बाहर निकालकर अंतिम संस्कार करना जरूरी था। शहर में अलग-अलग समाजों के श्मशान थे। लोहाणा समाज का श्मशान भुज के बीचों-बीच स्थित था। उस समय रसिक ठक्कर लोहाणा समाज के अध्यक्ष थे। रसिकभाई लगातार 18 दिनों तक श्मशान में डटे रहे और 900 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार करवाया। लोग शव श्मशान में रखकर चले जाते थे रसिकभाई के बेटे घनश्याम ठक्कर बताते हैं कि हालात इतने बदतर थे कि शुरुआती दो-तीन दिनों तक श्मशान में लाशों का ढेर लगा था। किसी शव का हाथ कटा हुआ था, किसी का पैर। ज्यादातर शव मलबे में दबकर क्षत-विक्षत हो चुके थे। शम्शान मे इतने शव थे कि लोग शवों को श्मशान में रखकर चले जाते थे। यह उनकी मजबूरी थी। क्योंकि, वे लगातार शव ला रहे थे और इसके साथ ही उन्हें घायलों की देखरेख भी करनी थी। पिता रसिकभाई की सेवा को याद करते हुए उनके बेटे घनश्याम ठक्कर बताते हैं कि आपदा में पूरे के पूरे परिवार ही खत्म हो गए थे। इसलिए पिताजी ने तय किया कि वे खुद शवों का अंतिम संस्कार करेंगे। उन्होंने 18 दिनों में करीब 900 शवों का अंतिम संस्कार किया। 5. अनंत दवे: भूकंप के बाद वे करीब 15 दिन तक भुज में रहे दिवंगत सांसद अनंत दवे भूकंप वाले दिन दिल्ली में 26 जनवरी की परेड के कार्यक्रम में मौजूद थे। जैसे ही उन्हें भूकंप की खबर मिली, वे तुरंत कच्छ पहुंचे। अनंत दवे के पुत्र देवांग दवे ने दिव्य भास्कर से बातचीत में बताया कि भूकंप की सूचना मिलते ही मेरे पिता लालकृष्ण आडवाणी के साथ कच्छ पहुंचे। सबसे पहले उन्हें यह चिंता हुई कि लोगों के खाने का क्या होगा। इसके बाद वे सीधे अमृतसर गए और पंजाब से सबसे पहला लंगर कच्छ लेकर आए। इस काम में बादल परिवार ने भी सहयोग किया। कच्छ में लंगर की व्यवस्था खड़ी की गई। देवांग दवे बताते हैं कि पिता अनंत पर कच्छ की आपदा इतना गहरा असर हुआ था कि वे कई दिनों तक सो नहीं पाए थे। भूकंप के बाद वे करीब 15 दिन तक भुज में रहे। उस समय उनकी कार ही उनका दफ्तर और घर थी। वे रात को कार में ही सोते थे। भूकंप ने लोगों के मनोबल पर गहरा असर डाला था। ऐसे में उन्होंने हर रात भजन-कीर्तन की शुरुआत करवाई। पंडित दीनदयाल के नाम से भुज के ग्राउंड में एक ओपन एयर थिएटर बनाकर लोगों के रहने की भी व्यवस्था की। 6. पुष्पदान गढ़वी: मुंद्रा पोर्ट का भी विकास करवाया कच्छ से लोकसभा सांसद रहे पुष्पदान गढ़वी ने वर्ष 1996 से 2009 तक लोकसभा में कच्छ का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहले वे पांच साल तक विधायक भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया- मैं और अनंत दवे दिल्ली गए और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिले। एक बार बजट सत्र के दौरान मुझे रात ढाई बजे संसद में बोलने का मौका मिला। संसद में मेरी बात सुनी गई और कच्छ में विकास कार्य तेजी से हुए। उस समय वाजपेयी ने कहा कि कच्छ में एक नई और बेहतर अस्पताल बनाना चाहिए। इसी सोच के तहत कच्छ की मौजूदा जनरल अस्पताल को AIIMS स्तर का बनाया गया। इसके लिए उस समय AIIMS का अध्ययन किया गया और उसी से प्रेरणा लेकर कच्छ के अस्पताल को विकसित किया गया। वाजपेयी ने कच्छ को टैक्स हॉलिडे घोषित किया वाजपेयी ने हमसे पूछा था कि कच्छ को संवारने के लिए क्या किया जाना चाहिए। तब हमने फंड की कमी, सूखे की गंभीर समस्या, सड़कों के अभाव जैसी हमारी वर्षों पुरानी मांगें फिर से उनके सामने रखीं। इन सभी बातों को सुनने के बाद वाजपेयी ने कच्छ को टैक्स हॉलिडे घोषित किया। इसके चलते यहां बड़ी-बड़ी कंपनियां आईं। इसके बाद मुंद्रा पोर्ट का भी विकास हुआ। इसी एक फैसले से कच्छ में औद्योगीकरण की शुरुआत हुई।
Dainik Bhaskar जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी, एवलांच की चेतावनी:हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में बारिश और ओले गिरे, बिजली गिरने से आग लगी
जम्मू-कश्मीर के मैदानी और पहाड़ी जिलों में बर्फबारी हुई। श्रीनगर एयरपोर्ट पर 4 इंच तक बर्फ जम गई है, इसके कारण शुक्रवार के लिए सभी फ्लाइट कैंसिल कर दी गई हैं। उत्तराखंड के 10 जिलों में बर्फबारी से रास्ते बंद हो गए। हिमाचल प्रदेश में इस सीजन की पहली स्नोफॉल हुई। शिमला में बर्फीला तूफान चला। इसके कारण शिमला शहर में शुक्रवार सुबह से ब्लैक आउट हो गया। शहर के 95 प्रतिशत इलाकों में बिजली गुल हो गई। तीनों राज्यों में मौसम विभाग की तरफ से ऊचे इलाकों में एवलांच की चेतावनी जारी की गई है। उधर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में बारिश हुई साथ ही कुछ जगह पर ओले गिरे। यूपी के मेरठ में चर्च पर बिजली गिरने से आग लग गई। राजस्थान के भरतपुर में भी बिजली गिरने से महिला झुलस गई, जबकि एक भैंस की मौत हो गई। 5 तस्वीरों में देखें मौसम का हाल… अगले 2 दिन के मौसम का हाल… 25 जनवरी 26 जनवरी
Dainik Bhaskar हिमाचल में दो दिन बारिश और बर्फबारी:शिमला में आधा, कुफरी-नारकंडा में 1-1 फीट तक बर्फ पड़ी, तापमान 13 डिग्री गिरा; सैलानियों की भीड़ बढ़ी
हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है। शुक्रवार से शुरू हुई बर्फबारी शनिवार को भी जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार शिमला के जाखू में करीब आधा फीट बर्फबारी हुई है, जबकि कुफरी, नारकंडा और आसपास के पर्यटन स्थलों पर एक फीट से अधिक बर्फ जमी है। मनाली में भी आधा फीट से ज्यादा बर्फबारी दर्ज की गई है। इसके अलावा चंबा और लाहौल-स्पीति के कई क्षेत्रों में भारी हिमपात हुआ है। लगातार बर्फबारी के कारण प्रदेश के कई इलाकों का संपर्क देश के अन्य हिस्सों से कट गया है। उधर, बारिश और बर्फबारी के चलते प्रदेश के तापमान में जबरदस्त गिरावट आई है। हिमाचल का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़क गया है, जबकि बीते 24 घंटों में तापमान में करीब 13 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दो से तीन दिनों के दौरान तापमान में और गिरावट आ सकती है, जिससे ठंड और बढ़ेगी। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने के कारण 23 से 27 जनवरी तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है। 24 और 25 जनवरी को ऊंचे इलाकों में बर्फबारी के आसार हैं। 27 जनवरी को एक बार फिर कई क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी हो सकती है। गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर कोल्ड-डे, घना कोहरा, तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी भी जारी की है। भारी बर्फबारी को देखते हुए लोगों और पर्यटकों को पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। शुक्रवार को भी कुछ टूरिस्ट बर्फबारी के कारण फंस गए थे, जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू कर शिमला पहुंचाया था। कई शहरों में वाहनों की आवाजाही ठप अपर शिमला में ठियोग, रोहड़ू, रामपुर और चौपाल क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। कुल्लू जिले के कई क्षेत्रों के संपर्क मार्ग भी बाधित हुए हैं, जबकि लाहौल-स्पीति जिले का संपर्क पूरी तरह कट गया है। चंबा के भरमौर और पांगी क्षेत्रों में भी सड़क संपर्क टूट गया है। शिमला में बन गई थी ब्लैक आउट की स्थिति राजधानी शिमला में भारी बर्फबारी के चलते शुक्रवार सुबह से ब्लैक-आउट की स्थिति बनी रही। शहर के करीब 95 प्रतिशत इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप रही। देर शाम तक कुछ क्षेत्रों में बिजली बहाल की जा सकी, लेकिन बर्फीले तूफान और खराब मौसम के कारण आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। प्रदेशभर में 550 से ज्यादा सड़कें और 950 से अधिक बिजली के ट्रांसफॉर्मर ठप हो गए हैं। पांगी और भरमौर का संपर्क कटा चंबा के पांगी व भरमौर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों का प्रदेश के अन्य हिस्सों से संपर्क कट गया है। इसके चलते 600 से ज्यादा रूटों पर एचआरटीसी और निजी बस सेवाएं भी प्रभावित रहीं। कुल्लू जिले में भारी बर्फबारी को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन कुल्लू और बंजार उपमंडल में सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला लिया है। उपायुक्त कुल्लू ने छात्रों और अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है। होटल और पर्यटन कारोबार को राहत ताजा बर्फबारी से प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर रौनक लौट आई है और बड़ी संख्या में पर्यटक हिमाचल का रुख कर रहे हैं, जिससे होटल और पर्यटन कारोबार को राहत मिली है। वहीं किसानों और बागवानों के लिए यह बर्फबारी संजीवनी साबित हो रही है। हालांकि, खराब मौसम के कारण आम लोगों को आवाजाही, बिजली और संचार से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
Dainik Bhaskar कांग्रेस नेता ने 10 बार पैर पकड़ माफी मांगी,VIDEO:पानीपत में महिला से मोबाइल नंबर मांगने का आरोप, ग्रामीणों ने पकड़ा तो बोला- तू मेरी बहन
पानीपत बस स्टैंड का एक वीडियो सामने आया है जिसमे कांग्रेस के एक नेता की लोग जमकर क्लास ले रहे हैं। नेता बार-बार एक महिला के पैरों की तरफ झुककर फिर घुटनों पर बैठकर माफी मांगते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है प्राइवेट बस में महिला का मोबाइल नंबर मांगने से उपजे विवाद के बाद ये सारा हंगामा हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो बनाकर वायरल किया। हालांकि इस संबंध में महिला की ओर से किसी थाने में शिकायत देने की बात सामने नहीं आई है। वीडियो में दिख रहे सतपाल वाल्मीकि इसराना हलके से कांग्रेस के टिकट के दावेदारों में शामिल रहे थे। हालांकि इस घटना और वायरल वीडियो को लेकर उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया या पक्ष नहीं आया। दैनिक भास्कर एप की टीम ने जब उनका पक्ष लेने के लिए उनके मोबाइल पर संपर्क किया तो उन्होंने इतना ही कहा- किसी शोक सभा में हूं, अगली सुबह बात करूंगा। पूरे घटनाक्रम से जुड़े PHOTOS... यहां पढ़िए, क्या है पूरा मामला... टिकट की दौड़ में थे शामिल सतपाल वाल्मीकि इसराना विधानसभा क्षेत्र से सक्रिय राजनीति में हैं और 2024 के चुनावों में कांग्रेस की ओर से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। इस घटना के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए भी असहज स्थिति पैदा हो गई। वहीं स्थानीय विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर यूजर्स कमेंट कर रहे हैं।
Dainik Bhaskar नारनौल में रामभद्राचार्य की कथा के भव्य इंतजाम:30 एकड़ में पंडाल, 35 हजार की सीटिंग, हाई-प्रोफाइल मेहमान; RSS प्रमुख समेत कई CM आमंत्रित
नारनौल के श्याम मंदिर -जौरासी धाम में शनिवार से रामकथा व 151 कुंडीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ शुरू होगा। इसकी तैयारियों की भव्यता सबको चौंका रही है। 30 एकड़ में वाटरप्रूफ पंडाल लगाया गया है। 15 किलोमीटर एरिया में पुलिस सिक्योरिटी की व्यवस्था की गई है। आयोजनों की सिक्योरिटी इंतजाम इससे अलग हैं। कथा व्यास जगद्गुरु रामभद्राचार्य को कथास्थल तक लाने के लिए डिफेंडर व रेंज रोवर समेत कई महंगी गाड़ियों का काफिला रहेगा। करीब 30 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है, हालांकि एंट्री सिर्फ उन्हीं को मिलेगी, जिन्हें संस्था पास जारी करेगी। आयोजन स्थल की भव्यता के साथ ही मेहमान की लिस्ट भी चौंकाने वाली है। इनमें RSS प्रमुख मोहन भागवत समेत हरियाणा, महाराष्ट्र, यूपी, मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों के गवर्नरों और CM समेत कई केंद्रीय मंत्रियों के नाम शामिल हैं। कथा का आयोजन करवा रहे माइनिंग कारोबारी विनीत पिलानिया पर 6 दिसंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड हुई थी। ED की यह कार्रवाई तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर सुरेंद्र उर्फ चीकू के करीबियों पर हुई थी। सबसे पहले जानिए कौन करवा रहा यह आयोजन चित्रकूट के नाम से संस्था, हरियाणा के खनन कारोबारी अध्यक्ष यह आयोजन आर्यवर्त सेवा न्यास चित्रकूट की ओर करवाया जा रहा है। नारनौल से सात किलोमीटर दूर स्थित जोरासी गांव में बने श्याम बाबा के मंदिर के पास आयोजन होगा। यह रामकथा रोजाना शाम को तीन बजे से छह बजे तक होगी। इस कथा से पहले शुक्रवार को शहर में भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई। संस्था मूलरूप से चित्रकूट की है, जिसके संस्थापक विनीत पिलानिया हैं, जो माइनिंग का काम करते हैं। वे मूलरूप से चरखी दादरी के रहने वाले हैं। उनका यहां पर माइनिंग का कारोबार है। संस्था का गठन करीब एक साल पूर्व ही हुआ था। इसके अन्य पदाधिकारी भी माइनिंग से जुड़े लोग हैं। 3 महीने की तैयारियों में जानिए क्या 6 खास इंतजाम हुए एंट्री पाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन संस्था के पदाधिकारियों ने शहर की अन्य धार्मिक संस्थाओं के साथ मिलकर आयोजन का जिम्मा लिया हुआ है। करीब तीन माह से इसकी तैयारियां की जा रही थीं। संस्था की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हुए हैं। अब उन्हीं लोगों को एंट्री मिलेगी, जिनका रजिस्ट्रेशन हुआ है। सात अलग-अलग रंग के पास जारी किए गए हैं। ये पास अलग-अलग दिन के लिए अलग-अलग रंगों के हैं। इन पास को दिखाने के बाद ही कथा स्थल पर एंट्री मिलेगी। 30 एकड़ में पंडाल, जयपुर से लाइटें मंगवाई करीब 30 एकड़ में पंडाल लगा हुआ है। कथास्थल व हवन स्थल को वाटर प्रूफ पंडाल से ढका है, ताकि बारिश व सर्दी से बचाव हो सके। लाइटिंग के लिए अलवर व जयपुर से विशेष लाइटें मंगाई गई हैं। 35 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। पंडाल के बाहर ग्राउंड भी काफी बड़ा बनाया गया है, जहां पर लोगों के सुनने के लिए स्क्रीन लगाई गई हैं। 50 जगह कैमरे, विशेष कंट्रोल रूम में कनेक्शन सिक्योरिटी के लिए 50 जगह कैमरे लगाए गए हैं। पंडाल में जगह-जगह कैमरों के अलावा रास्तों पर भी कैमरे लगे हैं। जिनके संचालन के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। नारनौल व निजामपुर की ओर 6 जगह पार्किंग बनाई गई हैं। 8 दिन डायवर्ट रहेगा रूट, भारी वाहनों पर रोक 30 जनवरी तक नारनौल से निजामपुर रोड पर भारी वाहनों का प्रवेश पूर्णत प्रतिबंधित रहेगा। नारनौल की तरफ से निजामपुर जाने वाले वाहन अब मांदी से होते हुए निजामपुर की ओर जाएंगे। निजामपुर से नारनौल आने वाले वाहनों को नेशनल हाईवे 148-बी से होते हुए बाइपास का प्रयोग करके नारनौल की तरफ भेजा जाएगा। डिफेंडर-रेंज रोवर काफिले में चलेंगे कथा व्यास रामभद्राचार्य शुक्रवार को ही नारनौल पहुंच गए। वो विनीत पिलानिया की सेक्टर एक स्थिति कोठी में ठहरे हैं। वे रोजाना गाड़ियों के काफिले के साथ कथास्थल तक जाएंगे। रामभद्राचार्य के जाने-आने के लिए जो काफिला रहेगा उसमें डिफेंडर, रेंज रोवर जैसे कई महंगी गाड़ियां रहेंगी। पुलिस सिक्योरिटी के साथ प्राइवेट इंतजाम भी प्रशासन की ओर से एसपी पूजा वशिष्ठ दो बार आयोजन स्थल का जायजा ले चुकी हैं। सुरक्षा की दृष्टि से इस 15 किलोमीटर के नारनौल-निजामपुर रोड पर जगह-जगह पुलिस तैनात की गई है। इसके अलावा आयोजकों की ओर से प्राइवेट सुरक्षाकर्मी भी लगाए हैं। जिनमें मेल-फीमेल दोनों हैं। ये खास ड्रेस कोड में तैनात रहेंगे। अब जानिए आयोजकों की मेहमान लिस्ट में कितने बड़े नाम शामिल हरियाणा में पहली बार हो रहा आयोजन आर्यवर्त सेवा न्यास के प्रवक्ता कपिल भारद्वाज ने बताया कि प्रदेश में ही इस तरह का पहला आयोजन सेवा न्यास की ओर से हो रहा है। सेवा न्यास की ओर से श्रद्धालुओं के लिए पूरी व्यवस्था की गई हैं। कई राज्यों में निमंत्रण पत्र भेजे गए हैं। हालांकि कौन हस्ती किन दिन मेहमान रहेगी, ये शेड्यूल अभी सार्वजनिक नहीं किया है। मेहमानों की लिस्ट में भागवत समेत कई गवर्नर व सीएम RSS प्रमुख मोहन भागवत, यूपी CM योगी आदित्यनाथ, हरियाणा CM नायब सैनी, महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस, हरियाणा गवर्नर असीम घोष, राजस्थान गवर्नर हरी भाऊ किशन राव, मध्यप्रदेश गवर्नर मंगू भाई छगन भाई पटेल, केंद्रीय मंत्री मनोहर खट्टर, नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान समेत कई राजनीतिक हस्तियां आमंत्रित हैं। हरियाणा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के भी आने की संभावना है। जन्म से दृष्टिबाधित रामभद्राचार्य, कठोर टिप्पणियों के लिए मशहूर जगद्गुरु रामभद्राचार्य एक संस्कृत विद्वान और हिंदू धर्मगुरु हैं। वे जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं, फिर भी अपनी असाधारण विद्वत्ता के लिए जाने जाते हैं। उन्हें रामभक्ति परंपरा के प्रमुख आचार्य के रूप में माना जाता है। रामानंद संप्रदाय में उन्हें जगद्गुरु की उपाधि मिली है। उन्होंने संस्कृत, हिंदी और अवधी में कई रचनाएं की हैं। वे जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट का संचालन करते हैं। उन्हें 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वे ज्वलंत मुद्दों पर अपनी तीखी और कठोर टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में, प्रयागराज में माघ मेले में चल रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रकरण में उन्होंने तल्ख रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्वयं नियमों का उल्लंघन किया है। उनके साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है, बल्कि उन्होंने अन्याय किया है। वे बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने वाले बयान का भी समर्थन कर चुके हैं। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- नारनौल में शराब-खनन कारोबारियों के घर रेड:पूर्व सरपंच को साथ ले गई ED; गैंगस्टर चीकू और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत के करीबी हरियाणा के नारनौल में NIA के निशाने पर आने के बाद तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर सुरेंद्र उर्फ चीकू के करीबियों ED की रेड हुई थी। ED रामपुरा गांव के पूर्व सरपंच नरेश उर्फ नरसी को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। पढ़ें पूरी खबर...
Dainik Bhaskar दुनिया के 100 बड़े शहरों में आधे में जल संकट:दिल्ली चौथे नंबर पर, चेन्नई डे जीरो के करीब; मुंबई और बेंगलुरु भी प्रभावित
संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया अब ‘जल महासंकट’ के दौर में है। दुनिया के 100 सबसे बड़े शहरों में आधे शहरों को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें दिल्ली, बीजिंग, न्यूयॉर्क और रियो जैसे बड़े शहर शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 39 शहरों में स्थिति बेहद गंभीर है। रिपोर्ट में दिल्ली 4वें स्थान पर है। कोलकाता 9वें, मुंबई 12वें, बेंगलुरु 24वें और चेन्नई 29वें स्थान पर हैं। इसके अलावा हैदराबाद, अहमदाबाद, सूरत और पुणे भी लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे हैं। काबुल में पानी पूरी तरह खत्म होने का खतरा है। मैक्सिको सिटी हर साल करीब 20 इंच की दर से धंस रही है क्योंकि भूमिगत जल अधिक उपयोग किया जा रहा है। अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी राज्यों में कोलोराडो नदी के पानी को लेकर विवाद चल रहा है। 4 अरब लोग पानी की कमी से जूझ रहे रिपोर्ट के मुताबिक, नदियां और झीलें सिकुड़ रही हैं, भूमिगत जल स्तर गिर रहा है और वाटरलैंड सूख रही हैं। जमीन धंस रही है, सिंकहोल बन रहे हैं और रेगिस्तान फैल रहे हैं। हर साल करीब 4 अरब लोग कम से कम एक महीने तक पानी की कमी का सामना करते हैं। डे जीरो के करीब चेन्नई तेहरान लगातार छठे साल सूखे का सामना कर रहा है और डे जीरो के बेहद करीब है, यानी वो दिन जब नागरिकों के लिए बिल्कुल पानी नहीं बचेगा। केप टाउन और चेन्नई भी पहले इसी स्थिति के करीब पहुंच चुके हैं। यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर वाटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ डिपार्ट्मेंट के डायेक्टर कावेह मदानी का कहना है कि एक नई और सीमित वास्तविकता के साथ जीना सीखना होगा। झील, ग्लेशियर और ग्राउंड वाटर में गिरावट 1990 के बाद से दुनिया की आधी बड़ी झीलों में पानी कम हो गया है। जमीन के नीचे मौजूद पानी के भंडार लगातार 70% तक घट चुके हैं। पिछले 50 सालों में यूरोप की बहुत सारी नमी वाली जमीनें यानी आर्द्रभूमि खत्म हो चुकी हैं। 1970 के बाद से ग्लेशियरों का आकार करीब 30% कम हो गया है। ------------ ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली में क्लाउड सीडिंग रोकी, 3 ट्रायल कामयाब नहीं रहे:एक की कीमत ₹64 लाख: IIT कानपुर ने कहा- नमी बेहद कम थी दिल्ली में बुधवार को होने वाली क्लाउड सीडिंग फिलहाल रोक दी गई है। एक्सपर्ट के मुताबिक, क्लाउड सीडिंग में तभी सफलता मिलती है जब हवा में करीब 50% नमी हो, इस समय हवा में नमी 10-15% के करीब है। पूरी खबर पढ़ें…
Dainik Bhaskar खबर हटके- गर्लफ्रेंड से शादी के लिए अपने पैर काटे:रातों-रात 40 साल पुराना पुल चोरी; जेल में लिव-इन में रह रहे कपल की शादी
उत्तर प्रदेश में एक शख्स ने गर्लफ्रेंड से शादी करने के लिए अपने पैर काट लिए। वहीं छत्तीसगढ़ में 40 साल पुराना एक पुल रातों-रात गायब हो गया। इधर, जेल में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल ने शादी की। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
Dainik Bhaskar मौसम विभाग:जयपुर से जैसलमेर तक ओले गिरे; दिन का पारा 110 गिरा, रात में इतना ही चढ़ा
प्रदेश में माैसम ने फिर से करवट ली है। इस सीजन का सबसे मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सिस्टम सक्रिय हाेने से जैसलमेर से जयपुर तक आंधी-ओले और बारिश का दौर चला। कई शहरों में इस सीजन में पहली बार ओले गिरे। माैसम का मिजाज ऐसे बदला कि रात में पारा 9 डिग्री तक बढ़ा, लेकिन दिन का 9 डिग्री तक लुढ़क गया। दिन में ठिठुरन बढ़ गई। श्रीगंगानगर, जैसलमेर, फलोदी, बाड़मेर, जयपुर, पिलानी, अजमेर में विक्षोभ का सबसे ज्यादा असर रहा। पहाड़ों पर बर्फबारी का ‘वसंत’ पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के निचले इलाकों में पहली बार बर्फबारी हुई। उधर, राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को गणतंत्र दिवस परेड की फुलड्रेस रिहर्सल के दौरान भी लगातार बारिश होती रही। दिल्ली भीगी, लेकिन 26 जनवरी के दिन बारिश के आसार नहीं, धुंध होगी बद्रीनाथ-केदारनाथ में तीन महीने बाद जमकर बर्फबारी, वैष्णोदेवी यात्रा रुकी बीते वर्ष 5 नवंबर के बाद केदारनाथ, बदरीनाथ सहित उत्तराखंड के सभी ऊंचाई वाली जगहों पर जमकर बर्फबारी हुई है। सुबह 8 बजे से ही केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री में बर्फबारी शुरू हो गई थी। जम्मू-कश्मीर के वैष्णो देवी मंदिर क्षेत्र में भी बर्फबारी से यात्रा रोकनी पड़ी।
Dainik Bhaskar भास्कर अपडेट्स:कर्नाटक के बल्लारी में BJP विधायक के मॉडल हाउस में आग, 3 करोड़ में बना था
कर्नाटक के बल्लारी में BJP विधायक जी. जनार्दन रेड्डी के मॉडल हाउस में आग लगने की घटना सामने आई है। यह घटना सोमवार शाम G स्क्वेयर लेआउट में हुई। आग से मॉडल हाउस को भारी नुकसान पहुंचा है। BJP विधायक जी. जनार्दन रेड्डी के भाई और पूर्व विधायक सोमशेखर रेड्डी ने आरोप लगाया है कि यह आग कांग्रेस विधायक नारा भारत रेड्डी के समर्थकों ने जानबूझकर लगाई। उनका दावा है कि हमलावरों ने मॉडल हाउस पर पेट्रोल और डीजल डालकर आग लगाई। सोमशेखर रेड्डी ने कहा कि यह मॉडल हाउस हमारी मां के नाम पर बनाया गया था। भारत रेड्डी के समर्थकों ने पेट्रोल और डीजल डालकर इसमें आग लगा दी। पूरी इमारत जल गई है। इस संपत्ति की कीमत करीब 2 से 3 करोड़ रुपए है। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। BJP कार्यकर्ताओं ने बल्लारी के रॉयल सर्कल इलाके में प्रदर्शन किया और आगजनी के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
Dainik Bhaskar चंद्रपुर में कांग्रेस के 13 पार्षदों ने अलग गुट बनाया:कल्याण-डोंबिवली में उद्धव गुट के 2 पार्षद संपर्क से बाहर, पुलिस से शिकायत
महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चंद्रपुर नगर निगम में शुक्रवार को कांग्रेस के 27 में से 13 पार्षदों ने खुद का अलग गुट बना लिया। यह गुट सुदर्शन अडबाले के नेतृत्व में नागपुर स्थित संभागीय आयुक्त कार्यालय में रजिस्टर कराया गया। गुट के रजिस्ट्रेशन के दौरान कांग्रेस की स्थानीय सांसद प्रतिभा धानोरकर भी मौजूद रहीं। वहीं, कांग्रेस के बाकी 14 पार्षद भी संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे और इस पंजीकरण पर आपत्ति जताई। सूत्रों के मुताबिक, यह खींचतान वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धानोरकर के बीच चल रहे मतभेदों से जुड़ी मानी जा रही है। चंद्रपुर में कांग्रेस के सबसे ज्यादा पार्षद जीते 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनाव में 66 सदस्यीय चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा को 23 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। निगम में बहुमत के लिए 34 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कल्याण-डोंबिवली में उद्धव गुट के दो पार्षद लापता इधर, ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका क्षेत्र में शिवसेना (UBT) के दो पार्षद संपर्क से बाहर हैं। पार्टी का कहना है कि दोनों के मोबाइल फोन बंद हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस मामले में पुलिस से शिकायत की गई है। शिवसेना (UBT) के कल्याण जिला प्रमुख शरद शिवराज पाटिल ने बताया कि पार्षद मधुर उमेश म्हात्रे और कीर्ति राजन धोणे के फोन बंद आ रहे हैं। परिजनों और पार्टी कार्यकर्ताओं से पूछताछ के बावजूद दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पाटिल ने कोलसेवाड़ी पुलिस थाने में शिकायत देकर दोनों के संबंध में मिसिंग पर्सन का मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून-व्यवस्था और जनविश्वास से भी जुड़ा है। दूसरी पार्टी के दबाव की आशंका जताई शरद शिवराज पाटिल ने आशंका जताई कि दोनों के अचानक संपर्क से बाहर होने के पीछे दबाव, धोखाधड़ी, अपहरण या किसी आपराधिक गतिविधि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोलसेवाड़ी पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक गणेश नायंदे ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। 15 जनवरी को हुए चुनाव में 122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 52, भाजपा को 51 और शिवसेना (UBT) को 11 सीटें मिली थीं। ----------- ये खबर भी पढ़ें… मुंबई समेत 15 नगर निगम में महिला महापौर होंगी:उद्धव गुट का आरोप- BMC के लिए नियम बदले, OBC या ST का मेयर होना था महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में से मुंबई समेत 15 में महिलाएं मेयर होंगी। मुंबई में लॉटरी सिस्टम से इन्हें चुना गया। परभणी नगर निगम पर महिला महापौर को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। पूरी खबर पढ़ें…